अर्जेंटीना से निजी जेट पकड़कर इक्वाडोर के रास्ते अमेरिका पहुंचे फ्लावियो; ट्रंप के करीबी और राष्ट्रपति मिलेई की भूमिका का दावा, सुप्रीम कोर्ट के पासपोर्ट आदेश की अनदेखी से बढ़ा विवाद
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने देश छोड़ दिया। उनका ब्राजील से निकलना किसी आम राजनीतिक यात्रा की तरह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गुप्त अभियान की तरह था। चार काली कारों का काफिला, अलग-अलग दिशाओं में जाती गाड़ियां, अर्जेंटीना में इंतजार करता निजी विमान और रास्ते में बदले गए ठिकाने—इन सबके बीच फ्लावियो अपने परिवार के साथ अमेरिका पहुंच गए।
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी यात्रा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लोगों और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के सहयोगियों की भूमिका रही। फ्लावियो को अमेरिका में एक साल के लिए रहने की अनुमति भी दी गई है। हालांकि, यह स्थायी राजनीतिक शरण नहीं, बल्कि ह्यूमैनिटेरियन पैरोल है।
चार कारों का काफिला और रास्ते में बदलती रणनीति
रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम ब्रासीलिया स्थित अपना घर छोड़ने के बाद फ्लावियो चार गहरे रंग की कारों के काफिले में निकले। कुछ ही देर बाद सभी गाड़ियां अलग-अलग दिशाओं में चली गईं। इस रणनीति का मकसद उनका पीछा कर रहे पत्रकारों और अधिकारियों को भ्रमित करना था।

इस दौरान उनके सहयोगियों की ओर से यह खबर भी फैलाई गई कि फ्लावियो फ्लोरिडा पहुंच चुके हैं, जबकि उस समय वह ब्राजील में ही थे। दूसरी ओर, अर्जेंटीना में उनके लिए एक निजी विमान तैयार रखा गया था।
अर्जेंटीना के रास्ते निजी विमान से अमेरिका तक का सफर
मंगलवार रात करीब 10 बजकर 50 मिनट पर फ्लावियो और उनका परिवार अर्जेंटीना के प्यूर्टो इगुआजु में दाखिल हुआ। वे ब्राजील और अर्जेंटीना को जोड़ने वाले तानक्रेडो नेवेस अंतरराष्ट्रीय पुल से सीमा पार कर पहुंचे। अर्जेंटीना की सुरक्षा पुलिस ने उनके वाहन को इगुआजु फॉल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचाया।
इसके बाद परिवार ने एक निजी विमान से अमेरिका के लिए उड़ान भरी। रिपोर्ट के अनुसार, गल्फस्ट्रीम G400 विमान (फ्लाइट नंबर LV-JQW) ने बुधवार आधी रात के बाद अर्जेंटीना से उड़ान भरी। ईंधन भरने के लिए विमान इक्वाडोर के गुआयाकिल में रुका और फिर मियामी के लिए रवाना हुआ।
28 अक्टूबर की सुबह करीब 9:30 बजे फ्लावियो और उनका परिवार मियामी-ओपा लॉक एग्जीक्यूटिव एयरपोर्ट पहुंचे। इस यात्रा के लिए इस्तेमाल किया गया विमान चार्टर एयरलाइन बेयरेस फ्लाई का था।

ट्रंप की मंजूरी और अमेरिका में एक साल रहने की अनुमति
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश देने की मंजूरी दी थी। विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वीजा संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई।
हालांकि, परिवार को अमेरिका में प्रवेश एक साल के ह्यूमैनिटेरियन पैरोल के तहत मिला। यह मानवीय आधार पर सीमित अवधि के लिए अमेरिका में रहने की अनुमति होती है। इसे स्थायी निवास या राजनीतिक शरण के बराबर नहीं माना जा सकता।
इस अभियान में फ्लावियो के छोटे भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो और ट्रंप के सलाहकार जेसन मिलर की भूमिका का भी रिपोर्ट में जिक्र है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के करीबी सहयोगी सैंटियागो कैपुटो ने भी प्यूर्टो इगुआजु में इस व्यवस्था की निगरानी की।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच देश छोड़ने पर कानूनी सवाल
फ्लावियो का अमेरिका पहुंचना ऐसे समय हुआ है, जब ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने उनसे अपने पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दिया था। यह आदेश उनके खिलाफ चल रही जांच के बीच आया था। जांच में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। फ्लावियो ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत के आदेश और विदेश यात्रा पर लगी पाबंदियों के बावजूद उन्होंने देश छोड़ दिया। तय समयसीमा में पासपोर्ट जमा नहीं कराने के मामले ने उनके विदेश जाने को लेकर कानूनी विवाद और गहरा कर दिया है।
चुनाव में हार के बाद अमेरिका से राजनीति करने की तैयारी?
ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज की थी। आधिकारिक चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, लूला को 51.79 प्रतिशत यानी 6.42 करोड़ से अधिक वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत यानी करीब 5.98 करोड़ वोट मिले। इस जीत के साथ लूला चौथी बार राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।
मियामी पहुंचने के बाद फ्लावियो ने ट्रंप और मिलेई का आभार जताया। उन्होंने खुद को ब्राजील का नेता बताया और चुनाव तथा अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न करार दिया। हालांकि, उनके दावों के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ्लावियो अमेरिका में रहते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए एक अलग व्यवस्था खड़ी करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन अभी तक व्हाइट हाउस की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है कि अमेरिका लूला की चुनावी जीत को चुनौती देगा। ट्रंप भी कह चुके हैं कि वह ब्राजील के चुनावी विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

फ्लावियो के अमेरिका पहुंचने से ब्राजील और अमेरिका के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। खासकर तब, जब ट्रंप प्रशासन पहले भी ब्राजील के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर लूला सरकार और वहां की न्यायपालिका पर दबाव बनाने के कदम उठा चुका है। अब सवाल यह है कि अमेरिका में रहकर फ्लावियो अपनी राजनीति को कितना आगे बढ़ा पाते हैं और ब्राजील की अदालतें उनके देश छोड़ने के मामले में आगे क्या कार्रवाई करती हैं।
