नई दिल्ली: इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) में घोड़ों के पासपोर्ट जारी करने में देरी को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रभावित राइडर्स का कहना है कि दस्तावेजों के लंबित रहने से उन्हें और जूनियर खिलाड़ियों को राष्ट्रीय क्वालिफायर में हिस्सा लेने का मौका गंवाने का खतरा है। दूसरी ओर, EFI की तदर्थ समिति का कहना है कि कुछ घोड़ों के आयात से जुड़े दस्तावेजों और अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) पर सवाल हैं, इसलिए जांच पूरी किए बिना पासपोर्ट जारी करना उचित नहीं होगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 50 से 60 घोड़ों के पासपोर्ट आवेदन करीब तीन महीने से लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें विदेश से आयात किए गए घोड़े और भारत में जन्मे घोड़े दोनों शामिल हैं। यह संख्या और लंबित मामलों की स्थिति संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित है; सभी आवेदनों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्रीय क्वालिफायर से पहले खिलाड़ियों की चिंता
वरिष्ठ भारतीय राइडर आशीष लिमये सहित प्रभावित खिलाड़ियों का कहना है कि पहले कुछ घोड़ों को पासपोर्ट आवेदन लंबित रहने के बावजूद अस्थायी रूप से प्रतियोगिता में भाग लेने देने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, बाद में यह व्यवस्था वापस ले ली गई, जिससे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रवेश को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई।
राइडर्स का तर्क है कि यदि आवेदन बाद में मंजूर भी हो जाते हैं, तो प्रतियोगिता छूट जाने पर खिलाड़ियों को क्वालिफिकेशन का अवसर वापस नहीं मिलेगा। खासकर जूनियर खिलाड़ियों के लिए यह नुकसान महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी उनके खेल-विकास और आगे चयन की संभावनाओं से जुड़ी होती है।

खिलाड़ियों का कहना है कि वे दस्तावेजों की जांच रोकने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि जांच पूरी होने तक सशर्त या अस्थायी प्रवेश की अनुमति चाहते हैं। उनका सुझाव है कि यदि किसी घोड़े के दस्तावेज बाद में अमान्य पाए जाएं, तो संबंधित प्रवेश रद्द किया जा सकता है।
EFI समिति ने क्या दलील दी?
EFI तदर्थ समिति के प्रशासन सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) संदीप दीवान ने कथित अनियमितताओं की जांच को पासपोर्ट रोके जाने का कारण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने कुछ आयात NOC जारी किए जाने के अधिकार, आयात लाइसेंस के इस्तेमाल और घोड़ों के स्वामित्व से जुड़े सवाल उठाए हैं।
समिति की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ NOC पूर्व अधिकारियों द्वारा उचित प्राधिकरण के बिना जारी किए गए हो सकते हैं और कुछ आयात लाइसेंस के हस्तांतरण या व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच जरूरी है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पूर्व अधिकारियों या घोड़ा मालिकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
समिति का पक्ष है कि यदि दस्तावेजों की वैधता स्पष्ट किए बिना पासपोर्ट जारी किए गए, तो इससे जांच और नियामकीय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उसने मामले को संबंधित सरकारी अधिकारियों के संज्ञान में ले जाने की बात भी कही है।

राइडर्स का दावा: दस्तावेज जमा, लेकिन जवाब नहीं
आशीष लिमये ने मीडिया से कहा कि प्रभावित आवेदकों ने शपथपत्र, EFI से प्राप्त NOC, आयात लाइसेंस, क्वारंटीन प्रमाणपत्र और सीमा शुल्क भुगतान के प्रमाण सहित दस्तावेज जमा किए हैं। उनका आरोप है कि कई बार दस्तावेज भेजने के बावजूद स्पष्ट जवाब या पासपोर्ट जारी करने की समयसीमा नहीं मिली।
यह पक्ष समिति की उस दलील से अलग है कि कुछ मामलों में आयात लाइसेंस के इस्तेमाल और स्वामित्व से जुड़े सवालों का पर्याप्त समाधान नहीं हुआ है। विवाद के निष्पक्ष समाधान के लिए संबंधित आवेदन, पत्राचार और मूल दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। खिलाड़ियों ने यह भी मांग की है कि जिन दस्तावेजों पर आपत्ति है, उन्हें लिखित रूप में स्पष्ट किया जाए ताकि आवेदक कमियों को दूर कर सकें।
EFI ने पासपोर्ट आवेदनों पर सुनवाई का नोटिस जारी किया
EFI की आधिकारिक वेबसाइट पर 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय क्वालिफायर 2026 के लिए पासपोर्ट आवेदन करने वालों की सुनवाई निर्धारित करने संबंधी नोटिस प्रकाशित हुआ। यह घटनाक्रम बताता है कि लंबित आवेदनों से जुड़ा मामला औपचारिक प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, सुनवाई का नोटिस अपने-आप में यह पुष्टि नहीं करता कि सभी पासपोर्ट जारी हो गए हैं या सभी खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में प्रवेश मिल गया है।
भारतीय घुड़सवारी खेल पर व्यापक असर
घुड़सवारी खेल में खिलाड़ी और घोड़ा एक प्रतिस्पर्धी जोड़ी के रूप में हिस्सा लेते हैं। घोड़े की पहचान, स्वामित्व, आयात और स्वास्थ्य से जुड़े दस्तावेज प्रतियोगिता प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, प्रशासनिक देरी से खिलाड़ियों की तैयारी और प्रतियोगिता में भाग लेने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए दस्तावेजों की जांच और खिलाड़ियों को समय पर स्पष्ट सूचना देना—दोनों जरूरी हैं।

यह विवाद EFI के व्यापक प्रशासनिक और चुनावी सवालों के बीच सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी निकाय FEI की ओर से EFI के शासन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अलग चिंता भी जताई गई है। हालांकि, घोड़ों के पासपोर्ट से जुड़ा मौजूदा विवाद और प्रशासनिक शासन का मुद्दा अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें एक ही मामला नहीं समझना चाहिए।
अब आगे क्या?
फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि संबंधित अधिकारियों की जांच कितनी जल्दी पूरी होती है, आवेदकों को आपत्तियों की स्पष्ट जानकारी कब मिलती है और राष्ट्रीय क्वालिफायर में भागीदारी को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है। प्रभावित राइडर्स अस्थायी प्रवेश या समयबद्ध समाधान चाहते हैं, जबकि समिति दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही निकाला जा सकेगा। तब तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखना और खिलाड़ियों के अवसरों के साथ-साथ खेल प्रशासन की जवाबदेही पर भी ध्यान देना जरूरी है।
