बक्सर। छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अरुण कुमार उर्फ अरुण कमकर (33) को दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त सश्रम कैद भुगतनी होगी। अदालत ने पीड़िता और उसके परिवार को 13 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
यह मामला बक्सर जिले के सिमरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। मामले की सुनवाई बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। अदालत ने सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी माना। इससे पहले 13 अगस्त को अदालत ने अरुण कमकर को दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तारीख तय की थी।
अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
मामले में दोष साबित होने के बाद अदालत ने आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने साफ किया कि अगर आरोपी जुर्माने की रकम जमा नहीं करता है तो उसे एक साल और जेल में सश्रम कारावास भुगतना होगा।
इस फैसले के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हो गया है। बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों की सुनवाई पॉक्सो अदालतों में की जाती है। इन मामलों में बच्चे की पहचान को गोपनीय रखना कानून का जरूरी हिस्सा है। इसी वजह से पीड़िता का नाम या उसकी पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पीड़िता को 13 लाख रुपये की सहायता
अदालत ने पीड़िता और उसके परिवार के लिए आर्थिक सहायता का भी आदेश दिया है। सरकार की ओर से 13 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इस तरह की आर्थिक सहायता का मकसद अपराध से प्रभावित बच्चे और परिवार को जरूरी मदद उपलब्ध कराना होता है।
मुआवजा मिलने से पीड़िता के इलाज, पढ़ाई, देखभाल और आगे के पुनर्वास में मदद मिल सकती है। हालांकि यह सहायता अपराध से हुए मानसिक और भावनात्मक नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन पीड़ित परिवार को आगे की जिंदगी संभालने में आर्थिक सहारा जरूर देती है।
पॉक्सो कानून में बच्चों की सुरक्षा पर जोर
पॉक्सो यानी बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाला कानून 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देता है। इस कानून के तहत बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था है। गंभीर अपराधों में दोष साबित होने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
ऐसे मामलों में अदालत केवल आरोपी और पीड़ित पक्ष की बात ही नहीं देखती, बल्कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य कानूनी रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखती है। इसी प्रक्रिया के बाद बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने इस मामले में आरोपी को दोषी ठहराया और अब उम्रकैद की सजा सुनाई है।
बच्ची की पहचान नहीं की गई सार्वजनिक
मामले में पीड़िता की उम्र महज छह साल थी। कानून के तहत नाबालिग यौन अपराध पीड़ित की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसलिए बच्ची का नाम, पता, स्कूल या ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं रखी गई है, जिससे उसकी पहचान हो सके।
अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा मिली है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के परिवार को 13 लाख रुपये की सरकारी सहायता देने का आदेश हुआ है।
बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत के इस फैसले ने मामले में न्यायिक कार्रवाई को एक निर्णायक मोड़ दिया है। आरोपी को उम्रकैद के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना होगा, जबकि पीड़िता के पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से 13 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।