PMCH News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया नवनिर्मित टावर-3 का उद्घाटन, पीडियाट्रिक ICU से लेकर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तक आधुनिक सुविधाओं का लिया जायजा; RBSK के तहत 66 बच्चों की सफल सर्जरी
पटना, 12 अक्टूबर। बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के पुनर्विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अस्पताल की पुनर्विकास योजना के पहले चरण के अंतर्गत नवनिर्मित टावर-3 का उद्घाटन किया। इस टावर के शुरू होने से अस्पताल में 536 बेड की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध हुई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पीएमसीएच में अब एक साथ 2,500 बेड पर मरीजों का आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ इलाज किया जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव भी मौजूद रहे।
पीएमसीएच के टावर-3 का उद्घाटन केवल एक नए अस्पताल भवन के शुरू होने तक सीमित नहीं है। बिहार में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव, गंभीर मरीजों के उपचार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। हालांकि, अस्पताल की वास्तविक क्षमता का लाभ मरीजों को तभी मिल सकेगा, जब नए बेड के साथ पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, तकनीकी कर्मचारी, दवाएं और सुचारु जांच एवं उपचार सेवाएं भी सुनिश्चित होंगी।
536 नए बेड से बढ़ेगी इलाज की क्षमता, मरीजों को क्या होगा फायदा?
पीएमसीएच बिहार के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां पटना के अलावा राज्य के विभिन्न जिलों से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की बेड क्षमता बढ़ने से भर्ती मरीजों के लिए जगह उपलब्ध कराने, गंभीर रोगियों को समय पर उपचार देने और विभिन्न विभागों में इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, टावर-3 के शुरू होने से 536 बेड की सुविधा का विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान बताया कि पीएमसीएच में अब 2,500 बेड पर मरीजों का उपचार किया जा सकेगा। यह विस्तार अस्पताल की पुनर्विकास योजना के पहले चरण का हिस्सा है।
हालांकि, बेड की संख्या बढ़ना और मरीजों को बेहतर इलाज मिलना दो अलग-अलग पहलू हैं। अस्पताल की क्षमता का आकलन इस आधार पर भी होगा कि मरीजों को कितनी जल्दी बेड मिलता है, जांच में कितना समय लगता है, ऑपरेशन कितनी आसानी से हो पाते हैं और छुट्टी मिलने तक उपचार की प्रक्रिया कितनी सुचारु रहती है।

पीडियाट्रिक ICU, प्रसूति ICU और मॉड्यूलर OT का निरीक्षण
उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने टावर-3 के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने पांचवें तल पर स्थित पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) का फीता काटकर उद्घाटन किया। यह बच्चों के गंभीर रोगों के उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधा है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रतीक्षालय, स्त्री रोग एवं प्रसूति आईसीयू, नर्स स्टेशन, चिकित्सा एवं उपचार कक्ष तथा प्रसवोत्तर वार्ड का जायजा लिया। इन सुविधाओं का महत्व खास तौर पर गर्भवती महिलाओं, प्रसव के बाद देखभाल की जरूरत वाली माताओं और गंभीर स्थिति में भर्ती मरीजों के लिए है।

मुख्यमंत्री ने छठे तल पर स्थित मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT)-22 समेत विभिन्न शल्य चिकित्सा कक्षों का निरीक्षण किया। प्रथम तल पर स्थित रेडियोलॉजी विभाग में उपलब्ध जांच सुविधाओं की भी जानकारी ली।
आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और रेडियोलॉजी सुविधाएं किसी बड़े अस्पताल की उपचार व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इनका बेहतर संचालन होने पर सर्जरी की तैयारी, बीमारी की पहचान और उपचार संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है। लेकिन इन सुविधाओं का पूरा लाभ लेने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन, उपकरणों का नियमित रखरखाव और विभागों के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी है।
ओपीडी पंजीकरण से लेकर मरीजों के परिजनों की सुविधा पर जोर
मुख्यमंत्री को टावर-3 के भूतल पर कियोस्क और काउंटर के माध्यम से ओपीडी मरीजों के पंजीकरण की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, अल्पाहार गृह सहित मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की परेशानी केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं रहती। पंजीकरण के लिए लंबी कतारें, सही विभाग तक पहुंचने में कठिनाई, जांच में देरी और परिजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे में डिजिटल कियोस्क और सुव्यवस्थित काउंटर जैसी व्यवस्थाओं की उपयोगिता इस बात से तय होगी कि उनका संचालन कितना आसान है और जरूरतमंद मरीजों को कितनी जल्दी सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल के सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि मरीजों के उपचार की व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने चिकित्सा उपकरणों और अन्य सुविधाओं के बेहतर रखरखाव, अस्पताल की व्यवस्थाओं के नियमित निरीक्षण तथा समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पुनर्विकास योजना के शेष निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं। इसका अर्थ है कि नए भवन के संचालन के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता, साफ-सफाई, उपकरणों की उपलब्धता और दैनिक प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा।

RBSK के तहत 66 बच्चों की सफल सर्जरी, मुख्यमंत्री ने बांटी पोषण किट
पीएमसीएच के टावर-3 के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत उपचार करा रहे जन्मजात विकृतियों से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों का हालचाल जाना और उनके बीच पोषण किट वितरित की।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आरबीएसके के तहत कटे होंठ, कटे तालु और टंग टाई से पीड़ित बच्चों की सर्जरी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में पीएमसीएच समेत बिहार के 12 चिकित्सा संस्थान शामिल हैं।

विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 66 बच्चों की सफल सर्जरी की गई है। इनमें 38 बच्चे कटे होंठ, 20 कटे तालु, तीन कटे होंठ एवं तालु दोनों की समस्या और पांच बच्चे टंग टाई से पीड़ित थे।
कटे होंठ और कटे तालु जैसी जन्मजात स्थितियां बच्चे के भोजन करने, बोलने और सामान्य विकास को प्रभावित कर सकती हैं। समय पर पहचान और उचित सर्जरी से बच्चों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, टंग टाई की स्थिति में जीभ की गति प्रभावित हो सकती है, हालांकि प्रत्येक मामले में उपचार की आवश्यकता का निर्धारण चिकित्सकीय आकलन के आधार पर किया जाता है।
इस अभियान का महत्व इसलिए भी है कि जन्मजात विकृतियों के उपचार में आर्थिक स्थिति, विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच और समय पर पहचान बड़ी भूमिका निभाते हैं। सरकारी चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने से जरूरतमंद परिवारों को सहायता मिल सकती है। अभियान की आगे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र बच्चों की पहचान, सर्जरी के लिए रेफरल और उपचार के बाद फॉलो-अप कितनी प्रभावी तरीके से किया जाता है।
पीएमसीएच पुनर्विकास योजना के सामने क्या हैं प्रमुख चुनौतियां ?
टावर-3 के उद्घाटन के साथ पीएमसीएच में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में प्रगति हुई है। लेकिन किसी बड़े अस्पताल को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए भवन और बेड के अलावा कई स्तरों पर तैयारी की जरूरत होती है।


पहली चुनौती पर्याप्त डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता है। यदि बेड की संख्या बढ़ती है, लेकिन उसके अनुपात में कर्मचारी नहीं बढ़ते, तो मरीजों की देखभाल और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
दूसरी चुनौती उपकरणों के नियमित रखरखाव और जांच सुविधाओं के निर्बाध संचालन की है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता तभी उपयोगी होगी, जब वे जरूरत के समय चालू रहें और उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद हों।
तीसरी चुनौती मरीजों के अस्पताल पहुंचने से लेकर उपचार पूरा होने तक की प्रक्रिया को सरल बनाना है। ओपीडी पंजीकरण, जांच, भर्ती, ऑपरेशन, दवा वितरण और छुट्टी की व्यवस्था में समन्वय मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
इसके साथ ही अस्पताल में साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, पेयजल, शौचालय, प्रतीक्षालय और परिजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर लगातार निगरानी जरूरी होगी। मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को मरीजों और उनके परिजनों को किसी तरह की असुविधा नहीं होने देने का निर्देश दिया है।

उद्घाटन समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने मुख्यमंत्री का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर किया।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया और संजय कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन तथा पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह समेत कई वरीय पदाधिकारी और चिकित्सक उपस्थित रहे।
अब कसौटी पर होगी मरीजों को मिलने वाली सुविधा
पीएमसीएच टावर-3 का उद्घाटन बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में आधारभूत संरचना के विस्तार का महत्वपूर्ण पड़ाव है। 536 नए बेड, पीडियाट्रिक आईसीयू, प्रसूति संबंधी सुविधाएं, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और रेडियोलॉजी विभाग का विस्तार अस्पताल की उपचार क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उपयोगी कदम हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन सुविधाओं का लाभ आम मरीजों तक कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंचता है। अस्पताल में बेड की उपलब्धता के साथ समय पर जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा, आवश्यक दवाएं, साफ-सफाई और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी उतने ही जरूरी हैं।

पीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी अस्पताल की सफलता का वास्तविक पैमाना उसकी इमारत की ऊंचाई या बेड की संख्या भर नहीं, बल्कि यह होगा कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिले, गरीब परिवारों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिले और हर मरीज को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा उपलब्ध हो। टावर-3 का उद्घाटन इस दिशा में एक अहम शुरुआत है; अब इसके प्रभावी संचालन और नियमित निगरानी से ही इसका वास्तविक लाभ सामने आएगा।
