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Home - राजनीति - अब्राहम लिंकन का ऐतिहासिक चुनाव 1860: 6 नवंबर की जीत से दासप्रथा के अंत तक

अब्राहम लिंकन का ऐतिहासिक चुनाव 1860: 6 नवंबर की जीत से दासप्रथा के अंत तक

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 6, 2026 2:07 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 33 मिनट पहले
अब्राहम लिंकन
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इतिहास | 6 नवंबर | अमेरिका | राष्ट्रपति चुनाव

6 नवंबर 1860 को अब्राहम लिंकन संयुक्त राज्य अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति चुने गए। चार उम्मीदवारों के बीच हुए इस चुनाव में उन्होंने 180 इलेक्टोरल वोट हासिल किए। उनकी जीत ने अमेरिकी राजनीति को निर्णायक मोड़ दिया और दासप्रथा के विस्तार को लेकर उत्तर और दक्षिण के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया। कुछ ही सप्ताह बाद दक्षिण कैरोलाइना ने संघ से अलग होने की घोषणा कर दी और देश गृहयुद्ध की ओर बढ़ने लगा।

अमेरिका के इतिहास में 6 नवंबर 1860 का राष्ट्रपति चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था। यह उस गहरे राष्ट्रीय संकट के बीच हुआ चुनाव था जिसमें देश का भविष्य, संघीय एकता, राज्यों के अधिकार और दासप्रथा का प्रश्न एक-दूसरे से टकरा रहे थे। अब्राहम लिंकन की जीत ने रिपब्लिकन पार्टी को पहली बार व्हाइट हाउस तक पहुंचाया। चुनाव के परिणाम ने दक्षिण के दासप्रथा-समर्थक राजनीतिक नेतृत्व में आशंका पैदा की कि संघीय सरकार अब दासप्रथा के विस्तार को रोकने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

चार उम्मीदवारों के बीच ऐतिहासिक मुकाबला

1860 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव चार प्रमुख उम्मीदवारों के बीच लड़ा गया। रिपब्लिकन पार्टी ने इलिनॉय के अब्राहम लिंकन को उम्मीदवार बनाया। डेमोक्रेटिक पार्टी दासप्रथा और संघीय नीति के सवाल पर विभाजित हो गई थी। उत्तरी डेमोक्रेटिक धड़े ने स्टीफन ए. डगलस को उम्मीदवार बनाया, जबकि दक्षिणी डेमोक्रेट्स ने जॉन सी. ब्रेकिनरिज को मैदान में उतारा। इसके अलावा संवैधानिक संघ पार्टी (Constitutional Union Party) ने जॉन बेल को उम्मीदवार बनाया।

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इस विभाजन ने चुनाव को असाधारण बना दिया। डगलस लोकप्रिय डेमोक्रेटिक नेता थे, ब्रेकिनरिज को दक्षिण के दासप्रथा-समर्थक मतदाताओं का समर्थन प्राप्त था और बेल ने उन मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की जो संघ को बनाए रखने और तत्काल विवादों से बचने की नीति चाहते थे। लिंकन की रिपब्लिकन पार्टी का मुख्य चुनावी रुख दासप्रथा को उन अमेरिकी क्षेत्रों में फैलने से रोकना था जहां वह पहले से वैध नहीं थी।

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लिंकन की जीत: इलेक्टोरल कॉलेज में स्पष्ट बहुमत

मतदान 6 नवंबर 1860 को हुआ। अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives) के चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, लिंकन ने 180 इलेक्टोरल वोट प्राप्त किए, जबकि कुल 303 इलेक्टोरल वोटों में जीत के लिए 152 की आवश्यकता थी। स्टीफन डगलस को 12, जॉन सी. ब्रेकिनरिज को 72 और जॉन बेल को 39 इलेक्टोरल वोट मिले। लिंकन ने आवश्यक बहुमत से काफी अधिक वोट हासिल कर राष्ट्रपति पद की दौड़ जीत ली।

लोकप्रिय मतों में लिंकन को लगभग 39.8 प्रतिशत समर्थन मिला। यानी उन्हें कुल मतदाताओं के आधे से कम वोट मिले, फिर भी इलेक्टोरल कॉलेज की व्यवस्था के तहत वे स्पष्ट विजेता बने। Library of Congress के चुनाव-मार्गदर्शक में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, लिंकन को 1,865,908 लोकप्रिय वोट मिले। डगलस को 1,380,202, ब्रेकिनरिज को 848,019 और बेल को 590,901 वोट मिले।

लिंकन ने स्वतंत्र राज्यों में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन दासप्रथा वाले राज्यों में उन्हें समर्थन नहीं मिला। उनका नाम कई दक्षिणी राज्यों के मतपत्रों पर प्रभावी रूप से मौजूद भी नहीं था। इस भौगोलिक विभाजन ने परिणाम को केवल राजनीतिक जीत नहीं रहने दिया; इसने उत्तर और दक्षिण के बीच बढ़ती दूरी को उजागर किया।

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दासप्रथा पर लिंकन का रुख क्या था?

लिंकन को अक्सर दासप्रथा उन्मूलन से जोड़ा जाता है, लेकिन 1860 के चुनाव के समय उनके रुख को ऐतिहासिक संदर्भ में समझना आवश्यक है। उस समय उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य दासप्रथा को उन क्षेत्रों में फैलने से रोकना था जहां वह मौजूद नहीं थी। वे तत्काल उन राज्यों में दासप्रथा समाप्त करने का वादा नहीं कर रहे थे जहां यह पहले से कानूनी रूप से कायम थी। रिपब्लिकन पार्टी का 1860 का मंच भी नए क्षेत्रों में दासप्रथा के विस्तार का विरोध करता था।

लिंकन का मानना था कि दासप्रथा का विस्तार रोकना अमेरिकी गणराज्य के भविष्य के लिए आवश्यक है। दक्षिण के कई नेताओं ने उनकी जीत को अपने सामाजिक और आर्थिक ढांचे के लिए खतरे के रूप में देखा। दासप्रथा दक्षिणी अर्थव्यवस्था और सत्ता-संरचना का महत्वपूर्ण आधार थी। इसीलिए लिंकन के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अलगाववादी आंदोलन तेज हो गया।

चुनाव के बाद अलगाव और गृहयुद्ध की ओर बढ़ता अमेरिका

लिंकन की जीत के बाद दक्षिण कैरोलाइना ने 20 दिसंबर 1860 को संघ से अलग होने का निर्णय लिया। इसके बाद मिसिसिपी, फ्लोरिडा, अलबामा, जॉर्जिया, लुइजियाना, टेक्सास और अन्य दक्षिणी राज्यों ने भी अलगाव का रास्ता अपनाया। फरवरी 1861 में इन राज्यों ने Confederate States of America नाम से अलग परिसंघ बनाया और जेफरसन डेविस को उसका राष्ट्रपति चुना।

लिंकन ने 4 मार्च 1861 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उन्होंने अपने पहले उद्घाटन भाषण में संघ की एकता बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि वे उन राज्यों में दासप्रथा में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं रखते जहां वह पहले से मौजूद थी, लेकिन संघ से अलग होने के अधिकार को स्वीकार नहीं करेंगे। अप्रैल 1861 में दक्षिण कैरोलाइना के चार्ल्सटन बंदरगाह स्थित फोर्ट सम्टर पर कॉन्फेडरेट बलों के हमले के बाद गृहयुद्ध शुरू हो गया।

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मुक्ति उद्घोषणा और दासप्रथा के अंत की प्रक्रिया

लिंकन के राष्ट्रपति बनने के समय दासप्रथा समाप्त नहीं हुई थी। गृहयुद्ध के दौरान उनकी नीति और युद्ध के उद्देश्य में बदलाव आया। 22 सितंबर 1862 को उन्होंने प्रारंभिक मुक्ति उद्घोषणा जारी की और 1 जनवरी 1863 को अंतिम Emancipation Proclamation प्रभावी की। इस उद्घोषणा ने उन क्षेत्रों में दास बनाए गए लोगों को स्वतंत्र घोषित किया जो उस समय अमेरिका के विरुद्ध विद्रोह में थे। हालांकि यह आदेश उन सभी क्षेत्रों पर लागू नहीं हुआ जहां दासप्रथा मौजूद थी; संघ के प्रति निष्ठावान सीमावर्ती राज्यों और कुछ अपवाद क्षेत्रों में दासप्रथा बनी रही।

इसलिए मुक्ति उद्घोषणा को अमेरिका में दासप्रथा के तत्काल और पूर्ण संवैधानिक अंत के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। दासप्रथा को पूरे देश में समाप्त करने के लिए अमेरिकी संविधान में 13वां संशोधन आवश्यक था। कांग्रेस ने 31 जनवरी 1865 को संशोधन का प्रस्ताव पारित किया और राज्यों की आवश्यक संख्या से अनुमोदन मिलने के बाद 6 दिसंबर 1865 को इसे संविधान का हिस्सा बनाया गया। इस संशोधन ने अमेरिका में दासप्रथा और अनैच्छिक दासता को समाप्त किया, अपराध के लिए दंड के रूप में लागू अपवाद को छोड़कर।

लिंकन ने 13वें संशोधन को पारित कराने के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि अप्रैल 1865 में उनकी हत्या कर दी गई, लेकिन उनके कार्यकाल में शुरू हुई संवैधानिक प्रक्रिया उनके निधन के बाद पूरी हुई।

लिंकन का राष्ट्रपति कार्यकाल और ऐतिहासिक विरासत

अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 को केंटकी में हुआ था। सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने स्वाध्याय से कानून की पढ़ाई की और वकालत तथा राजनीति में पहचान बनाई। वे इलिनॉय से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य रहे और 1858 में स्टीफन डगलस के साथ हुई बहसों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए। 1860 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्हें देश की एकता बचाने और दासप्रथा के प्रश्न का सामना करने की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक मिली।

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गृहयुद्ध के दौरान लिंकन ने संघीय सरकार का नेतृत्व किया। 1863 में गेटिसबर्ग संबोधन ने लोकतंत्र और जन-शासन के आदर्शों को नई भाषा दी। 1864 में वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गए। 14 अप्रैल 1865 को वॉशिंगटन के फोर्ड्स थिएटर में उन पर हमला हुआ और अगले दिन 15 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।

लिंकन की विरासत को समझने के लिए उनकी चुनावी जीत, युद्धकालीन नेतृत्व, मुक्ति उद्घोषणा और 13वें संशोधन की प्रक्रिया को एक साथ देखना आवश्यक है। 6 नवंबर 1860 का चुनाव उस ऐतिहासिक क्रम की शुरुआत था जिसने अमेरिकी संघ की संरचना, नागरिक स्वतंत्रता और दासप्रथा के भविष्य को बदल दिया। इसीलिए यह चुनाव अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।

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