कोलकाता, 26 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में अलग-अलग राह पर चलने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और लंबित अपीलों के मुद्दे पर संयुक्त पहल की है। तीनों दलों के नेताओं ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि कोलकाता, हावड़ा समेत राज्य के अन्य नगर निगमों और नगरपालिकाओं के चुनाव मतदाता सूची के पुनरीक्षण और दोबारा नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराए जाएं।
ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील करने वाले पात्र नागरिकों के मामले लंबित रहने पर उन्हें निकाय चुनाव में मतदान करने का अवसर नहीं मिल पाएगा। नेताओं ने राज्य चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव कार्यक्रम तय करने से पहले लंबित मामलों की स्थिति और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की समयसीमा को ध्यान में रखा जाए।
इस पहल की खास बात यह है कि राज्य में एक-दूसरे की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहीं पार्टियां मताधिकार से जुड़े एक मुद्दे पर साथ आई हैं। हालांकि, इसे फिलहाल किसी नए चुनावी गठबंधन या सीटों के बंटवारे की घोषणा के रूप में देखना सही नहीं होगा। संयुक्त ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े मामलों का निपटारा होने तक निकाय चुनाव टालने की मांग करना है।
4 जनवरी 2027 तक मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी होने का हवाला
संयुक्त ज्ञापन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा दर्ज करने और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, SSR की प्रारूप मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है, जबकि अंतिम सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होनी है।

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं का तर्क है कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और पात्र मतदाताओं के दावों पर जरूरी कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक नगर निकाय चुनाव कराने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि इससे ऐसे मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर मिल सकेगा, जिनके नाम SIR के दौरान हटाए गए और जिनकी अपीलों पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
इस ज्ञापन पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार और माकपा के पूर्व सांसद शमिक लाहिड़ी समेत अन्य राजनीतिक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
कोलकाता में 1.20 लाख, हावड़ा में 39 हजार अपीलें लंबित
ज्ञापन में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े लंबित मामलों को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। इसमें चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में करीब 1.20 लाख और हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में लगभग 39 हजार अपीलें लंबित हैं।
दोनों क्षेत्रों को मिलाकर यह संख्या करीब 1.59 लाख, यानी लगभग 1.6 लाख होती है। ये वे मामले हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की गई है और जिनका निपटारा अभी बाकी बताया गया है।

ज्ञापन देने वाले नेताओं का कहना है कि यदि इन मामलों का फैसला होने से पहले निकाय चुनाव करा दिए जाते हैं, तो कुछ पात्र मतदाता मतदान से वंचित रह सकते हैं। इसलिए उन्होंने मांग की है कि लंबित अपीलों पर सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए तथा पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मतदाता सूची में शामिल किए जाएं।
हालांकि, लंबित अपीलों की संख्या को उन मतदाताओं की अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता, जिनके नाम सूची में जोड़े जाएंगे। हर मामले का नतीजा संबंधित दस्तावेजों और न्यायाधिकरण के फैसले पर निर्भर करेगा।
संविधान और राज्य चुनाव आयोग के अधिकारों का दिया हवाला
संयुक्त ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243ZA और पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 5 का उल्लेख किया गया है। ज्ञापन देने वाले पक्षों का तर्क है कि राज्य चुनाव आयोग को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निकाय चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों और पात्र मतदाताओं को मतदान का अवसर मिले।
नेताओं ने आयोग से अनुरोध किया है कि चुनाव की तारीख तय करते समय मतदाता सूची के पुनरीक्षण की समयसीमा और अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों को ध्यान में रखा जाए। उनकी मांग है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने और लंबित अपीलों पर जरूरी कार्रवाई के बाद ही चुनाव कराए जाएं।

यह ज्ञापन राजनीतिक दलों की मांग और उनका कानूनी पक्ष सामने रखता है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव टालने का फैसला कर लिया है। चुनाव कार्यक्रम को लेकर अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारियों की प्रक्रिया और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होगा।
क्या चुनाव से पहले बनेगा नया राजनीतिक समीकरण?
पश्चिम बंगाल में TMC, CPI(M) और कांग्रेस का मतदाता सूची के मुद्दे पर एक साथ आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। तीनों दलों के बीच राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रतिस्पर्धा रही है, लेकिन इस बार उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी एक साझा मांग के लिए संयुक्त ज्ञापन दिया है।
इस घटनाक्रम के बीच यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या निकाय चुनावों में इन दलों के बीच किसी तरह का राजनीतिक तालमेल बनेगा। फिलहाल, केवल संयुक्त ज्ञापन के आधार पर किसी गठबंधन या सीटों के समझौते का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि राज्य चुनाव आयोग इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और मतदाता सूची से जुड़ी लंबित अपीलों के निपटारे में कितनी प्रगति होती है। 12 नवंबर को प्रारूप मतदाता सूची और 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची जारी होने की निर्धारित समयसीमा के बीच आयोग का फैसला निकाय चुनावों की आगे की प्रक्रिया के लिए अहम हो सकता है।

