पटना: बिहार के पहले मुख्यमंत्री और ‘बिहार केसरी’ डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर पटना में आयोजित कार्यक्रम कांग्रेस के राजनीतिक तेवरों का मंच बन गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए आगामी चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराने की मांग रखी।
खरगे ने अपने संबोधन में भाजपा की सरकारों के गठन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के जिन हिस्सों में भाजपा सत्ता में है, वहां सरकारें चोरी से बनी हैं। यह टिप्पणी उन्होंने व्यापक राजनीतिक संदर्भ में की और इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान के बाद कार्यक्रम में पार्टी का भाजपा विरोधी राजनीतिक संदेश साफ तौर पर नजर आया।
ईवीएम पर उठाया सवाल, बैलेट पेपर की वकालत
कांग्रेस अध्यक्ष ने ईवीएम से मतदान कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराया जाना चाहिए। उनका तर्क चुनाव प्रक्रिया को लेकर भरोसे से जुड़ा था। हालांकि, कार्यक्रम में उनके संबोधन के दौरान ईवीएम को लेकर किसी तकनीकी प्रमाण या किसी विशेष चुनाव में गड़बड़ी का विस्तृत उदाहरण सामने नहीं रखा गया। उन्होंने अपनी राजनीतिक आपत्ति के आधार पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई।
खरगे के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस लंबे समय से जारी है। कांग्रेस कई मौकों पर चुनावी पारदर्शिता और मतदान व्यवस्था को लेकर सवाल उठाती रही है। पटना के इस कार्यक्रम में भी पार्टी अध्यक्ष ने इसी मुद्दे को अपने भाषण का प्रमुख हिस्सा बनाया।

श्रीकृष्ण सिंह की जयंती से राजनीतिक संदेश
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 149वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह का मूल उद्देश्य बिहार के पहले मुख्यमंत्री के योगदान को याद करना था। लेकिन कार्यक्रम में खरगे के भाषण ने इसे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़ दिया। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस की वैचारिक और राजनीतिक स्थिति को सामने रखा।
कांग्रेस के लिए श्रीबाबू की जयंती का आयोजन बिहार में अपने राजनीतिक आधार और विरासत को रेखांकित करने का अवसर भी रहा। पार्टी ने समारोह के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि स्वतंत्रता आंदोलन और बिहार के शुरुआती राजनीतिक निर्माण से जुड़ी अपनी विरासत को वह मौजूदा राजनीति के संदर्भ में भी सामने रखेगी। खरगे के संबोधन में भाजपा पर हमला इसी व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा रहा।
बिहार में कांग्रेस के तेवर हुए मुखर
पटना में दिए गए बयान से यह संकेत भी मिला कि कांग्रेस बिहार की राजनीति में अपने मुद्दों को अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है। खरगे ने एक ओर भाजपा की सरकारों पर आरोप लगाए, तो दूसरी ओर चुनाव सुधार और मतदान की प्रक्रिया को लेकर पार्टी की मांग को दोहराया। इससे कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी के राजनीतिक रुख को लेकर स्पष्ट संदेश गया।
ईवीएम और बैलेट पेपर का मुद्दा भारतीय चुनावी राजनीति में बेहद संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान एक बार फिर इस बहस को राजनीतिक मंच पर ले आया है। दूसरी तरफ भाजपा की ओर से इस तरह के आरोपों पर पहले भी आपत्तियां जताई जाती रही हैं। फिलहाल पटना के श्रीबाबू जयंती समारोह में खरगे के बयान ने बिहार की सियासत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई राजनीतिक चर्चा को जरूर हवा दे दी है।

