Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 29 अक्टूबर 1923: तुर्किये गणराज्य की घोषणा और अतातुर्क का उदय
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - देश - 29 अक्टूबर 1923: तुर्किये गणराज्य की घोषणा और अतातुर्क का उदय

29 अक्टूबर 1923: तुर्किये गणराज्य की घोषणा और अतातुर्क का उदय

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 29, 2026 12:53 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 घंटा पहले
तुर्किये गणराज्य की घोषणा और अतातुर्क का उदय
साझा करें

29 अक्टूबर 1923 आधुनिक तुर्किये के इतिहास की निर्णायक तारीख है। इसी दिन तुर्किये को आधिकारिक रूप से गणराज्य घोषित किया गया और मुस्तफा कमाल अतातुर्क देश के पहले राष्ट्रपति चुने गए। यह बदलाव प्रथम विश्व युद्ध के बाद उस्मानी (ऑटोमन) साम्राज्य के विघटन और तुर्की स्वतंत्रता आंदोलन के परिणामस्वरूप उभरे नए राज्य की स्थापना का प्रतीक बना।

उस्मानी साम्राज्य का पतन

उस्मानी साम्राज्य कई सदियों तक यूरोप, एशिया और अफ्रीका के हिस्सों में फैली एक बड़ी राजनीतिक शक्ति रहा। प्रथम विश्व युद्ध में उसकी हार के बाद साम्राज्य पर गंभीर दबाव पड़ा और उसके क्षेत्रों का बँटवारा करने की योजनाएँ सामने आईं। युद्ध के बाद की राजनीतिक उथल-पुथल ने अनातोलिया में राष्ट्रीय प्रतिरोध को जन्म दिया।

मुस्तफा कमाल अतातुर्क और स्वतंत्रता आंदोलन

मुस्तफा कमाल, जिन्हें बाद में अतातुर्क के नाम से जाना गया, तुर्की राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेता बने। 1919 से शुरू हुए संघर्ष ने विदेशी सेनाओं और विभाजन की योजनाओं का विरोध किया। 1920 में अंकारा में ग्रैंड नेशनल असेंबली की स्थापना हुई और राष्ट्रीय आंदोलन ने एक वैकल्पिक राजनीतिक केंद्र बनाया। 1922 में सल्तनत समाप्त कर दी गई, जबकि खलीफा पद को कुछ समय तक अलग रूप में बनाए रखा गया।

गणराज्य की घोषणा

29 अक्टूबर 1923 को ग्रैंड नेशनल असेंबली ने संवैधानिक बदलाव के माध्यम से गणराज्य की घोषणा की। मुस्तफा कमाल अतातुर्क पहले राष्ट्रपति बने और इस्मेत इनोनू पहले प्रधानमंत्री नियुक्त हुए। अंकारा को नई व्यवस्था की राजधानी के रूप में स्थापित किया गया। इस कदम ने संप्रभुता को वंशानुगत राजशाही से हटाकर राष्ट्रीय राजनीतिक संस्थाओं से जोड़ने की दिशा स्पष्ट की।

Dinman Times ads 728-90

आधुनिक तुर्किये का निर्माण

गणराज्य की स्थापना के बाद अतातुर्क के नेतृत्व में व्यापक राजनीतिक, कानूनी, शैक्षिक और सामाजिक सुधार किए गए। नई सरकार ने धर्मनिरपेक्ष राज्य व्यवस्था, शिक्षा के पुनर्गठन, लैटिन-आधारित तुर्की लिपि अपनाने और नागरिक कानूनों में बदलाव जैसे कदम उठाए। इन सुधारों ने देश की संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया; उनके प्रभाव और विरासत पर तुर्किये में आज भी चर्चा होती है।

ये भी पढ़े

हाइड्रोजन ट्रेन से वंदे भारत तक, जमालपुर IRIMEE में रेल तकनीक पर दो दिवसीय मंथन
नावानगर JNV में NCC का वार्षिक प्रशिक्षण शिविर शुरू, कैडेट्स ने सीखी ड्रिल और टेंट पिचिंग
गेमन पुल पर अनियंत्रित होकर गिरी बाइक, 22 वर्षीय मिथुन कुमार की मौत
29 अक्टूबर: अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट दिवस और ARPANET के पहले संदेश की विरासत

29 अक्टूबर का राष्ट्रीय महत्व

29 अक्टूबर को तुर्किये में गणतंत्र दिवस यानी Cumhuriyet Bayramı मनाया जाता है। यह दिन राष्ट्रीय संप्रभुता, गणराज्य की स्थापना और आधुनिक तुर्की राज्य के निर्माण को याद करने का अवसर है। उत्सवों में आधिकारिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजन शामिल होते हैं।

इतिहास की विरासत

तुर्किये गणराज्य की घोषणा केवल शासन प्रणाली में बदलाव नहीं थी; इसने उस्मानी साम्राज्य के बाद एक नए राष्ट्रीय राज्य की दिशा तय की। अतातुर्क की भूमिका, गणराज्य के संस्थागत विकास और बाद के सुधारों को समझना आधुनिक पश्चिम एशिया और यूरोप के राजनीतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण है।

TAGGED:Education NewsIndia NewsWorld News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर सर वॉल्टर रेले 29 अक्टूबर 1618: सर वॉल्टर रेले को मृत्युदंड और उनके जीवन की विरासत
अगली ख़बर मुंगेर में गैस सिलेंडर ठीक करते लगी आग, तीन झुलसे मुंगेर में गैस सिलेंडर ठीक करने के दौरान लगी आग, तीन लोग झुलसे
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

जमालपुर IRIMEE में हाइड्रोजन ट्रेन से वंदे भारत पर मंथन

हाइड्रोजन ट्रेन से वंदे भारत तक, जमालपुर IRIMEE में रेल तकनीक पर दो दिवसीय मंथन

नावानगर JNV में NCC वार्षिक प्रशिक्षण शिविर शुरू

नावानगर JNV में NCC का वार्षिक प्रशिक्षण शिविर शुरू, कैडेट्स ने सीखी ड्रिल और टेंट पिचिंग

गेमन पुल हादसा: बाइक सवार 22 वर्षीय मिथुन की मौत

गेमन पुल पर अनियंत्रित होकर गिरी बाइक, 22 वर्षीय मिथुन कुमार की मौत

अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट दिवस

29 अक्टूबर: अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट दिवस और ARPANET के पहले संदेश की विरासत

रेडक्रॉस समिति

29 अक्टूबर 1863: अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति की स्थापना की ऐतिहासिक मंजूरी

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • विदेश
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?