7 नवंबर 2000 अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास में एक असाधारण तारीख बन गया। एक ओर राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अल गोर के बीच मुकाबला इतना करीबी था कि फ्लोरिडा के मतों की पुनर्गणना और कानूनी लड़ाई ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। दूसरी ओर, उसी चुनावी दिन न्यूयॉर्क के मतदाताओं ने हिलेरी रोडम क्लिंटन को अमेरिकी सीनेट के लिए चुनकर इतिहास रच दिया। वह अमेरिका की पहली ऐसी पूर्व/तत्कालीन फर्स्ट लेडी बनीं, जिन्होंने चुनाव जीतकर संघीय सार्वजनिक पद हासिल किया।
इस तारीख की खासियत यही थी कि अमेरिकी राजनीति एक साथ दो अलग-अलग दिशाओं में इतिहास लिख रही थी—राष्ट्रपति चुनाव की वैधता और मतगणना की प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस, तथा महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का नया अध्याय।
राष्ट्रपति चुनाव 2000: बुश और गोर के बीच कांटे की टक्कर
7 नवंबर 2000 को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुआ। रिपब्लिकन पार्टी की ओर से टेक्सास के गवर्नर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश मैदान में थे, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार तत्कालीन उपराष्ट्रपति अल गोर थे। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कई राज्यों में कड़ा था, लेकिन फ्लोरिडा के नतीजे ने चुनाव को असाधारण संवैधानिक संकट में बदल दिया। राष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक इलेक्टोरल कॉलेज बहुमत तक पहुंचने में फ्लोरिडा के 25 इलेक्टोरल वोट निर्णायक साबित होने वाले थे।
चुनाव की रात टेलीविजन नेटवर्क ने पहले फ्लोरिडा को गोर के पक्ष में बताया, फिर अनुमान बदलते हुए बुश के पक्ष में घोषित किया और अंततः राज्य को अनिर्णीत माना। गोर ने एक समय बुश को फोन कर हार स्वीकार की थी, लेकिन बेहद करीबी अंतर और बदलते अनुमानों के कारण उन्होंने वह रियायत वापस ले ली। इसके बाद पूरे देश की निगाहें फ्लोरिडा की मतगणना पर टिक गईं।

फ्लोरिडा की पुनर्गणना और ‘हैंगिंग चैड’ विवाद
8 नवंबर को फ्लोरिडा के प्रारंभिक आधिकारिक आंकड़ों में बुश को गोर पर 1,784 मतों की बढ़त बताई गई। यह अंतर कुल मतों के आधे प्रतिशत से कम था, इसलिए राज्य के कानून के तहत मशीन से स्वतः पुनर्गणना हुई। पुनर्गणना के बाद अंतर और घटा। गोर अभियान ने कुछ काउंटियों में हाथ से मतपत्रों की जांच की मांग की।
विवाद का एक प्रमुख पहलू पंच-कार्ड मतपत्र थे। कुछ मतपत्रों में छेद पूरी तरह अलग नहीं हुआ था या कागज का छोटा टुकड़ा—जिसे ‘चैड’ कहा जाता है—लटका रह गया था। ऐसे मतों को लेकर प्रश्न उठा कि मतदाता की वास्तविक पसंद कैसे पहचानी जाए। ‘हैंगिंग चैड’ और ‘डिंपल्ड चैड’ जैसे शब्द अमेरिकी चुनावी बहस का हिस्सा बन गए। पाम बीच काउंटी के ‘बटरफ्लाई बैलेट’ को लेकर भी आलोचना हुई, क्योंकि मतपत्र के डिजाइन से कुछ मतदाताओं के गलत उम्मीदवार को वोट देने की आशंका जताई गई।
फ्लोरिडा में अलग-अलग काउंटियों में हाथ से मतगणना के मानक और समय-सीमा को लेकर विवाद बढ़ा। बुश पक्ष ने पुनर्गणना की प्रक्रिया को चुनौती दी, जबकि गोर पक्ष ने वैध मतों की गिनती पूरी करने पर जोर दिया। राज्य की अदालतों और संघीय न्यायिक व्यवस्था के बीच मामला आगे बढ़ा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 12 दिसंबर 2000
मामला अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 12 दिसंबर 2000 को Bush v. Gore मामले में अदालत ने 5–4 के बहुमत से फ्लोरिडा में जारी हाथ से पुनर्गणना को रोक दिया। बहुमत का मुख्य संवैधानिक आधार यह था कि अलग-अलग काउंटियों में मतपत्रों की जांच के लिए समान मानक नहीं अपनाए जा रहे थे, जिससे समान संरक्षण के सिद्धांत से जुड़ा प्रश्न पैदा हुआ। अदालत के निर्णय के बाद फ्लोरिडा की पुनर्गणना आगे नहीं बढ़ सकी और राज्य के प्रमाणित परिणाम ने बुश की जीत का रास्ता साफ किया।

बुश ने फ्लोरिडा में आधिकारिक रूप से 537 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इलेक्टोरल कॉलेज में उन्हें 271 और गोर को 266 वोट मिले; एक इलेक्टर ने मतदान नहीं किया। हालांकि राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों में गोर को बुश से अधिक वोट मिले थे। इस तरह 2000 का चुनाव अमेरिकी इतिहास के उन दुर्लभ अवसरों में शामिल हुआ, जब लोकप्रिय मतों में आगे रहने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति नहीं बना। गोर ने 13 दिसंबर को अपनी हार स्वीकार की और बुश जनवरी 2001 में राष्ट्रपति बने।
इस विवाद ने अमेरिकी चुनाव प्रणाली, मतपत्रों के डिजाइन, पुनर्गणना के नियमों और चुनाव प्रशासन की निष्पक्षता पर व्यापक बहस छेड़ी। इसके बाद 2002 में Help America Vote Act पारित हुआ, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रशासन और मतदान प्रणालियों में सुधार को बढ़ावा देना था।
उसी दिन हिलेरी क्लिंटन की ऐतिहासिक सीनेट जीत
जब राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा अनिश्चितता में घिरा था, उसी दिन न्यूयॉर्क राज्य में हिलेरी रोडम क्लिंटन ने अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीत लिया। वह तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी और अमेरिका की फर्स्ट लेडी थीं। उनकी जीत ने उन्हें अमेरिकी इतिहास की पहली फर्स्ट लेडी बनाया, जिसने चुनाव जीतकर सार्वजनिक राजनीतिक पद हासिल किया। वह न्यूयॉर्क से राज्यव्यापी चुनाव जीतने वाली पहली महिला भी बनीं।
न्यूयॉर्क की यह सीट लंबे समय तक सीनेटर रहे डेनियल पैट्रिक मोयनिहान के सेवानिवृत्त होने से खाली हुई थी। हिलेरी ने फरवरी 2000 में औपचारिक रूप से अपना अभियान शुरू किया। रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में पहले न्यूयॉर्क के मेयर रूडी जूलियानी सामने आए, लेकिन स्वास्थ्य और निजी परिस्थितियों के कारण उन्होंने दौड़ छोड़ दी। बाद में कांग्रेस सदस्य रिक लाजियो रिपब्लिकन उम्मीदवार बने।

हिलेरी के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती यह थी कि वह न्यूयॉर्क से नहीं थीं और विरोधियों ने उन पर बाहरी उम्मीदवार होने का आरोप लगाया। इस आलोचना का जवाब देने के लिए उन्होंने राज्य के सभी 62 काउंटियों का दौरा किया, स्थानीय मुद्दों को सुना और मतदाताओं से सीधा संवाद बनाया। अंततः उन्होंने लगभग 55 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की; रिक लाजियो को लगभग 43 प्रतिशत मत मिले।
फर्स्ट लेडी से निर्वाचित सीनेटर तक का सफर
हिलेरी क्लिंटन का राजनीतिक सफर केवल राष्ट्रपति की पत्नी होने तक सीमित नहीं था। प्रशिक्षित वकील के रूप में उन्होंने बच्चों और परिवारों के अधिकारों, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक नीति से जुड़े मुद्दों पर पहले भी काम किया था। फर्स्ट लेडी के रूप में उन्होंने 1993 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुधार टास्क फोर्स का नेतृत्व किया और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिलाओं के अधिकारों जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
3 जनवरी 2001 को उन्होंने न्यूयॉर्क की सीनेटर के रूप में शपथ ली। सीनेट में उन्होंने सशस्त्र सेवा, स्वास्थ्य-शिक्षा-श्रम, पर्यावरण और लोक निर्माण जैसी समितियों में काम किया। 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद न्यूयॉर्क के पुनर्निर्माण, राहतकर्मियों के स्वास्थ्य और राज्य के लिए संघीय सहायता जुटाने में भी उनकी भूमिका रही। 2006 में वह दोबारा सीनेट के लिए चुनी गईं। 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में विदेश मंत्री बनने के लिए उन्होंने सीनेट से इस्तीफा दिया।
एक ही दिन की दो विरासतें
7 नवंबर 2000 की दोनों घटनाओं का ऐतिहासिक महत्व अलग-अलग है। बुश-गोर विवाद ने यह दिखाया कि लोकतंत्र में केवल मतदान कराना पर्याप्त नहीं; मतगणना के स्पष्ट, समान और भरोसेमंद नियम भी उतने ही आवश्यक हैं। दूसरी ओर, हिलेरी क्लिंटन की जीत ने यह स्थापित किया कि फर्स्ट लेडी का पद किसी निर्वाचित राजनीतिक पद का विकल्प नहीं है, लेकिन उस भूमिका से आगे बढ़कर स्वतंत्र जनादेश हासिल किया जा सकता है।

इसलिए 7 नवंबर 2000 को केवल एक विवादित राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआत के रूप में याद करना अधूरा होगा। यह वह दिन भी था जब अमेरिकी मतदाताओं ने एक महिला को सीनेट में भेजकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की नई मिसाल कायम की। एक तरफ चुनावी प्रक्रिया की संवैधानिक परीक्षा शुरू हुई, तो दूसरी ओर अमेरिकी राजनीति में महिला नेतृत्व का एक नया अध्याय खुला।
ऐतिहासिक तथ्य एक नजर में
- तारीख: 7 नवंबर 2000
- राष्ट्रपति चुनाव: जॉर्ज डब्ल्यू. बुश बनाम अल गोर
- विवाद का केंद्र: फ्लोरिडा की बेहद करीबी मतगणना और पुनर्गणना
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक फैसला: 12 दिसंबर 2000, Bush v. Gore
- फ्लोरिडा में प्रमाणित अंतर: बुश 537 मतों से आगे
- लोकप्रिय मत: अल गोर को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोकप्रिय मत मिले
- हिलेरी क्लिंटन: न्यूयॉर्क से अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित पहली फर्स्ट लेडी
- सीनेट में शपथ: 3 जनवरी 2001
