कोलकाता। पश्चिम बंगाल में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नई औद्योगिक नीति का खाका पेश किया है। सरकार का जोर उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराने, निवेशकों को प्रशासनिक सुविधा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को गति देना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य में लैंड बैंक तैयार करने की योजना है, ताकि उद्योग लगाने वाली कंपनियों को जरूरत के अनुसार जमीन उपलब्ध कराई जा सके।
गुरुवार को उद्योगपतियों के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति तैयार करने से पहले मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया गया और प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के सामने रखा गया। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शी व्यवस्था के तहत काम करेगी। मुख्यमंत्री ने अपनी नीति का संदेश ‘भरोसा अंदर, भय बाहर’ के रूप में रखा।
रंगदारी की शिकायत पर 15 मिनट में कार्रवाई का दावा
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से कहा कि राज्य में रंगदारी और गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति कारोबारियों या उद्योगपतियों से अवैध वसूली की मांग करता है, तो शिकायत की जाए। उन्होंने दावा किया कि शिकायत मिलने के 15 मिनट के भीतर कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार किया जाएगा। यह मुख्यमंत्री की ओर से किया गया दावा है; इसकी प्रक्रिया, शिकायत दर्ज करने के माध्यम और कार्रवाई के प्रोटोकॉल का विस्तृत विवरण संबोधन में नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री का कहना था कि निवेशकों को केवल वित्तीय प्रोत्साहन देना पर्याप्त नहीं है। कारखाना चलाने, कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बाजार तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित माहौल भी जरूरी है। सरकार ने कारोबार में बाधा डालने वाली गतिविधियों पर सख्ती का भरोसा दिया है।

दो करोड़ शिक्षित बेरोजगारों का मुद्दा उठाया
शुभेंदु अधिकारी ने रोजगार सृजन को नई नीति का प्रमुख उद्देश्य बताया। उनके अनुसार, राज्य में दो करोड़ से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं और करीब 70 से 80 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में काम करने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए उद्योग और मौजूदा इकाइयों का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ये आंकड़े मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रखे हैं।
नीति में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में नियोक्ता के योगदान की प्रतिपूर्ति, महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों की नियुक्ति को प्रोत्साहन तथा पिछड़े क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। सरकार की कोशिश है कि निवेश के साथ नियुक्तियों की संख्या भी बढ़े और उद्योगों को रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
उद्योगों के लिए लैंड बैंक तैयार करने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के समय उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। उनकी सरकार लैंड बैंक तैयार कर रही है। इसके तहत राज्य सरकार जमीन खरीदकर औद्योगिक निवेश के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगी। उन्होंने पानागढ़, हरिणघाटा और रघुनाथपुर सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध होने का उल्लेख किया। सरकार का दावा है कि निवेशकों की जरूरत के अनुरूप जमीन देने की दिशा में काम किया जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार जबरन जमीन अधिग्रहण के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात की जमीन नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है जिसमें उद्योगों को जमीन उपलब्ध हो और किसानों के हितों की भी रक्षा की जा सके। इस विषय पर नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण से जुड़े पुराने विवादों का संदर्भ भी मुख्यमंत्री ने दिया।

पूर्ववर्ती सरकारों की औद्योगिक नीति पर सवाल
मुख्यमंत्री ने वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की औद्योगिक नीतियों की आलोचना की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और नंदीग्राम की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों ने राज्य के औद्योगिक विकास को प्रभावित किया। ताजपुर गहरे समुद्र बंदरगाह परियोजना का जिक्र करते हुए भी उन्होंने पिछली सरकार पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, उद्योगपतियों ने उनसे कहा था कि ताजपुर में सरकार के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं थी।
उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में करीब 16 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बावजूद अपेक्षित औद्योगिक गतिविधियां जमीन पर नहीं दिखने का दावा किया। उद्योग सम्मेलनों पर खर्च को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और एक सम्मेलन पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही। ये आरोप और आंकड़े मुख्यमंत्री के बयान पर आधारित हैं।
पांच साल में निवेश और आर्थिक गतिविधि बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में राज्य में निवेश बढ़ाने और आर्थिक सुधार की बात कही। उन्होंने दावा किया कि अगले कुछ महीनों में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। उन्होंने राज्य की आय में चार हजार करोड़ रुपये की वृद्धि का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करेगी और निवेशकों को घोषणाओं के बजाय जमीन पर परिणाम दिखाने की कोशिश करेगी।
उन्होंने सिंगूर और ताजपुर परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए भविष्य में औद्योगिक विकास से जुड़े कदमों के संकेत दिए, हालांकि सिंगूर के बारे में कोई विस्तृत योजना घोषित नहीं की। उन्होंने कौशल विकास और आईटीआई संस्थानों को बेहतर बनाने की जरूरत बताई। जिंदल समूह के सज्जन जिंदल से जनवरी में मुलाकात कर युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा करने की बात भी कही।

निवेशकों को बंगाल में कारोबार बढ़ाने का आमंत्रण
मुख्यमंत्री ने राज्य के प्राकृतिक संसाधनों—समुद्र, नदियों, वन क्षेत्रों और खनिज संपदा—का उल्लेख करते हुए निवेशकों से बंगाल में उद्योग लगाने की अपील की। पुरुलिया और बांकुड़ा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक संभावनाओं की बात कही। उनके संबोधन का संदेश था कि राज्य सरकार जमीन, सुरक्षा, कौशल और प्रोत्साहन के माध्यम से निवेश का वातावरण तैयार करना चाहती है। अब नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं किस गति से लागू होती हैं और उनसे वास्तविक निवेश तथा रोजगार कितना पैदा होता है।
