केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 61 वर्षीय सी श्याम सुंदर को राज्य उपाध्यक्ष बनाया है। पार्टी के इतिहास में पहली बार किसी गैर-मुस्लिम नेता को इस स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है।
केरल की यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। बुधवार को पार्टी ने 61 वर्षीय सी श्याम सुंदर को राज्य उपाध्यक्ष बनाने का ऐलान किया। खास बात यह है कि श्याम सुंदर हिंदू हैं और IUML के इतिहास में पहली बार किसी गैर-मुस्लिम नेता को राज्य उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष संगठनात्मक पद की जिम्मेदारी दी गई है।
यह फैसला पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच हुआ है। IUML अब ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति लागू कर रही है। इसके तहत मंत्रियों और विधायकों समेत निर्वाचित प्रतिनिधियों को संगठन के प्रमुख पदों से अलग किया जा रहा है और उनकी जगह नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है।
कौन हैं सी श्याम सुंदर?
सी श्याम सुंदर केरल के अलप्पुझा जिले के हरिप्पाड इलाके से आते हैं और एक प्रभावशाली नायर परिवार से जुड़े हैं। उनके चाचा आर. शंकरनारायणन थम्बी राज्य विधानसभा के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं।

श्याम सुंदर की राजनीतिक पृष्ठभूमि वामपंथी रही है। वह डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के राज्य कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। 2010 में उन्होंने वामपंथी राजनीति छोड़कर IUML का दामन थामा। इसके बाद पार्टी में स्थानीय कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करते हुए उन्होंने अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं और राज्य स्तर तक पहुंचे।
करीब 16 साल तक IUML से जुड़े रहने के बाद अब उन्हें राज्य उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही पार्टी ने उन्हें इडुक्की और पथनमथिट्टा जिलों का प्रभार भी सौंपा है। इन दोनों जिलों में IUML का पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
IUML के लिए यह फैसला इतना अहम क्यों?
श्याम सुंदर की नियुक्ति सिर्फ संगठन में पदों के फेरबदल तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसका राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण है। IUML पर माकपा लंबे समय से सांप्रदायिक राजनीति और ध्रुवीकरण के आरोप लगाती रही है। दूसरी तरफ पार्टी को मुस्लिम समुदाय के भीतर मौजूद रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचारों से जुड़े दबावों के बीच भी अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।
ऐसे समय में एक हिंदू नेता, वह भी पूर्व वामपंथी नेता, को पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक पद पर जगह देना IUML की व्यापक और समावेशी राजनीतिक पहचान दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। श्याम सुंदर की नियुक्ति से पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि उसकी राजनीतिक पहुंच केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है। साथ ही, पूर्व वामपंथी नेता को शीर्ष पद देने से माकपा के उन आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश भी दिखाई देती है, जिनमें IUML को सांप्रदायिक संगठन के तौर पर पेश किया जाता रहा है।

2010 में IUML से जुड़े थे श्याम
श्याम सुंदर ने 2010 में वामपंथी राजनीति छोड़ने के बाद IUML में प्रवेश किया था। पार्टी में आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे संगठन के भीतर अपनी जगह बनाई। वह पार्टी की किसान इकाई से भी जुड़े और अलग-अलग सांगठनिक जिम्मेदारियां निभाते हुए राज्य नेतृत्व तक पहुंचे।
उनकी नियुक्ति को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह किसी ऐसे नेता को शीर्ष पद देना है, जिसने पार्टी में लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम किया है और जो पारंपरिक रूप से IUML के मुस्लिम सामाजिक आधार से बाहर आते हैं।
क्या बोले सी श्याम सुंदर?
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद श्याम सुंदर ने कहा कि वह IUML के पहले गैर-मुस्लिम राज्य उपाध्यक्ष बनने पर बेहद खुश और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह 2010 से एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी से जुड़े हैं और पिछले वर्षों में पार्टी ने उन्हें जो भी जिम्मेदारियां दीं, उन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया है। अब मिली नई जिम्मेदारी को भी वह पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
इस पूरे संगठनात्मक बदलाव में IUML ने राज्य स्तर पर पी. अब्दुल हमीद, ए. अब्दुरहिमान और श्याम सुंदर को उपाध्यक्ष बनाया है। यह फेरबदल पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति के तहत किया गया है, जिसमें मंत्रियों और विधायकों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग रखा जा रहा है।

यानी श्याम सुंदर की नियुक्ति एक साथ दो संदेश देती है—IUML संगठन को नए सिरे से तैयार कर रही है और साथ ही अपनी पारंपरिक मुस्लिम-केंद्रित पहचान से आगे एक व्यापक राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश भी कर रही है।
