बिहार में पढ़ाई को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में गुरु रविदास जयंती के मौके पर कहा कि राज्य में 400 से ज्यादा नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। सरकार का कहना है कि इसका फायदा खासकर उन छात्रों को मिलेगा, जिन्हें कॉलेज की पढ़ाई के लिए अपने जिले या शहर से बाहर जाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ कॉलेज खोलना ही काफी नहीं है। वहां शिक्षक और पढ़ाई की दूसरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 10 अगस्त तक डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।
गांव के पास मिले कॉलेज की पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के छात्रों को अच्छी पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े, इसके लिए हर इलाके में उच्च शिक्षा की सुविधा बढ़ाई जाएगी। उन्होंने मठ-मंदिरों से भी अपील की कि वे एक-एक स्कूल या कॉलेज को गोद लेकर पढ़ाई में मदद करें।
उनका कहना था कि अगर समाज के लोग भी सरकार के साथ मिलकर काम करें तो शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव लाया जा सकता है।
कॉलेजों में शिक्षकों की कमी होगी दूर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस कमी को दूर करने के लिए लगातार नियुक्तियां कर रही है। टीआर-4 के तहत करीब 32 हजार शिक्षकों की भर्ती की जा रही है।
सरकार की कोशिश है कि कॉलेजों में छात्रों को समय पर शिक्षक मिलें और पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी व्यवस्था बेहतर की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों की मदद के लिए 15 अगस्त से रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू करने की योजना है। इससे छात्र घर बैठे अपनी पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे।
सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे मंत्री-विधायकों के बच्चे?
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ से दो साल में ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश होगी कि मंत्री, विधायक और बड़े अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, जब बड़े और सक्षम परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे, तो स्कूलों की व्यवस्था सुधारने पर ज्यादा ध्यान जाएगा। इससे आम लोगों का भरोसा भी सरकारी स्कूलों पर बढ़ेगा।
दिनकर के नाम पर बेगूसराय में विश्वविद्यालय
बिहार में उच्च शिक्षा को लेकर कई दूसरी योजनाओं की भी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर बेगूसराय में साहित्य के क्षेत्र में विश्वविद्यालय बनाने की योजना है।
इसका मकसद साहित्य और भाषा की पढ़ाई को बढ़ावा देना है। बिहार के प्रसिद्ध कवि दिनकर का नाम राज्य की शिक्षा और साहित्य से जोड़ने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
भागलपुर में फिर से शुरू होगा विक्रमशिला विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने भागलपुर के प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को फिर से शुरू करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि इसके लिए करीब 220 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय बिहार के पुराने शिक्षा केंद्रों में से एक रहा है। सरकार की योजना इसे दोबारा शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की है।
एआई और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पर भी जोर
आज के समय में तकनीकी शिक्षा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए भागलपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर एआई और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इस विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर साइंस से जुड़े विषयों की पढ़ाई पर जोर रहेगा। सरकार का कहना है कि बिहार के युवाओं को नए जमाने की पढ़ाई और तकनीक से जोड़ना जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था को बदलने की कोशिश
गुरु रविदास जयंती के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। सरकार का फोकस अब सिर्फ स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि वहां पढ़ाई का माहौल बेहतर करने पर भी है।
400 से ज्यादा नए डिग्री कॉलेज खोलने, शिक्षकों की कमी दूर करने और नए विश्वविद्यालय शुरू करने की योजनाओं से बिहार में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अब इन घोषणाओं को जमीन पर कब तक उतारा जाता है, इस पर छात्रों और अभिभावकों की नजर रहेगी।