नई दिल्ली, 6 नवंबर। ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर कर्नाटक में उठे सवालों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल)—ने अपनी आपूर्ति का बचाव किया है। कंपनियों का दावा है कि देशभर में उनके द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा ई20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक आईएस 17021 के अनुरूप है। इस दावे में कर्नाटक में आपूर्ति किया जा रहा पेट्रोल भी शामिल है।
विवाद उस समय सामने आया जब कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल में 26 से 31 प्रतिशत तक इथेनॉल होने की बात कही गई। तीनों तेल कंपनियों ने इन निष्कर्षों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि नमूने लेने और उनकी जांच की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी तथा तकनीकी नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
893 नमूनों की जांच का हवाला
तेल कंपनियों के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कुल 893 पेट्रोल नमूनों की जांच कराई गई। इस जांच में कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल थे। कंपनियों का कहना है कि सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। इसी आधार पर उन्होंने देशभर में आपूर्ति किए जा रहे ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भरोसा जताया है।
कंपनियों ने कर्नाटक में अक्टूबर 2026 के दौरान हुई जांच की प्रक्रिया पर विशेष रूप से सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल के नमूने लेने, उन्हें सीलबंद रखने, प्रयोगशाला तक पहुंचाने और जांच रिपोर्ट संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के लिए पहले से स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष को स्वीकार करने से पहले यह देखना जरूरी है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

नमूने लेने के लिए तय प्रक्रिया का दिया हवाला
आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण और अनियमितताओं की रोकथाम) आदेश, 2005 तथा विपणन अनुशासन दिशानिर्देश, 2024 का उल्लेख किया है। कंपनियों के मुताबिक, इन प्रावधानों में पेट्रोल के नमूने लेने और उनकी जांच कराने की विस्तृत प्रक्रिया तय है।
इस प्रक्रिया के तहत किसी पेट्रोल पंप से छह नमूने लिए जाने चाहिए। इनमें से दो नमूने पेट्रोल पंप संचालक को प्राप्ति की पुष्टि के साथ दिए जाते हैं। दो नमूने तेल कंपनी अथवा संबंधित विभाग के पास सुरक्षित रखे जाते हैं, जबकि बाकी दो नमूने जांच के लिए निर्धारित प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। कंपनियों का कहना है कि प्रयोगशाला का संबंधित आदेश की अनुसूची-तीन में निर्दिष्ट या सरकारी राजपत्र में अधिसूचित होना भी जरूरी है।
नमूनों के लेबल पर संबंधित पक्षों के संयुक्त हस्ताक्षर और तय समयसीमा में जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना भी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। कंपनियों के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य नमूने की पहचान, उसकी सुरक्षा और जांच के नतीजों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
अक्टूबर की जांच में प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी का आरोप
तेल कंपनियों ने बताया कि सितंबर 2026 में लिए गए नमूनों को राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से निर्धारित तेल कंपनी की प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। वहां विपणन अनुशासन दिशानिर्देश, 2024 के तहत आवश्यक गुणवत्ता मानकों की जांच की गई। हालांकि, कंपनियों का आरोप है कि अक्टूबर में हुई अगली जांच के दौरान उनके प्रतिनिधियों की भागीदारी के बिना नमूने एकत्र किए गए।

कंपनियों के मुताबिक, उन्होंने राज्य स्तरीय समन्वयक के जरिए संबंधित नमूनों की सुरक्षित प्रतियां, पेट्रोल पंपवार पूरा विवरण और प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट मांगी थी। उनका कहना है कि ये दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसे में उनके लिए नमूनों की पहचान और जांच के निष्कर्षों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना संभव नहीं हो पाया।
तीसरी पक्ष की प्रयोगशाला के प्रमाणपत्रों पर आपत्ति
तीनों कंपनियों ने कर्नाटक में इथेनॉल की मात्रा को लेकर सामने आए निष्कर्षों के आधार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये निष्कर्ष निर्धारित प्रयोगशाला के बजाय तीसरी पक्ष की प्रयोगशाला से जारी प्रमाणपत्रों पर आधारित बताए गए हैं। कंपनियों के अनुसार, इन प्रमाणपत्रों में इथेनॉल की मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि के लिए जरूरी तकनीकी विवरण पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
उनका यह भी कहना है कि नमूनों की सुरक्षित प्रतियां और आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने से तेल कंपनियों तथा संबंधित पेट्रोल पंप संचालकों को दोबारा जांच कराने या रिपोर्ट का सत्यापन करने का अवसर नहीं मिला। कंपनियों ने इस स्थिति को जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्कर्षों की पुष्टि से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बताया है।
आईएस 17021 के अनुरूप जांच पर जोर
तेल कंपनियों के प्रारंभिक तकनीकी आकलन में प्रमाणपत्रों में बताई गई इथेनॉल जांच पद्धति को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। उनका कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जांच पद्धति भारतीय मानक आईएस 17021 के अनुरूप होनी चाहिए। कंपनियों ने दोहराया है कि उनके द्वारा देशभर में आपूर्ति किया जा रहा ई20 पेट्रोल तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार है।

फिलहाल इस मामले में तेल कंपनियों का पक्ष उनके अपने परीक्षणों और निर्धारित प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर आधारित है। कर्नाटक विभाग की ओर से बताए गए निष्कर्ष और कंपनियों की आपत्तियों के बीच विवाद का अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध कराई गई जानकारी से स्पष्ट नहीं होता। ऐसे में नमूने लेने की प्रक्रिया, प्रयोगशाला के दस्तावेज और जांच पद्धति से जुड़े तथ्यों का सत्यापन इस विवाद को समझने के लिए अहम रहेगा।
