कटिहार: कटिहार के कदवा थाना क्षेत्र में अंतरजातीय विवाह को लेकर परिवार और सामाजिक मान्यताओं के बीच टकराव का मामला सामने आया है। यहां अंतरजातीय विवाह से नाराज पिता ने जीवित बेटी का श्राद्ध कर दिया। घटना कदवा थाना क्षेत्र की कंटिया पंचायत के निझरा गांव की बताई गई है। युवती के प्रेम विवाह से नाराज पिता और भाई ने पारिवारिक संबंध समाप्त करने के निर्णय के साथ उसके जीवित रहते ही श्राद्ध कर्म किया।
मामला सामने आने के बाद गांव में इसकी चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निझरा गांव निवासी श्याम ठाकुर की पुत्री सैजल कुमारी ने 23 अक्टूबर को पहलागढ़ पंचायत निवासी अजय पासवान के साथ प्रेम विवाह किया था। दोनों अलग-अलग जातियों से आते हैं। इसी वजह से युवती के स्वजन इस विवाह से नाराज बताए गए हैं।
23 अक्टूबर को किया था प्रेम विवाह
बताया गया कि सैजल कुमारी ने अपने पसंद के युवक अजय पासवान के साथ विवाह किया। अजय पासवान पहलागढ़ पंचायत निवासी बताए गए हैं। उनके माता-पिता के रूप में मुखिया सरस्वती देवी और मुन्ना पासवान का उल्लेख किया गया है। विवाह के बाद युवती के परिवार में नाराजगी बढ़ गई।
परिवार की नाराजगी की मुख्य वजह दोनों युवाओं का अलग-अलग जातियों से होना बताया गया है। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, युवती के पिता और भाई ने उसके इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया और पारिवारिक संबंध समाप्त करने का फैसला किया। इसी क्रम में उन्होंने जीवित रहते हुए बेटी का श्राद्ध कर्म कर दिया।

जीवित बेटी का श्राद्ध करने की घटना से गांव में चर्चा
जीवित बेटी का श्राद्ध किए जाने की खबर सामने आने के बाद निझरा गांव में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। सामान्य तौर पर श्राद्ध कर्म किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद किया जाता है, लेकिन यहां परिवार ने बेटी के विवाह के विरोध में उसके जीवित रहते ही यह कर्मकांड किया। घटना ने सामाजिक स्वीकार्यता, पारिवारिक संबंध और विवाह के व्यक्तिगत निर्णय को लेकर बहस को भी जन्म दिया है।
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार ने विवाह को स्वीकार करने के बजाय बेटी से संबंध समाप्त करने का रास्ता चुना। हालांकि, उपलब्ध सूचना में पुलिस की ओर से किसी प्राथमिकी, गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस संबंध में किसी अतिरिक्त कार्रवाई का दावा करना उचित नहीं होगा।
जातिगत मान्यताओं और व्यक्तिगत पसंद के बीच टकराव
अंतरजातीय विवाह को लेकर समाज के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं। इस मामले में भी परिवार की नाराजगी का केंद्र विवाह का जातिगत अंतर बताया गया है। दूसरी ओर, युवती ने अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनकर विवाह किया। इसके बाद परिवार की ओर से किया गया श्राद्ध कर्म उनके विरोध की गंभीरता को दर्शाता है।
ऐसे मामलों में व्यक्तिगत निर्णय और पारिवारिक भावनाओं के बीच टकराव सामने आता है। विवाह जैसे फैसले में परिवार की स्वीकृति को लेकर मतभेद कई बार सामाजिक विवाद का रूप ले लेते हैं। कदवा की यह घटना इसी तरह के पारिवारिक और सामाजिक तनाव की ओर संकेत करती है।

पिता और भाई ने संबंध खत्म करने का लिया फैसला
जानकारी के मुताबिक, पिता श्याम ठाकुर और युवती के भाई ने बेटी के विवाह से आहत होकर उससे पारिवारिक संबंध खत्म करने का निर्णय लिया। इसी फैसले के तहत श्राद्ध कर्म किया गया। यह कदम परिवार की ओर से युवती के विवाह को स्वीकार नहीं किए जाने का प्रतीक माना जा रहा है।
फिलहाल उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि श्राद्ध कर्म किस स्थान पर और किस विस्तृत विधि से किया गया। इतना जरूर सामने आया है कि पिता और भाई ने बेटी को जीवित रहते ही मृत मानने की प्रतीकात्मक प्रक्रिया अपनाई। गांव में इस घटना को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
मामले में आगे की स्थिति पर नजर
कदवा थाना क्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर अंतरजातीय विवाह को लेकर परिवार और समाज के भीतर मौजूद मतभेद को सामने ला दिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना का केंद्र पारिवारिक विरोध और संबंध विच्छेद का फैसला है। किसी भी कानूनी कार्रवाई या अन्य घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित स्तर से होने के बाद ही की जा सकेगी।
युवती और युवक के विवाह के बाद परिवार की ओर से उठाया गया यह कदम अब गांव के सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। मामले में आगे परिवार, स्थानीय प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है तो उसी के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

