विशेष लेख | 8 नवम्बर | विश्व राजनीति और इतिहास
8 नवम्बर 2016 को हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव ने दुनिया की राजनीति को चौंका दिया। रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड जे. ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को इलेक्टोरल कॉलेज में पराजित कर अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बनने का रास्ता बनाया। चुनाव का परिणाम इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि ट्रम्प इलेक्टोरल वोटों में जीते, जबकि लोकप्रिय मतों में क्लिंटन को उनसे अधिक वोट मिले।
अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव केवल एक देश की सत्ता बदलने की प्रक्रिया नहीं होता। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका की विदेश नीति, व्यापार, सुरक्षा, जलवायु और वैश्विक संस्थाओं के प्रति दृष्टिकोण पर राष्ट्रपति का प्रभाव पड़ता है। इसलिए 2016 का चुनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरी दिलचस्पी का विषय बना। डोनाल्ड ट्रम्प की जीत ने स्थापित राजनीतिक समीकरणों, चुनावी रणनीतियों और अमेरिकी समाज के भीतर मौजूद मतभेदों पर व्यापक बहस छेड़ दी।
8 नवम्बर 2016: मतदान का दिन
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 8 नवम्बर 2016 को आयोजित हुआ। यह 58वां चतुर्वार्षिक राष्ट्रपति चुनाव था। उस समय डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन थीं, जो पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व प्रथम महिला रह चुकी थीं। रिपब्लिकन पार्टी ने कारोबारी और टेलीविजन व्यक्तित्व डोनाल्ड ट्रम्प को उम्मीदवार बनाया था। उनके साथ इंडियाना के तत्कालीन गवर्नर माइक पेंस उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। क्लिंटन के साथ टिम केन उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे।

मतदान के दिन अमेरिकी नागरिकों ने अपने-अपने राज्यों में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के टिकट के पक्ष में वोट डाले। अमेरिकी व्यवस्था में मतदाता सीधे राष्ट्रपति का चुनाव नहीं करते, बल्कि प्रत्येक राज्य में इलेक्टर्स के चयन के लिए मतदान करते हैं। ये इलेक्टर्स बाद में इलेक्टोरल कॉलेज में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए औपचारिक मतदान करते हैं। कुल 538 इलेक्टोरल वोटों में जीत के लिए कम से कम 270 वोट जरूरी होते हैं।
ट्रम्प का चुनाव अभियान और राजनीतिक संदेश
डोनाल्ड ट्रम्प का चुनाव अभियान अमेरिकी राजनीति की स्थापित शैली से अलग था। वह लंबे समय से कारोबारी और टीवी व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते थे, लेकिन उनके पास पहले कोई निर्वाचित सरकारी पद का अनुभव नहीं था। रिपब्लिकन पार्टी के प्राइमरी चुनावों में कई अनुभवी नेताओं को पीछे छोड़कर उन्होंने पार्टी का नामांकन हासिल किया। उनका प्रमुख नारा ‘Make America Great Again’ था।
ट्रम्प ने अपने अभियान में रोजगार, विनिर्माण, व्यापार समझौतों, आव्रजन नियंत्रण, सीमा सुरक्षा और वॉशिंगटन की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने वैश्वीकरण और कुछ अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों की आलोचना करते हुए अमेरिकी उद्योगों और कामगारों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही। उनके भाषणों की शैली सीधे, टकरावपूर्ण और कई बार विवादास्पद रही। इससे उन्हें व्यापक मीडिया कवरेज मिला और समर्थकों के बीच एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनी।
हिलेरी क्लिंटन ने अपने अभियान में अनुभव, संस्थागत निरंतरता और सामाजिक नीतियों पर जोर दिया। वह अमेरिका की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में गिनी जाती थीं और राष्ट्रपति पद के लिए किसी बड़ी पार्टी की पहली महिला उम्मीदवार बनीं। उनके अभियान को कई राज्यों में मजबूत समर्थन मिला, लेकिन चुनावी नक्शे में कुछ निर्णायक राज्यों के परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए।

स्विंग स्टेट्स ने बदला चुनावी समीकरण
अमेरिकी चुनाव में सभी राज्यों का राजनीतिक महत्व समान नहीं दिखाई देता, क्योंकि कई राज्य लंबे समय से किसी एक पार्टी की ओर झुकाव रखते हैं। इसके विपरीत कुछ राज्यों में मुकाबला बेहद करीबी होता है और इन्हें ‘स्विंग स्टेट्स’ कहा जाता है। 2016 में मिशिगन, विस्कॉन्सिन और पेनसिल्वेनिया जैसे औद्योगिक मध्य-पश्चिमी राज्यों के नतीजे निर्णायक साबित हुए। इन राज्यों में ट्रम्प की जीत ने उन्हें इलेक्टोरल कॉलेज में आवश्यक बहुमत के करीब पहुंचाया।
चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों में क्लिंटन को बढ़त दिखाई गई थी, हालांकि कुछ सर्वेक्षणों और चुनावी विश्लेषणों ने करीबी मुकाबले की संभावना भी जताई थी। चुनाव परिणाम ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय मतों का अनुमान और राज्यवार इलेक्टोरल कॉलेज परिणाम अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर पेश कर सकते हैं।
इलेक्टोरल कॉलेज में जीत, लोकप्रिय मतों में हार
चुनाव की सबसे उल्लेखनीय विशेषता लोकप्रिय मत और इलेक्टोरल कॉलेज के परिणामों के बीच अंतर था। अमेरिकी फेडरल इलेक्शन कमीशन (FEC) के आधिकारिक संकलन के अनुसार, हिलेरी क्लिंटन को 6 करोड़ 58 लाख 53 हजार 514 लोकप्रिय वोट मिले, जो कुल का 48.18 प्रतिशत था। डोनाल्ड ट्रम्प को 6 करोड़ 29 लाख 84 हजार 828 वोट मिले, यानी 46.09 प्रतिशत। इस तरह लोकप्रिय मतों में क्लिंटन लगभग 28.7 लाख वोटों से आगे रहीं।
इसके बावजूद इलेक्टोरल कॉलेज में ट्रम्प को 304 और क्लिंटन को 227 वोट मिले। अन्य उम्मीदवारों के पक्ष में सात इलेक्टोरल वोट गए। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 वोटों की आवश्यकता थी, इसलिए ट्रम्प ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह अंतर अमेरिकी संविधान की चुनाव प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता को सामने लाता है: राष्ट्रपति पद का विजेता राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों के आधार पर नहीं, बल्कि इलेक्टोरल कॉलेज के बहुमत से तय होता है।

चुनाव की रात शुरुआती अनुमानों और राज्यों के नतीजों के बाद 9 नवम्बर की सुबह समाचार एजेंसियों ने ट्रम्प को विजेता घोषित किया। इसलिए 8 नवम्बर मतदान की आधिकारिक तारीख थी, जबकि अंतिम परिणाम की स्पष्टता और जीत की घोषणा अमेरिकी समय के अनुसार अगले दिन सामने आई।
इलेक्टोरल कॉलेज की औपचारिक प्रक्रिया
मतदान के बाद दिसंबर 2016 में राज्यों के इलेक्टर्स ने अपने-अपने राज्यों में बैठक कर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान किया। कुछ इलेक्टर्स ने अपने राज्य के लोकप्रिय मत के परिणाम से अलग वोट दिया। इन्हें ‘फेथलेस इलेक्टर्स’ कहा जाता है। इसी कारण चुनाव की रात अनुमानित 306-232 इलेक्टोरल वोटों का अंतर अंतिम गणना में बदलकर ट्रम्प के 304 और क्लिंटन के 227 रह गया।
6 जनवरी 2017 को अमेरिकी कांग्रेस ने इलेक्टोरल वोटों की गिनती की पुष्टि की। 20 जनवरी 2017 को वॉशिंगटन डी.सी. में कैपिटल के सामने डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। माइक पेंस ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की। इस प्रकार चुनाव के दिन शुरू हुई राजनीतिक प्रक्रिया संवैधानिक हस्तांतरण के साथ पूरी हुई।
अमेरिकी राजनीति और दुनिया पर असर
ट्रम्प की जीत ने अमेरिकी राजनीति में लोकलुभावन संदेश, राजनीतिक प्रतिष्ठान के प्रति असंतोष और डिजिटल माध्यमों की भूमिका पर बहस को तेज किया। उनके अभियान ने यह दिखाया कि पारंपरिक राजनीतिक अनुभव के बिना भी कोई उम्मीदवार पार्टी के भीतर समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति पद तक पहुंच सकता है। साथ ही, चुनाव ने ग्रामीण और शहरी मतदाताओं, औद्योगिक क्षेत्रों, नस्लीय और सामाजिक समूहों तथा शिक्षा के आधार पर मतदान के पैटर्न को लेकर व्यापक अध्ययन को प्रेरित किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस परिणाम को ध्यान से देखा गया। ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों के रक्षा खर्च, चीन के साथ व्यापार, ईरान परमाणु समझौते, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर अपने विचारों के कारण कई देशों में नीति संबंधी चर्चाएं शुरू कराईं। हालांकि चुनाव परिणाम से तत्काल सभी नीतियां नहीं बदल गईं; वास्तविक बदलाव राष्ट्रपति पद संभालने के बाद प्रशासनिक फैसलों, कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के जरिए सामने आए।
भारत सहित अनेक देशों ने नई अमेरिकी सरकार के साथ संबंधों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं का आकलन किया। भारत-अमेरिका संबंधों में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और प्रवासी भारतीय समुदाय जैसे विषय महत्वपूर्ण बने रहे। चुनाव परिणाम के बाद दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की दिशा पर भी नजर रखी गई।
लोकतंत्र, प्रतिनिधित्व और चुनावी बहस
2016 का चुनाव अमेरिकी लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व के प्रश्न को फिर केंद्र में ले आया। क्लिंटन का लोकप्रिय मतों में आगे रहना, लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज में हारना, इस बात पर बहस का कारण बना कि क्या राष्ट्रपति का चुनाव सीधे राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों से होना चाहिए। समर्थकों का तर्क है कि इलेक्टोरल कॉलेज संघीय ढांचे में छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है। आलोचकों का कहना है कि इससे कुछ राज्यों के मतदाताओं का प्रभाव अधिक और कुछ का कम हो सकता है।
इस चुनाव ने मीडिया, सोशल मीडिया, राजनीतिक विज्ञापन, गलत सूचनाओं और चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर भी गंभीर चर्चा को जन्म दिया। अमेरिकी संस्थाओं और जांच एजेंसियों ने चुनाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। इन विवादों को समझते समय आधिकारिक जांच निष्कर्षों, न्यायिक रिकॉर्ड और राजनीतिक दावों के बीच अंतर करना जरूरी है।

इतिहास में 8 नवम्बर 2016 का महत्व
8 नवम्बर 2016 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव केवल डोनाल्ड ट्रम्प की जीत की कहानी नहीं है। यह अमेरिकी चुनाव प्रणाली, लोकप्रिय मत और इलेक्टोरल कॉलेज के बीच अंतर, बदलते मतदाता व्यवहार और वैश्विक राजनीति पर अमेरिकी नेतृत्व के प्रभाव को समझने का महत्वपूर्ण उदाहरण है। ट्रम्प ने 2017 में राष्ट्रपति पद संभाला और 2021 तक अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति रहे।
इस चुनाव ने यह भी याद दिलाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान का दिन, मतों की गिनती, इलेक्टोरल कॉलेज का मतदान और संवैधानिक शपथ—ये सभी अलग-अलग चरण हैं। 8 नवम्बर को पड़े वोटों ने जिस राजनीतिक परिवर्तन की शुरुआत की, उसका औपचारिक समापन जनवरी 2017 में सत्ता हस्तांतरण के साथ हुआ। इसी कारण 2016 का चुनाव आधुनिक अमेरिकी और वैश्विक राजनीतिक इतिहास की एक निर्णायक घटना के रूप में दर्ज है।
