विशेष लेख | 7 नवंबर | इतिहास के पन्नों से | विश्व राजनीति
7 नवंबर 2000 को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, तत्कालीन उपराष्ट्रपति अल गोर के बीच था। चुनाव की रात तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अगला राष्ट्रपति कौन होगा। फ्लोरिडा के बेहद करीबी नतीजे, मतपत्रों की गिनती पर विवाद, कई चरणों की पुनर्गणना और अदालतों में चली लंबी कानूनी लड़ाई ने अमेरिकी लोकतंत्र को एक अभूतपूर्व संवैधानिक मोड़ पर ला खड़ा किया।
अंततः 12 दिसंबर 2000 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Bush v. Gore के बाद फ्लोरिडा में पुनर्गणना रुक गई। फ्लोरिडा के प्रमाणित परिणाम में बुश को 537 वोटों की बढ़त मिली और राज्य के 25 इलेक्टोरल वोट उनके पक्ष में गए। राष्ट्रीय स्तर पर अल गोर ने लोकप्रिय मतों में अधिक वोट हासिल किए थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली यानी Electoral College में बुश को बहुमत मिला। यह चुनाव आज भी चुनावी प्रक्रिया, मताधिकार, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर बहस का प्रमुख उदाहरण है।
7 नवंबर 2000: मतदान और अनिश्चित चुनावी रात
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों से तय नहीं होता। मतदाता अपने-अपने राज्यों में मतदान करते हैं और अधिकांश राज्यों में विजेता उम्मीदवार को उस राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के लगभग सभी वोट मिलते हैं। कुल 538 इलेक्टोरल वोटों में राष्ट्रपति बनने के लिए कम-से-कम 270 वोटों का बहुमत आवश्यक होता है। इस व्यवस्था में फ्लोरिडा के 25 इलेक्टोरल वोट निर्णायक साबित होने वाले थे।

चुनाव के दिन देशभर में मतदान हुआ। रात में टेलीविजन नेटवर्कों ने फ्लोरिडा के संभावित परिणामों को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए। कुछ समय के लिए राज्य को गोर के पक्ष में बताया गया, फिर बुश के पक्ष में; बाद में मुकाबला इतना करीबी माना गया कि राज्य का परिणाम अनिर्णीत छोड़ दिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव का नतीजा फ्लोरिडा पर निर्भर हो गया।
फ्लोरिडा के शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों में बुश को 2,909,135 और गोर को 2,907,351 वोट मिले—अंतर केवल 1,784 वोट था। यह अंतर कुल मतों के आधे प्रतिशत से कम था, इसलिए राज्य के कानून के तहत मशीन से स्वचालित पुनर्गणना कराई गई। पुनर्गणना के बाद बुश की बढ़त और कम हो गई। गोर अभियान ने कुछ काउंटियों में हाथ से मतगणना कराने की मांग की। Bush v. Gore के न्यायिक रिकॉर्ड में इस शुरुआती अंतर और पुनर्गणना का विवरण दर्ज है।
फ्लोरिडा के मतपत्र: विवाद क्यों बढ़ा?
फ्लोरिडा के कुछ इलाकों में इस्तेमाल किए गए पंच-कार्ड मतपत्र विवाद के केंद्र में आ गए। मतदाता को उम्मीदवार के नाम के पास एक छोटा छेद करना होता था। कुछ मतपत्रों में छेद पूरी तरह नहीं हुआ था, कुछ में कागज का छोटा टुकड़ा लटका रह गया था और कुछ में केवल निशान या गड्ढा दिखाई देता था। इन्हें मीडिया में “hanging chads” और “dimpled chads” जैसे नामों से चर्चा मिली। सवाल यह था कि क्या ऐसे मतपत्रों से मतदाता की मंशा स्पष्ट होती है और क्या उन्हें वैध वोट माना जाना चाहिए।
एक अन्य विवाद Palm Beach County के “butterfly ballot” को लेकर हुआ। मतपत्र की डिजाइन और उम्मीदवारों के नामों के क्रम को लेकर मतदाताओं के भ्रमित होने की शिकायतें सामने आईं। इसके अलावा कुछ काउंटियों में मतदाता पंजीकरण सूचियों, अनुपस्थित मतपत्रों और मतदान केंद्रों पर प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठे। अमेरिकी नागरिक अधिकार आयोग की 2001 की जांच ने फ्लोरिडा में मतदान और मतगणना से जुड़ी अनियमितताओं की समीक्षा की और निष्कर्ष दिया कि अनेक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रभावी इस्तेमाल नहीं कर सके; रिपोर्ट ने अफ्रीकी-अमेरिकी मतदाताओं पर असमान प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया।

मैनुअल रिकाउंट और कानूनी लड़ाई
गोर ने Broward, Miami-Dade, Palm Beach और Volusia काउंटियों में हाथ से मतगणना की मांग की। फ्लोरिडा के अलग-अलग काउंटी बोर्डों ने मतपत्रों की जांच की, लेकिन मतदाता की मंशा पहचानने के मानदंडों और प्रक्रिया में एकरूपता को लेकर विवाद पैदा हुआ। राज्य की समय-सीमाओं, देर से प्राप्त परिणामों और पुनर्गणना के अधिकार पर राज्य अदालतों तथा संघीय अदालतों में कई मुकदमे चले।
26 नवंबर 2000 को फ्लोरिडा की चुनाव कैनवसिंग आयोग ने परिणाम प्रमाणित किए और बुश को राज्य के 25 इलेक्टोरल वोटों का विजेता घोषित किया। प्रमाणित गणना में बुश को 2,912,790 और गोर को 2,912,253 वोट मिले—अंतर 537 वोट का था। गोर ने इस प्रमाणन को अदालत में चुनौती दी। इसके बाद मामला फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
4 दिसंबर 2000 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Bush v. Palm Beach County Canvassing Board मामले में फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्णय की समीक्षा की और मामला वापस भेजा। 8 दिसंबर को फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अनगिने मतपत्रों की हाथ से गिनती का आदेश दिया। बुश पक्ष ने इसे चुनौती दी और 9 दिसंबर को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। 11 दिसंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
12 दिसंबर 2000: Bush v. Gore का ऐतिहासिक फैसला
12 दिसंबर 2000 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Bush v. Gore, 531 U.S. 98 में अपना फैसला सुनाया। बहुमत ने माना कि फ्लोरिडा में अलग-अलग काउंटियों में मतपत्रों की हाथ से गिनती के लिए समान मानक नहीं थे। अदालत के अनुसार, मतों की गिनती में इस तरह का असमान व्यवहार अमेरिकी संविधान के चौदहवें संशोधन के Equal Protection Clause से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा करता था।

फैसले में अदालत ने यह भी देखा कि फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ऐसी पुनर्गणना के लिए कोई समान और पर्याप्त रूप से स्पष्ट प्रक्रिया मौजूद नहीं थी, जिसे संबंधित कानूनी समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके। इसी आधार पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट के पुनर्गणना आदेश को पलट दिया। यह समझना जरूरी है कि अदालत ने मतदाताओं के लोकप्रिय मतों की राष्ट्रीय गणना के आधार पर राष्ट्रपति नहीं चुना; उसके फैसले का सीधा प्रभाव फ्लोरिडा की पुनर्गणना प्रक्रिया और राज्य के परिणाम पर पड़ा।
फैसला अत्यंत विवादास्पद रहा। न्यायाधीशों के बीच मतभेद गहरे थे और अलग-अलग न्यायाधीशों ने बहुमत तथा असहमति वाले मतों में अपने संवैधानिक तर्क रखे। बहुमत के निर्णय ने तत्काल चुनावी विवाद का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन इसकी वैधानिक व्याख्या, न्यायपालिका की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया पर इसके प्रभाव को लेकर वर्षों तक चर्चा जारी रही।
लोकप्रिय मतों में गोर, इलेक्टोरल कॉलेज में बुश
2000 के चुनाव की सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि देशभर में कुल लोकप्रिय मतों की संख्या में अल गोर आगे रहे, जबकि इलेक्टोरल कॉलेज में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने बहुमत हासिल किया। अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुश को 271 और गोर को 266 इलेक्टोरल वोट मिले। कुल 538 इलेक्टोरल वोटों में से कोलंबिया जिले के एक निर्वाचक ने राष्ट्रपति पद के लिए खाली मतपत्र डाला था, इसलिए उम्मीदवारों के खाते में कुल 537 वोट दर्ज हुए।
यह अंतर अमेरिकी चुनाव प्रणाली की एक विशेषता को सामने लाता है: राष्ट्रपति पद का विजेता राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों में आगे रहने वाला उम्मीदवार होना अनिवार्य नहीं है। राज्यवार इलेक्टोरल वोटों का वितरण और प्रत्येक राज्य में जीत का महत्व परिणाम तय करता है। फ्लोरिडा का मामला इसी व्यवस्था में निर्णायक बना।

नतीजे के बाद: सत्ता हस्तांतरण और राजनीतिक प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गोर ने 13 दिसंबर 2000 को सार्वजनिक रूप से चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए बुश को बधाई दी। इसके बाद इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया आगे बढ़ी और कांग्रेस ने जनवरी 2001 में परिणाम की औपचारिक गणना की। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 20 जनवरी 2001 को अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
यह विवाद अमेरिकी चुनाव प्रशासन में सुधार की मांग को मजबूत करने वाला साबित हुआ। पंच-कार्ड मतपत्रों, मतगणना उपकरणों, मतदाता पंजीकरण, चुनावी मानकों और राज्यों के बीच प्रक्रियागत अंतर पर राष्ट्रीय बहस हुई। 2002 में Help America Vote Act पारित किया गया, जिसके जरिए मतदान प्रणालियों के आधुनिकीकरण, चुनाव प्रशासन के लिए सहायता और मतदाता पंजीकरण से जुड़े सुधारों की दिशा में कदम उठाए गए। हालांकि कानून का निर्माण कई कारकों से प्रभावित था, 2000 के फ्लोरिडा विवाद ने चुनावी तकनीक और प्रशासन की कमजोरियों को देशव्यापी चर्चा में ला दिया था।
लोकतंत्र के लिए इस चुनाव का सबक
बुश बनाम गोर विवाद ने दिखाया कि लोकतंत्र में केवल मतदान कराना पर्याप्त नहीं है; मतदाता की मंशा को निष्पक्ष रूप से दर्ज करना, मतों की पारदर्शी गणना करना और सभी क्षेत्रों में समान नियम लागू करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब परिणाम बेहद करीबी हो, तब चुनाव अधिकारियों की प्रक्रिया, समय-सीमा और न्यायिक समीक्षा की भूमिका निर्णायक हो जाती है।
इस प्रकरण ने यह प्रश्न भी उठाया कि चुनावी विवादों का अंतिम समाधान किस संस्था के अधिकार क्षेत्र में और किन संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए। एक ओर अदालत ने समान संरक्षण और एकसमान मतगणना मानकों को महत्वपूर्ण माना, दूसरी ओर उसके फैसले की आलोचना करने वालों ने न्यायपालिका के हस्तक्षेप और चुनावी प्रक्रिया पर उसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई। इसीलिए Bush v. Gore केवल एक राष्ट्रपति चुनाव का फैसला नहीं, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

निष्कर्ष
7 नवंबर 2000 को शुरू हुआ अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव फ्लोरिडा के बेहद करीबी मुकाबले के कारण 36 दिनों तक अनिश्चितता में रहा। 12 दिसंबर को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के Bush v. Gore फैसले ने पुनर्गणना रोक दी और फ्लोरिडा के प्रमाणित परिणाम के आधार पर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश राष्ट्रपति पद के निर्वाचित विजेता बने। अल गोर ने राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों में अधिक समर्थन हासिल किया था, लेकिन बुश ने इलेक्टोरल कॉलेज में 271-266 की बढ़त के साथ बहुमत प्राप्त किया। यह घटना आज भी चुनावी निष्पक्षता, मताधिकार, संवैधानिक व्याख्या और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर गंभीर विचार का आधार बनी हुई है।
