Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 22 अक्टूबर 1998: अजीत – ‘मोना डार्लिंग’ से अमर हुए हिंदी सिनेमा के खलनायक
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - मनोरंजन - 22 अक्टूबर 1998: अजीत – ‘मोना डार्लिंग’ से अमर हुए हिंदी सिनेमा के खलनायक

22 अक्टूबर 1998: अजीत – ‘मोना डार्लिंग’ से अमर हुए हिंदी सिनेमा के खलनायक

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 22, 2026 1:14 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 सप्ताह पहले
अजीत - ‘मोना डार्लिंग’
साझा करें

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे हैं जिनकी पहचान केवल उनके निभाए किरदारों से नहीं, बल्कि उनके बोलने के अंदाज़, ठहराव और यादगार संवादों से बनती है। अभिनेता अजीत—जिनका वास्तविक नाम हामिद अली खान था—ऐसे ही कलाकार थे। पर्दे पर वे अक्सर सलीकेदार, शांत और आत्मविश्वासी खलनायक के रूप में दिखाई दिए। ‘मोना डार्लिंग’ जैसे संवादों ने उनकी अलग पहचान बनाई, जो आज भी लोकप्रिय संस्कृति में याद किए जाते हैं।

पुण्यतिथि की तारीख: 22 अक्टूबर 1998

अजीत का निधन 22 अक्टूबर 1998 को हैदराबाद में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। कुछ जगहों पर उनकी पुण्यतिथि की तारीख को लेकर भ्रम दिखाई देता है, लेकिन समकालीन समाचार रिपोर्टों और प्रकाशित जीवन-वृत्तों में 22 अक्टूबर की तारीख दर्ज है। उनका जन्म 27 जनवरी 1922 को हुआ था।

हामिद अली खान से अभिनेता अजीत तक

हैदराबाद में जन्मे हामिद अली खान अभिनय की दुनिया में अपना स्थान बनाने के लिए मुंबई पहुँचे। शुरुआती दौर में उन्होंने फिल्मों में नायक और सहायक भूमिकाएँ निभाईं। ‘नया दौर’, ‘मुगल-ए-आज़म’, ‘नास्तिक’ और ‘मिलन’ जैसी फिल्मों में उनके काम ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई। आगे चलकर उन्होंने खलनायक की भूमिकाओं में अपनी विशिष्ट शैली विकसित की और इसी रूप में व्यापक लोकप्रियता हासिल की।

खलनायकी का अलग अंदाज़

1970 के दशक में अजीत ने हिंदी फिल्मों के खलनायक की छवि को एक खास अंदाज़ दिया। उनके किरदार अक्सर महँगे सूट, करीने से सँवारे बाल, विशिष्ट मूँछों और संयत हावभाव के साथ दिखाई देते थे। वे ऊँची आवाज़ या लगातार गुस्से के बजाय धीमी, ठहरी हुई और प्रभावशाली संवाद-अदायगी से पर्दे पर दबदबा बनाते थे। इस शैली ने उनके खलनायकों को दूसरे किरदारों से अलग पहचान दी।

Dinman Times ads 728-90

प्रकाश मेहरा की ‘जंजीर’ (1973) में तेजा की भूमिका उनके करियर का एक निर्णायक पड़ाव बनी। इसके बाद ‘यादों की बारात’ और ‘कालिचरण’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों तथा संवादों ने लोकप्रिय संस्कृति में जगह बनाई। ‘मोना डार्लिंग’, ‘लिली डोंट बी सिली’ और ‘सारा शहर मुझे लायन के नाम से जानता है’ जैसे संवाद उनके पर्दे के व्यक्तित्व से जुड़ गए।

ये भी पढ़े

‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ के निर्देशक संजय गुप्ता का निधन, 59 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
31 अक्टूबर 1926: हैरी हुडिनी का निधन—दुनिया के महान जादूगर और एस्केप आर्टिस्ट
अभय सिन्हा को प्रसून जोशी की अध्यक्षता वाली फिल्म समिति में जगह
30 अक्टूबर 1974: बेगम अख्तर का निधन और गजल गायकी की अमर विरासत

दो सौ से अधिक फिल्मों की विरासत

अपने लंबे फिल्मी सफर में अजीत ने सौ से अधिक, और कई जीवन-वृत्तों के अनुसार दो सौ से भी अधिक फिल्मों में काम किया। वे केवल खलनायक के रूप में ही नहीं, बल्कि शुरुआती दौर की नायक और चरित्र भूमिकाओं के लिए भी याद किए जाते हैं। अमिताभ बच्चन सहित कई प्रमुख कलाकारों के साथ उनकी स्क्रीन-उपस्थिति ने हिंदी सिनेमा के एक महत्वपूर्ण दौर को आकार दिया।

अजीत के लोकप्रिय संवादों की नकल, उन पर बने हास्य-संदर्भ और उनके किरदारों की शैली इस बात का संकेत हैं कि उनका प्रभाव फिल्मों की कहानी तक सीमित नहीं रहा। उनका अभिनय यह भी दिखाता है कि किसी खलनायक को यादगार बनाने के लिए केवल भय या हिंसा नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, लय, आवाज़ और संवादों का अपना महत्व होता है।

यादों में जीवित एक विशिष्ट कलाकार

अजीत का निधन 22 अक्टूबर 1998 को हुआ, लेकिन उनका फिल्मी व्यक्तित्व आज भी दर्शकों की स्मृति में बना हुआ है। ‘मोना डार्लिंग’ केवल एक संवाद नहीं, बल्कि उनके विशिष्ट अंदाज़ का प्रतीक बन गया। हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में अजीत का नाम हमेशा लिया जाएगा जिन्होंने खलनायक की भूमिका को अपनी शैली, संयम और संवाद-अदायगी से यादगार बनाया।

Dinman Times ads 728-90
TAGGED:Bollywood CelebritiesBollywood NewsEntertainment News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर महाराणा राजसिंह 22 अक्टूबर 1680: महाराणा राजसिंह प्रथम – मेवाड़ के स्वाभिमानी शासक
अगली ख़बर कादर खान 22 अक्टूबर 1937: कादर खान – अभिनय और संवाद लेखन के दिग्गज
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

पावापुरी महोत्सव 7 नवंबर से, तैयारियां तेज

पावापुरी में 7 नवंबर से सजेगा आस्था और संस्कृति का संगम, महोत्सव की तैयारियां तेज

कांगो में इबोला से 5,000 मौतें, प्रकोप गंभीर

कांगो में इबोला से 5,000 से ज्यादा मौतें, इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप

बक्सा की बाघिन का सिग्नल मिला, असम से वापसी की कोशिश

बक्सा की बाघिन का 32 घंटे बाद मिला रेडियो-कॉलर सिग्नल, असम से सुरक्षित वापसी की तैयारी

वंतारा में वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन, 127 संस्थान शामिल

जामनगर के वंतारा में वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन, 30 देशों के 127 संस्थानों ने लिया हिस्सा

ISRO का NVS-03 लॉन्च, NavIC को मिलेगी मजबूती

जीएसएलवी-F18 ने NVS-03 को कक्षा में पहुंचाया, NavIC को मिलेगी नई मजबूती

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • पटना

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?