पटना, 3 अक्टूबर 2026। बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में मरीजों को जरूरी दवाएं, मेडिकल उपकरण और उपचार संबंधी सुविधाएं अधिक आसानी से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक औषधियों एवं मेडिकल डिवाइसेस की सूची (Essential Drug List-EDL) में व्यापक संशोधन किया गया है।
नई सूची में हीमोफीलिया, डायलिसिस, हृदय रोग, सर्वाइकल कैंसर, अस्थमा, सीओपीडी और रैबीज जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े उपचार के लिए जरूरी दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले का सीधा फायदा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने की उम्मीद है।
संशोधित EDL के माध्यम से अस्पतालों में जरूरी दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जिससे मरीजों को कई महत्वपूर्ण उपचार सरकारी व्यवस्था के तहत उपलब्ध हो सकेंगे। इसका उद्देश्य मरीजों के इलाज पर होने वाले निजी खर्च यानी Out-of-Pocket Expenditure को कम करना भी है।
कोर कमिटी की अनुशंसा के बाद EDL में संशोधन
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक संकल्प के अनुसार, आवश्यक औषधियों और मेडिकल डिवाइसेस की सूची की समीक्षा राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के स्तर पर की गई।
निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में आयोजित कोर कमिटी की बैठक में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उपचार सुविधाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्रियों की जरूरतों पर चर्चा की गई।
इस समीक्षा प्रक्रिया में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के अधीक्षक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, सिविल सर्जन और औषधि नियंत्रक शामिल हुए। संबंधित विशेषज्ञों और अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर EDL में जरूरी बदलाव किए गए हैं। इसके बाद सरकार की ओर से संशोधित सूची को लेकर संकल्प जारी किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। आवश्यक दवाओं और मेडिकल उपकरणों की सूची में किए गए संशोधन से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क इलाज का लाभ मिले और इलाज पर उनका निजी खर्च कम हो, इस दिशा में विभाग लगातार काम कर रहा है।
हीमोफीलिया के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण दवाएं EDL में शामिल
संशोधित सूची में हीमोफीलिया-ए और वॉन विलेब्रांड रोग के उपचार के लिए आवश्यक विशेष दवाओं को शामिल किया गया है। हीमोफीलिया-ए के मरीजों के लिए ह्यूमन कोएगुलेशन फैक्टर VIII की 250 और 500 IU वाली प्रीपेराशन को सूची में जगह दी गई है।
इसी तरह वॉन विलेब्रांड रोग के उपचार के लिए फैक्टर VIII के साथ वॉन विलेब्रांड फैक्टर की न्यूनतम 250 और 500 IU वाली प्रीपेराशन को शामिल किया गया है। इससे रक्तस्राव संबंधी गंभीर विकारों से जूझ रहे मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
डायलिसिस से जुड़ी 16 तरह की सामग्री अब सूची में
क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए भी संशोधित EDL में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डायलिसिस सेवाओं को मजबूत करने के लिए 16 प्रकार के मेडिकल डिवाइसेस और कंज्यूमेबल्स को सूची में शामिल किया गया है।
इनमें डायलाइजर, एचडी ब्लड लाइन, फिस्टुला नीडल, प्लाज्मा फिल्टर समेत डायलिसिस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। इससे डायलिसिस सेवाओं के लिए जरूरी सामग्रियों की उपलब्धता को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी दो अहम सुविधाओं पर जोर
महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी संशोधित सूची में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। सर्वाइकल कैंसर की समय पर जांच के लिए PAP Smear Kit को EDL में शामिल किया गया है। इसके अलावा सुरक्षित गर्भसमापन के लिए इस्तेमाल होने वाली Karman Cannula को भी सूची में जगह दी गई है।
इन चिकित्सा सामग्रियों को मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों की OPD तथा IPD सेवाओं में उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे महिलाओं को जांच और संबंधित चिकित्सा सेवाओं के लिए जरूरी सामग्री सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
हार्ट अटैक के इलाज में टेनेक्टेप्लेस की उपलब्धता बढ़ेगी
हृदय रोगियों के लिए भी संशोधित EDL में अहम बदलाव किया गया है। दिल का दौरा जैसे आपातकालीन मामलों में इस्तेमाल होने वाले Tenecteplase Injection की उपलब्धता अब केवल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी।
इसे जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी CHC और अधिसूचित ट्रॉमा सेंटरों की IPD सेवाओं में भी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे आपात स्थिति में संबंधित उपचार की सुविधा को अधिक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की दिशा में मदद मिलेगी।
अस्थमा और COPD के इलाज में दवा बदली
अस्थमा और Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD) के मरीजों के लिए नेबुलाइजेशन में इस्तेमाल होने वाली दवा में भी संशोधन किया गया है। पहले सूचीबद्ध दवा के स्थान पर अब Ipratropium Bromide + Levo-Salbutamol Respules को शामिल किया गया है।
इस बदलाव के जरिए श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक दवा की उपलब्धता को संशोधित सूची के अनुरूप किया गया है।
रैबीज से बचाव के लिए दो विकल्प स्पष्ट
कुत्ते या अन्य संक्रमित जानवर के काटने के बाद रैबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले Rabies Immunoglobulin की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भी सूची में स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
संशोधित EDL में Equine Rabies Immunoglobulin (ERIG) और Rabies Monoclonal Antibody (RmAb) को अनुमोदित विकल्पों के रूप में शामिल किया गया है। इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रैबीज से बचाव के लिए आवश्यक चिकित्सा विकल्पों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
IGIC के लिए अलग से 76 चिकित्सा संसाधन शामिल
पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) के लिए संस्थान-विशिष्ट सूची भी तैयार की गई है। इसमें कार्डियोलॉजी से संबंधित 27 प्रकार की औषधियां, 47 प्रकार के मेडिकल डिवाइसेस और 2 प्रकार के रीजेंट्स शामिल किए गए हैं।
इसका उद्देश्य संस्थान में हृदय रोगियों को उनकी जरूरत के अनुरूप उच्चस्तरीय उपचार के लिए आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को मजबूत करना है।
एनीमिया के उपचार में भी जरूरी सामग्री शामिल
एनीमिया के उपचार में इस्तेमाल होने वाले आयरन सुक्रोज आदि के लिए 100 मिलीलीटर नॉर्मल सलाइन पैक को भी संशोधित सूची में शामिल किया गया है। इससे संबंधित उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति और BMSICL मिलकर सुनिश्चित करेंगे सप्लाई
संशोधित EDL में शामिल दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों को अस्पतालों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार की ओर से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नई सूची के अनुसार दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इसके लिए समिति BMSICL के साथ समन्वय कर रही है। नई औषधियों और चिकित्सा सामग्रियों की खरीद के लिए निविदा समेत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इसके बाद BMSICL के माध्यम से दवाओं, मेडिकल डिवाइसेस और अन्य चिकित्सा सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का जोर केवल EDL में नई दवाओं और उपकरणों को शामिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में उनकी निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी है।
नई व्यवस्था के लागू होने से गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई आवश्यक दवाएं और मेडिकल उपकरण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध कराने का रास्ता मजबूत होगा।
इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने और इलाज के लिए निजी स्तर पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।