पटना। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत एनडीए के नेताओं और विधान परिषद के सदस्यों के प्रति आभार जताया है।
अपने पत्र में सिंह ने कहा कि उन्हें चार बार बिहार विधान परिषद का सभापति बनने का अवसर मिला और जिम्मेदारी के निर्वहन में उन्हें सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग मिला।
अवधेश नारायण सिंह का यह कार्यकाल करीब दो साल से अधिक समय तक चला। बिहार विधान परिषद की आधिकारिक सूची के मुताबिक वे 23 जुलाई 2024 को नियमित रूप से सभापति निर्वाचित हुए थे। इससे पहले जून-जुलाई 2024 में उन्होंने कार्यकारी सभापति के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी।
23 जुलाई 2024 को वे निर्विरोध सभापति चुने गए थे और उनके निर्वाचन के समर्थन में सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी सदस्यों की भी भूमिका रही थी।
सदन चलाने में सर्वदलीय सहमति पर जोर
सभापति के तौर पर अवधेश नारायण सिंह की कार्यशैली में सर्वदलीय बैठकों और सदन की शांतिपूर्ण कार्यवाही पर जोर लगातार दिखाई दिया। 2024 में सभापति चुने जाने से पहले ही उन्होंने सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर सदन की गरिमा बनाए रखने और नियमों एवं संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार कार्यवाही चलाने की बात कही थी।
2025 के मानसून सत्र से पहले भी उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुलाई और सदन के सुचारु एवं शांतिपूर्ण संचालन के लिए सभी दलों से सहयोग मांगा। वहीं, 2025 के शीतकालीन सत्र से पहले भी सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से चलाने की तैयारी की गई।
विधान परिषद को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर
उनके कार्यकाल के दौरान बिहार विधान परिषद की डिजिटल मौजूदगी को भी विस्तार मिला। 29 अक्टूबर 2024 को सभापति अवधेश नारायण सिंह ने विधान परिषद की नई डायनामिक वेबसाइट का उद्घाटन किया।
परिषद के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्यसूची, प्रश्न, विधायी कार्य, समितियों, सदस्यों, डिजिटल लाइब्रेरी और वाद-विवाद जैसी सूचनाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) की शुरुआत बिहार विधान परिषद में उनके मौजूदा 2024-26 के कार्यकाल से पहले हो चुकी थी। हालांकि उनके सभापति रहते परिषद की डिजिटल व्यवस्था और ऑनलाइन सूचना प्रणाली को आगे बढ़ाने का काम जारी रहा।
परिषद के आधिकारिक पोर्टल पर NeVA आधारित कार्यवाही और डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं।
छोटे सत्र में भी बड़ी संख्या में सवाल और विधायी काम
नवंबर 2024 के शीतकालीन सत्र के समापन पर सभापति ने बताया था कि पांच बैठकों वाले सत्र में पांच विधेयक पारित हुए। सदन में 331 तारांकित और 88 अल्पसूचित प्रश्न पूछे गए, जबकि 300 तारांकित प्रश्नों के उत्तर दिए गए।
इसके अलावा ध्यानाकर्षण और शून्यकाल के माध्यम से सदस्यों ने विभिन्न जनहित के मुद्दे उठाए। सभापति ने सत्र के शांतिपूर्ण संचालन के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सहयोग की सराहना की थी।
2026 के मानसून सत्र तक भी सदन की डिजिटल व्यवस्था में प्रश्न, कार्यसूची और विधायी काम ऑनलाइन उपलब्ध रहे। परिषद के आधिकारिक पोर्टल पर 213वें सत्र से संबंधित कार्य और प्रश्न भी दर्ज हैं।
महिला सशक्तीकरण और सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे
अवधेश नारायण सिंह ने सभापति रहते महिला सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर भी सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। फरवरी 2026 में उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि सक्षम नेतृत्वकर्ता हैं और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी सामाजिक बदलाव का माध्यम है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों पर जोर दिया।
दिसंबर 2025 में उन्होंने बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण की रोकथाम से संबंधित संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के लिए संदेश भी दिया। इसमें बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तीकरण को महत्वपूर्ण बताते हुए बिहार विधान परिषद की ओर से ऐसे प्रयासों के समर्थन की बात कही गई।
31 साल से अधिक लंबी संसदीय यात्रा
अवधेश नारायण सिंह का संसदीय सफर केवल सभापति पद तक सीमित नहीं रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वे 1993 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।
वे 2008 से 2010 तक बिहार सरकार में श्रम संसाधन मंत्री भी रहे। इसके अलावा वे 2012 से 2017 तक विधान परिषद के सभापति रहे और 2020 से 2022 के बीच कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी भी निभाई।
उनकी लंबी संसदीय पारी में सभापति पद की जिम्मेदारी उन्हें कई बार मिली। बिहार विधान परिषद की आधिकारिक पूर्व सभापति सूची में 2012-17, 2020-22, जून-जुलाई 2024 और जुलाई 2024 से आगे की उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां दर्ज हैं।
इस्तीफे के साथ भावुक संदेश
28 सितंबर के त्यागपत्र में अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि पिछले 33 वर्षों से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और आगे भी सदस्य के रूप में सदन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
उन्होंने सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों को जारी रखने की बात कही है। उन्होंने विधान परिषद के सदस्यों, सचिवालय के पदाधिकारियों-कर्मचारियों और मीडिया के सहयोग के लिए भी आभार जताया।
इस तरह अवधेश नारायण सिंह का सभापति के रूप में मौजूदा कार्यकाल अब इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया है। उनके कार्यकाल की प्रमुख तस्वीरों में सर्वदलीय समन्वय,
सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित करने का प्रयास, विधान परिषद की डिजिटल व्यवस्था को आगे बढ़ाना और जनहित से जुड़े विषयों पर सदस्यों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना शामिल रहा।