अररिया: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्षता और ईमानदारी से काम नहीं करतीं, तो लोगों का सड़क पर उतरकर विरोध करना स्वाभाविक है। अररिया में जन संवाद के दौरान उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
प्रशांत किशोर ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए फैसलों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थाओं से निष्पक्ष तरीके से काम करने की अपेक्षा की जाती है।
चुनाव आयोग को लेकर प्रशांत किशोर की ये टिप्पणियां उनके उन बयानों के बीच आई हैं, जिनमें वह मतदाता सूची, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और आदर्श आचार संहिता लागू करने जैसे मुद्दों पर सवाल उठा चुके हैं। ये आरोप और आपत्तियां प्रशांत किशोर की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें आयोग के खिलाफ किसी स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मतदान की तारीख को लेकर भी उठाया मुद्दा
प्रशांत किशोर ने मतदान की तारीख रविवार के बजाय शुक्रवार रखे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े फैसलों को लेकर मतदाताओं के मन में उठने वाली शंकाओं का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनके अनुसार, चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना जरूरी है।

10 हजार युवाओं को निजी नौकरी दिलाने की योजना
अररिया में बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने 10 हजार बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की योजना पर काम करने की बात भी कही। उन्होंने इसे युवाओं के रोजगार से जुड़ा प्रयास बताया। इस योजना के क्रियान्वयन, पात्रता और समय-सीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने पर ही इसकी रूपरेखा स्पष्ट हो सकेगी।
चुनावी पारदर्शिता पर जारी बहस
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर देश में राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है, जबकि आयोग की निष्पक्षता से जुड़े आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने तर्क हैं। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया, समय पर जवाब और शिकायतों के निपटारे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसे और जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उपलब्ध रिपोर्ट में इस बयान पर आयोग की कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
