कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति पेश करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उद्योग जगत को सरकार की कार्यशैली को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले चल रहे हैं, अथवा जिन पर सरकारी बैंकों से धोखाधड़ी और धन के गबन के आरोप हैं, उनके साथ मुख्यमंत्री के रूप में वह कामकाजी संबंध नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत शिष्टाचार और सरकारी कामकाज के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि आमने-सामने मुलाकात होने पर वह नमस्कार या अभिवादन करेंगे, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कार्य संबंध नहीं रखेंगे।
गुरुवार को नई उद्योग नीति की घोषणा के अवसर पर उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़े कारोबारी मौजूद थे। इसी मंच से मुख्यमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने किसी व्यक्ति या औद्योगिक समूह का नाम नहीं लिया। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इस नीति को प्रशासनिक स्तर पर किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जाएगा। इसलिए उनका बयान फिलहाल सरकार के घोषित राजनीतिक और प्रशासनिक रुख के रूप में सामने आया है।
व्यक्तिगत शिष्टाचार और सरकारी संबंध अलग रखने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति से सार्वजनिक स्थान पर मुलाकात होने पर सामान्य अभिवादन किया जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए ऐसे लोगों के साथ कामकाजी रिश्ता रखना संभव नहीं होगा जिनके खिलाफ ईडी-सीबीआई के मामले हैं या बैंक धोखाधड़ी और धन गबन के आरोप हैं। इस टिप्पणी में उन्होंने व्यक्तिगत व्यवहार और सरकारी जिम्मेदारी के बीच स्पष्ट विभाजन रखने की बात कही।
हालांकि, जांच एजेंसियों के मामले और आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं होते। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में ऐसे मामलों से जुड़े लोगों के साथ आधिकारिक संबंध न रखने की बात कही है, लेकिन इस नीति के दायरे, कानूनी आधार और निर्णय की प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया। उद्योग जगत के लिए इसका व्यावहारिक असर आगे सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।

निवेश के साथ रोजगार सृजन पर सरकार का जोर
नई औद्योगिक नीति में राज्य में निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। पात्र औद्योगिक इकाइयों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में नियोक्ता के योगदान पर सहायता देने, महिला कर्मचारियों की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने और पिछड़े क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि राज्य में उद्योग स्थापित करने और कारोबार संचालित करने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी। नई नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन और प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को राज्य में परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना बताया गया है।
वसूली की शिकायत पर 15 मिनट में गिरफ्तारी का दावा
मुख्यमंत्री ने उद्योग और कारोबार से जुड़े लोगों के सामने कथित वसूली की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी उद्योगपति या कारोबारी से रंगदारी मांगी जाती है तो शिकायत मिलने के 15 मिनट के भीतर गिरफ्तारी की जाएगी। यह मुख्यमंत्री का दावा है। उन्होंने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि कारोबार चलाने में बाधा डालने और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
उनके मुताबिक, निवेशकों को केवल सरकारी रियायत देना पर्याप्त नहीं है। कारखाने चलाने, कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बाजार तक पहुंचाने के लिए भी निर्बाध माहौल जरूरी है। औद्योगिक गतिविधियों में परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था की भूमिका को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अवैध वसूली को रोकने पर जोर दिया।

टोल प्लाजा की निगरानी का भी उल्लेख
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि डानकुनी और दुर्गापुर के टोल प्लाजा पर अवैध वसूली बंद करा दी गई है। उन्होंने बताया कि सॉल्टलेक स्थित नियंत्रण कक्ष से राज्य के विभिन्न टोल प्लाजा की निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार मालवाहक वाहनों की आवाजाही में बाधा या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माल परिवहन की लागत और समय औद्योगिक कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। टोल प्लाजा पर कथित अवैध वसूली रोकने की व्यवस्था को सरकार उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, निगरानी व्यवस्था के संचालन, शिकायत निवारण और कार्रवाई के आंकड़ों का विस्तृत विवरण इस अवसर पर नहीं दिया गया।
उद्योग जगत के लिए दोहरा संदेश
नई नीति की घोषणा के मंच से मुख्यमंत्री ने निवेशकों को एक ओर सुरक्षा और सुविधाओं का भरोसा दिया, वहीं दूसरी ओर ईडी-सीबीआई मामलों तथा बैंक धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े लोगों के साथ सरकारी स्तर पर कामकाजी संबंध नहीं रखने की बात कही। अब इस रुख का वास्तविक स्वरूप नीति के क्रियान्वयन, प्रशासनिक निर्देशों और निवेशकों के साथ सरकार के व्यवहार में दिखाई देगा। फिलहाल मुख्यमंत्री का बयान राज्य में पारदर्शी कारोबार और कथित अवैध वसूली के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संदेश के तौर पर सामने आया है।
