जमुई: अंतरराज्यीय साइबर अपराध की जांच में नवी मुंबई पुलिस को जमुई पुलिस का सहयोग मिला है। सिकंदरा थाना क्षेत्र के पाठकचक गांव में स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी कर दिवेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। वह गांव निवासी अयोध्या यादव का पुत्र बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे नवी मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
पुलिस के अनुसार दिवेश के खिलाफ नवी मुंबई के सीबीडी पुलिस स्टेशन में दर्ज साइबर फ्रॉड केस संख्या 190/26 में तलाश की जा रही थी। मामले की जांच के क्रम में मुंबई पुलिस की टीम जमुई पहुंची और सिकंदरा थाना पुलिस से समन्वय स्थापित किया। स्थानीय स्तर पर आरोपित की पहचान और उसके ठिकाने की जानकारी जुटाने के बाद संयुक्त कार्रवाई की गई।
पाठकचक गांव में हुई कार्रवाई
नवी मुंबई पुलिस की टीम ने सिकंदरा पुलिस के सहयोग से पाठकचक गांव में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दिवेश कुमार को पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद स्थानीय पुलिस ने उसे संबंधित टीम को सौंप दिया। इस तरह दूसरे राज्य में दर्ज साइबर अपराध के मामले की जांच जमुई तक पहुंची और स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई में सहयोग किया।
सिकंदरा थानाध्यक्ष विकास कुमार के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी नवी मुंबई में दर्ज मामले के अनुसंधान के क्रम में की गई है। पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में साइबर ठगी के मामले में आरोपी पर लगाए गए पूरे आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए मामले की आगे की जानकारी जांच और संबंधित पुलिस कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया शुरू
गिरफ्तार आरोपी को नवी मुंबई ले जाने के लिए पुलिस न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड लेने की प्रक्रिया में जुटी है। ट्रांजिट रिमांड के जरिए दूसरे क्षेत्र में दर्ज मामले के आरोपी को संबंधित जांच एजेंसी या पुलिस अपने क्षेत्र में ले जाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करती है। इस मामले में भी न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को मुंबई ले जाने की कार्रवाई की जाएगी।
अंतरराज्यीय समन्वय बना जांच की अहम कड़ी
साइबर अपराध की प्रकृति ऐसी है कि ठगी के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों या शहरों में छिप सकते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस और उस राज्य की पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान जांच की गति तय करता है। सिकंदरा में हुई यह कार्रवाई भी इसी समन्वय का उदाहरण है।
नवी मुंबई पुलिस को स्थानीय पुलिस से मिले सहयोग के कारण आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली। कार्रवाई के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी। आरोपी की भूमिका, कथित साइबर अपराध का तरीका और उससे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी संबंधित जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।
जमुई पुलिस की भूमिका
स्थानीय पुलिस ने बाहरी राज्य से आई जांच टीम को सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में केवल ऑनलाइन जांच ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि आरोपित के संभावित ठिकानों तक पहुंचने के लिए स्थानीय पुलिस नेटवर्क भी जरूरी होता है।

फिलहाल दिवेश कुमार को नवी मुंबई पुलिस के हवाले किया जा चुका है और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया चल रही है। आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या बरामदगी संबंधी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
