बाहर से चमकते होटल और रेस्तरां की रसोई में खाने की स्वच्छता कैसी है, यह सवाल पटना में खाद्य संरक्षा विभाग की ताजा जांच के बाद फिर सामने आया है। कहीं शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक ही फ्रिज में रखे मिले, तो कहीं किचन की स्थिति, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों में कमियां पाई गईं।
एक प्रतिष्ठान से ₹2,774 मूल्य की खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट की गई, जबकि दूसरे प्रतिष्ठान में भी खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई हुई। विभाग ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। सवाल यह है कि बाहर खाना खाने वाले ग्राहक स्वच्छता और सुरक्षित खाद्य भंडारण को लेकर कितने आश्वस्त हो सकते हैं?
पटना। होटल या रेस्तरां में खाना खाते समय ग्राहक आम तौर पर स्वाद, कीमत और परोसने के तरीके पर ध्यान देते हैं। लेकिन भोजन बनाने वाली रसोई की साफ-सफाई, कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों का भंडारण तथा शाकाहारी और मांसाहारी सामग्री को अलग रखने जैसी व्यवस्थाएं भी खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। पटना में 29 अक्टूबर 2026 को खाद्य संरक्षा विभाग की ओर से किए गए निरीक्षण में कई प्रतिष्ठानों में ऐसी कमियां सामने आईं, जिन पर ग्राहकों और खाद्य कारोबारियों, दोनों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
बिहार सरकार के खाद्य संरक्षा विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों, साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के भंडारण और आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता की जांच की गई। विभिन्न प्रतिष्ठानों में मिली कमियों के आधार पर नमूने संग्रहित करने, खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट करने और सुधार संबंधी निर्देश देने जैसी कार्रवाई की गई।

एक ही फ्रिज में वेज और नॉनवेज, क्रॉस-कंटैमिनेशन का जोखिम
अनीसाबाद बाइपास क्रॉसिंग के पास स्थित होटल पाटलिपुत्र कॉन्टिनेंटल के निरीक्षण में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य सामग्री एक ही फ्रिज में रखी मिली। विभाग ने इसे खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित Schedule IV के उल्लंघन के रूप में दर्ज किया।

एक ही फ्रिज में दोनों प्रकार की सामग्री रखने का मुद्दा सिर्फ अलग-अलग खानपान की पसंद तक सीमित नहीं है। यदि खाद्य पदार्थों को सही तरीके से अलग नहीं रखा जाए, तो मांसाहारी सामग्री से निकलने वाले तरल, दूषित बर्तन या सतहों के संपर्क के माध्यम से दूसरे खाद्य पदार्थों में संदूषण का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, केवल एक फ्रिज में सामग्री रखे होने की जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वहां परोसे गए भोजन से किसी ग्राहक को नुकसान हुआ है।
ग्राहकों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि सुरक्षित खाद्य भंडारण का अर्थ केवल फ्रिज में खाना रखना नहीं, बल्कि सामग्री को ढककर रखना, उचित तापमान बनाए रखना और कच्चे तथा तैयार खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखना भी है।
₹2,774 की खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट
वाल्मी, फुलवारीशरीफ स्थित होटल द रॉयल बिहार, जो आर.ई.पी.एल. हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड की इकाई है, के निरीक्षण के दौरान विभाग ने कई खाद्य सामग्रियों को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई की।

विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, कार्रवाई में शामिल सामग्री का विवरण इस प्रकार है:
- आलू दम: 1.8 किलोग्राम, मूल्य ₹400
- येलो ग्रेवी: 5 किलोग्राम, मूल्य ₹1,250
- दाल मखनी: 2 किलोग्राम, मूल्य ₹800
- रियल फ्रूट मैंगो जूस: 3 लीटर, मूल्य ₹324
इन सामग्रियों का कुल दर्ज मूल्य ₹2,774 बताया गया है। इसके अतिरिक्त किशमिश, बादाम और पनीर के नमूने लेकर जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि विभाग ने जब्त और नष्ट की गई सामग्री का विवरण दिया है, लेकिन उपलब्ध विज्ञप्ति में इन खाद्य पदार्थों के नष्ट किए जाने का विशिष्ट कारण अलग से नहीं बताया गया है। इसलिए इसे किसी खास खाद्य पदार्थ के दूषित या मिलावटी होने का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। नमूनों की जांच रिपोर्ट से ही संबंधित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
कैफे 7 गार्डन में दस्तावेजों की कमी, भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल
एम्स गोलंबर के निकट फुलवारीशरीफ स्थित कैफे 7 गार्डन (प्राइड विहार स्नैक्स) के निरीक्षण में चना दाल और हल्दी पाउडर के नमूने संग्रहित किए गए। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

विभाग के मुताबिक, प्रतिष्ठान में एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण संख्या, पानी की जांच रिपोर्ट, कीट नियंत्रण से जुड़े दस्तावेज, कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र और FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं पाए गए। इसके अलावा शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था में कमी तथा खाद्य सामग्री के भंडारण में FIFO और FEFO प्रणालियों का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई।
FIFO का अर्थ है—पहले आई सामग्री का पहले इस्तेमाल। वहीं FEFO के तहत जिस खाद्य सामग्री की एक्सपायरी पहले होने वाली हो, उसे पहले इस्तेमाल किया जाता है। इन प्रणालियों का उद्देश्य खाद्य सामग्री के अनावश्यक रूप से पुराने पड़े रहने और एक्सपायरी के बाद इस्तेमाल होने के जोखिम को कम करना है।
हालांकि, नमूने लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि चना दाल या हल्दी पाउडर जांच में खराब साबित हो चुके हैं। इसके लिए प्रयोगशाला के निष्कर्ष जरूरी हैं।
द आर्च रेस्टोरेंट की किचन में सफाई और ड्रेनेज संबंधी कमियां
एम्स गोलंबर के पास कोरजी स्थित द आर्च रेस्टोरेंट के निरीक्षण में किचन की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। विभाग की विज्ञप्ति में साफ-सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था, FIFO और FEFO प्रणाली तथा पानी की जांच और कीट नियंत्रण से जुड़े दस्तावेजों की कमी का उल्लेख किया गया है। यहां भी शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक साथ रखे मिले।

किचन की सफाई और जल निकासी व्यवस्था में कमियां होने पर खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रखरखाव और भोजन तैयार करने की स्वच्छता प्रभावित हो सकती है। इसलिए इन पहलुओं पर समय रहते सुधार जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस प्रतिष्ठान के संबंध में किसी ग्राहक के बीमार पड़ने या खाद्य नमूने के असुरक्षित पाए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
घरौंदा में खाद्य सामग्री नष्ट, 14 दिन में सुधार का नोटिस
एस.के. पुरी, बोरिंग रोड स्थित मेसर्स घरौंदा (आशियाना मेन्यूसर्व प्राइवेट लिमिटेड) के निरीक्षण में ड्रेनेज सिस्टम, डस्टबिन, पानी की जांच रिपोर्ट, कीट नियंत्रण संबंधी दस्तावेज और कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं पाए गए। खाद्य सामग्री संभालने वाले कर्मचारियों के पास एप्रन और ग्लव्स भी नहीं मिले।
विभाग ने नमकीन एक किलोग्राम, पानी पूरी पैलेट एक किलोग्राम, कोकोनट पाउडर 500 ग्राम और एवरेस्ट सांभर मसाला 50 ग्राम को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई की। प्रतिष्ठान को कमियां दूर करने के लिए 14 दिन का सुधार नोटिस भी दिया गया।
होटल जी डायमंड और गणपति फूड प्लाजा को स्वच्छता पर निर्देश
विशाल नगर स्थित होटल जी डायमंड, एम्स गेट नंबर-1, फुलवारीशरीफ का निरीक्षण कर साफ-सफाई बनाए रखने के संबंध में नोटिस जारी किया गया। वहीं, इसी क्षेत्र में स्थित गणपति फूड प्लाजा काठी नेशन को भी निरीक्षण के बाद स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश दिया गया।

इन दोनों प्रतिष्ठानों के संबंध में उपलब्ध विज्ञप्ति में विस्तृत खाद्य नमूना रिपोर्ट या किसी खाद्य पदार्थ के असुरक्षित साबित होने की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए कार्रवाई की प्रकृति को उसी सीमा में समझना चाहिए, जितनी जानकारी विभाग ने साझा की है।
ग्राहक खाने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?
इन निरीक्षणों से उपभोक्ताओं के लिए एक व्यावहारिक संदेश निकलता है। बाहर भोजन करते समय केवल रेस्तरां की सजावट या लोकप्रियता के आधार पर उसकी स्वच्छता का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
ग्राहक कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान दे सकते हैं:
- भोजन परोसने वाले बर्तन और टेबल साफ हों।
- भोजन ढककर रखा गया हो और कच्चे तथा तैयार खाद्य पदार्थों के बीच उचित अलगाव हो।
- कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और भोजन संभालने का तरीका संतोषजनक हो।
- भोजन से असामान्य गंध आए या उसकी स्थिति संदिग्ध लगे, तो उसे खाने से बचें।
- खाद्य गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत होने पर खाद्य संरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
बिहार सरकार का खाद्य संरक्षा विभाग खाद्य कारोबारियों से स्वच्छता बनाए रखने, खाद्य सामग्री का सुरक्षित भंडारण करने, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने तथा जरूरी दस्तावेजों और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की अपील कर रहा है।

सबसे अहम बात यह है कि निरीक्षण में मिली कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन जांच रिपोर्ट के बिना किसी खाद्य पदार्थ को मिलावटी या किसी प्रतिष्ठान को बीमारी फैलाने वाला घोषित करना भी सही नहीं है। ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, कमियों का समयबद्ध सुधार और खाद्य नमूनों की पारदर्शी जांच—तीनों जरूरी हैं।
