बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी नई संपत्तियों पर कार्रवाई की है। इनमें दो चार्टर्ड विमान, महाराष्ट्र में जमीन और कार्यालय परिसर, तमिलनाडु की पवन चक्कियां, बैंक जमा और निवेश शामिल हैं। एजेंसी अब तक समूह से जुड़े अलग-अलग मामलों में करीब ₹23,100 करोड़ की संपत्तियां अटैच या जब्त कर चुकी है।
अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में एजेंसी ने ₹510.17 करोड़ की नई संपत्तियां अटैच करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। ईडी के मुताबिक, इस बार की कार्रवाई में दो चार्टर्ड विमान, महाराष्ट्र में जमीन के छह टुकड़े और एक कार्यालय परिसर के अलावा तमिलनाडु की दो पवन चक्कियां, बैंक खातों में जमा रकम, फिक्स्ड डिपॉजिट और निवेश जैसी संपत्तियां शामिल हैं।
3 नवंबर को सामने आई इस कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े विभिन्न मामलों में ईडी की ओर से अटैच और जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹23,100 करोड़ हो गया है। यह आंकड़ा केवल ताजा ₹510.17 करोड़ की कार्रवाई का नहीं, बल्कि समूह से जुड़े कई मामलों में अब तक हुई कार्रवाई का कुल मूल्य है।
तीन कंपनियों से जुड़े बैंक फ्रॉड मामलों में कार्रवाई
ईडी की ताजा कार्रवाई तीन कंपनियों से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच का हिस्सा है। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) शामिल हैं।

एजेंसी के अनुसार, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े मामले में ₹263.05 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की जांच की जा रही है। वहीं, रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में ₹247.12 करोड़ की रकम जांच के दायरे में है। इन दोनों मामलों में अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य ₹510.17 करोड़ है।
ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की है। इसके लिए संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया गया है। इसका अर्थ है कि जांच के दौरान संबंधित संपत्तियों के हस्तांतरण या उनके इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगाई जा सकती है। यह अंतिम जब्ती या किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं है।
दो चार्टर्ड विमान, महाराष्ट्र में जमीन और ऑफिस भी अटैच
ताजा कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा दो चार्टर्ड विमानों की है। ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में एक डसॉल्ट फाल्कन 2000 और एक एम्ब्रेयर विमान को अटैच किया है। इनके अलावा महाराष्ट्र में छह जमीन के टुकड़े और एक कार्यालय परिसर भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
वहीं, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े मामले में तमिलनाडु की दो पवन चक्कियां अटैच की गई हैं। इसके साथ ही बैंक खातों में जमा रकम, फिक्स्ड डिपॉजिट, निवेश और कंपनियों को मिलने वाली कुछ रकम यानी रिसीवेबल्स भी कार्रवाई में शामिल हैं।

ED का आरोप- कर्ज की रकम दूसरी जगह भेजी गई
ईडी का आरोप है कि रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी कंपनियों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिले सार्वजनिक धन का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। एजेंसी की जांच में रकम को दूसरी कंपनियों और ठिकानों पर भेजने, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग और कंपनी की संपत्तियों को प्रवर्तकों के निजी फायदे के लिए सुरक्षित रखने जैसे आरोप सामने आए हैं।
ईडी का यह भी दावा है कि सार्वजनिक धन का एक हिस्सा भारत से बाहर टैक्स हेवन कहे जाने वाले देशों में भेजा गया। एजेंसी के अनुसार, इस रकम का बड़ा हिस्सा प्रवर्तकों और उनके परिवार के व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं; जांच जारी है और इन्हें अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
अब तक 10 गिरफ्तारियां, छह अभियोजन शिकायतें
ईडी के मुताबिक, समूह से जुड़े इन मामलों की जांच के दौरान अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी ने PMLA के तहत छह अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत भी अलग से जांच की गई है और इस कानून के तहत एक शिकायत दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
ईडी की जांच की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और दिल्ली तथा मुंबई की आर्थिक अपराध शाखाओं (EOW) में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी। जांच के दायरे में रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के अलावा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है। ताजा कार्रवाई के साथ समूह से जुड़े अलग-अलग मामलों में अटैच और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹23,100 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि, संपत्तियों को अटैच किया जाना जांच के दौरान उठाया गया कदम है; इससे अपने आप आरोप साबित नहीं हो जाते।
