भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना देश के लाखों युवाओं का सपना है, लेकिन महाराष्ट्र के वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे अपने बच्चों को इस करियर को चुनने की सलाह नहीं देना चाहते। India Today की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे ने कहा कि वे अपने बच्चों को उद्यमी या ऐसे सार्वजनिक नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे बढ़ते देखना चाहेंगे, जो समाज के लिए काम करने में अधिक स्वतंत्रता महसूस करें। उनके इस विचार के पीछे 21 साल की सेवा के दौरान बार-बार हुए तबादलों और परिवार पर पड़े असर की कहानी है।
21 साल में करीब 25 तबादले
मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके करीब 21 साल के करियर में लगभग 25 बार तबादला हुआ। प्रशासनिक सेवा में अलग-अलग पदों और स्थानों पर काम करना जिम्मेदारी का हिस्सा हो सकता है, लेकिन बार-बार शहर बदलने से अधिकारी के परिवार को भी नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।
मुंढे के अनुभव का सबसे उल्लेखनीय पहलू उनके बेटे की पढ़ाई से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके बेटे को पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले छह बार स्कूल बदलना पड़ा। हर बार नए स्कूल, नए शिक्षकों और सहपाठियों के बीच तालमेल बैठाना बच्चे के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बार-बार स्थान बदलने से दोस्ती, पढ़ाई की निरंतरता और परिवार की दिनचर्या पर भी असर पड़ सकता है।
बच्चों के लिए क्यों अलग करियर चाहते हैं?
मुंढे की टिप्पणी को सार्वजनिक सेवा के विरोध के रूप में देखना सही नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार, वह चाहते हैं कि उनके बच्चे समाज में योगदान देने के लिए केवल पारंपरिक सरकारी करियर तक सीमित न रहें। उद्यमिता या सार्वजनिक नेतृत्व जैसे विकल्प उन्हें अपने विचारों और पहलों को अधिक स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ाने का अवसर दे सकते हैं।

यह दृष्टिकोण एक ऐसे अधिकारी का निजी अनुभव सामने लाता है, जिसका पेशा सार्वजनिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक अधिकार से जुड़ा है, लेकिन जिसके पारिवारिक जीवन पर भी पदस्थापन और तबादलों का असर पड़ा। किसी करियर की प्रतिष्ठा और स्थिरता के साथ उसके व्यक्तिगत तथा पारिवारिक पहलुओं पर विचार करना भी करियर चयन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कौन हैं IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे?
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने राज्य में नगर प्रशासन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों सहित विभिन्न पदों पर काम किया है। मई 2026 में उन्होंने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पद संभाला। इस विभाग की जिम्मेदारियों में खाद्य सुरक्षा और दवाओं से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
उनकी सख्त कार्यशैली और बार-बार हुए तबादलों ने उन्हें महाराष्ट्र के प्रशासनिक परिदृश्य में चर्चित बनाया है। इस बार उनका बयान सरकारी सेवा की उपलब्धियों के बजाय उस निजी कीमत पर ध्यान दिलाता है, जिसे कभी-कभी परिवार को चुकाना पड़ता है।
UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए क्या संदेश?
मुंढे के विचार हर अभ्यर्थी के लिए एक ही निष्कर्ष तय नहीं करते। IAS या अन्य सिविल सेवाओं में करियर चुनने के पीछे सार्वजनिक हित में काम करने, नीतियों को लागू करने और प्रशासनिक बदलाव लाने जैसी प्रेरणाएं हो सकती हैं। वहीं, इस पेशे में स्थानांतरण, जिम्मेदारियों का दबाव और परिवार से जुड़ी चुनौतियां भी हो सकती हैं।

UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उपयोगी सीख यह है कि करियर का निर्णय केवल प्रतिष्ठा, सामाजिक अपेक्षा या नौकरी की सुरक्षा के आधार पर न लिया जाए। अपनी रुचि, काम करने की शैली, स्थानांतरण के प्रति तैयारी, परिवार की परिस्थितियों और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर भी विचार करना चाहिए। उद्यमिता, सामाजिक क्षेत्र, सार्वजनिक नीति, शोध और अन्य पेशे भी समाज में योगदान देने के रास्ते हैं।
तुकाराम मुंढे की टिप्पणी एक व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित करियर सलाह है, सभी सिविल सेवकों या उनके परिवारों के अनुभव का सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं। फिर भी यह याद दिलाती है कि किसी पेशे की सफलता का आकलन करते समय उसके सार्वजनिक प्रभाव के साथ-साथ निजी जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना भी जरूरी है।
