काली पूजा विसर्जन, छठ पूजा और जगद्धात्री पूजा के दौरान श्रद्धालुओं तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता और हावड़ा के विभिन्न घाटों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बुधवार को संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, आवागमन और जरूरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति देखी गई।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों के साथ किया दौरा
घाटों के निरीक्षण के दौरान सूचना एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त, कोलकाता और हावड़ा नगर निगम के आयुक्त, रिवर पुलिस तथा अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य पर्वों के दौरान घाटों पर होने वाली भीड़ और धार्मिक गतिविधियों के लिए समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करना था।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने घाटों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। पर्वों के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश और निकास, रोशनी, सफाई और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। प्रशासन ने इन्हीं बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
सफाई और प्रकाश व्यवस्था की समीक्षा
घाटों पर स्वच्छता बनाए रखना निरीक्षण का एक प्रमुख विषय रहा। धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से घाटों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई की अतिरिक्त जरूरत होती है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आयोजन के दौरान और उसके बाद भी सफाई व्यवस्था पर ध्यान रखा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनी रहे।

प्रकाश व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। पूजा और विसर्जन के अवसर पर कई गतिविधियां ऐसे समय होती हैं, जब पर्याप्त रोशनी की जरूरत पड़ती है। घाटों पर रोशनी की उपलब्धता श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवाजाही दोनों के लिए जरूरी है। निरीक्षण के दौरान इस व्यवस्था को दुरुस्त रखने और आवश्यक स्थानों पर उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए गए।
सुरक्षा और आवागमन पर प्रशासन का जोर
कोलकाता पुलिस, रिवर पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था तथा आवागमन की स्थिति का भी जायजा लिया गया। पर्वों के दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है। विसर्जन के समय वाहनों, पूजा समितियों और आम लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होती है।
निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सुरक्षा के साथ-साथ घाटों तक पहुंचने और वहां से लौटने की व्यवस्था भी सुचारु रखी जाए। उपलब्ध जानकारी में किसी खास घाट पर अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग या यातायात मार्ग में बदलाव का विवरण नहीं दिया गया है।
काली पूजा विसर्जन, छठ और जगद्धात्री पूजा के लिए तैयारी
निरीक्षण का उद्देश्य एक से अधिक धार्मिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए घाटों की तैयारियों की समीक्षा करना था। काली पूजा के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन, छठ पूजा के अनुष्ठानों और जगद्धात्री पूजा के अवसर पर श्रद्धालु घाटों और नदी किनारे के स्थानों पर पहुंचते हैं। इन आयोजनों में धार्मिक परंपराओं के साथ बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रहती है।

सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों में यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि सभी धार्मिक अनुष्ठान सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हों। घाटों की साफ-सफाई, रोशनी, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को समय रहते दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों की होगी।
विभागों के बीच समन्वय की जरूरत
निरीक्षण में नगर निगम, पुलिस, रिवर पुलिस और राज्य सरकार के विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से यह स्पष्ट है कि घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी है। नगर निगम की जिम्मेदारी सफाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी है, जबकि पुलिस और रिवर पुलिस की भूमिका सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन में अहम होती है। सूचना एवं संस्कृति विभाग भी आयोजन से जुड़े प्रशासनिक समन्वय का हिस्सा है।
मंत्री और अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासन का लक्ष्य है कि पर्वों के दिनों में श्रद्धालुओं को घाटों पर पहुंचने, पूजा-अर्चना करने और लौटने में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
जनसुरक्षा और जनसुविधा को प्राथमिकता
निरीक्षण के दौरान सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया कि जनसुरक्षा और जनसुविधा सर्वोपरि हैं। सभी पर्व और धार्मिक आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित तथा निर्बाध रूप से संपन्न कराने का संकल्प दोहराया गया। अब संबंधित विभागों के सामने निरीक्षण में दिए गए निर्देशों को समय पर लागू करने की जिम्मेदारी है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में निरीक्षण किए गए सभी घाटों के नाम, वहां पाई गई कमियों या सुधार कार्यों की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सफाई, प्रकाश, सुरक्षा और आवागमन की समीक्षा की गई है। पर्वों के दौरान व्यवस्थाओं का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि संबंधित एजेंसियां निर्देशों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं।
