कटिहार/कुरसेला: गरीबी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच बेहतर जिंदगी का सपना लेकर घर से दूर कमाने गया 19 वर्षीय सोनू कुमार अब कभी वापस नहीं लौटेगा। हैदराबाद में निर्माणाधीन मकान में काम करने के दौरान हुए हादसे में उसकी मौत हो गई।
सोमवार को जब सोनू का शव उसके पैतृक गांव नवटोलिया, उत्तरी मुरादपुर पंचायत पहुंचा, तो पूरे गांव में मातम पसर गया। एंबुलेंस से बेटे का शव उतरते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
सोनू की मौत सिर्फ एक परिवार के लिए जवान बेटे को खोने का दुख नहीं है, बल्कि उस परिवार की आर्थिक उम्मीदों पर भी बड़ा आघात है। लंबे समय से बीमार पिता, दिव्यांग छोटा भाई और शादी की उम्र में पहुंच चुकी बड़ी बहन की जिम्मेदारियों के बीच सोनू परिवार के लिए कमाई का बड़ा सहारा बन गया था।
ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और इसी वजह से सोनू कम उम्र में ही मजदूरी के लिए हैदराबाद चला गया था।

घर की मजबूरी ने कम उम्र में बना दिया जिम्मेदार
सोनू के परिवार की परिस्थितियां आसान नहीं थीं। उसके पिता उमेश मंडल लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के कारण उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।
घर में एक छोटा भाई दिव्यांग है। वहीं बड़ी बहन की शादी की जिम्मेदारी भी परिवार के सामने थी। ऐसे हालात में सोनू ने अपनी उम्र की परवाह किए बिना परिवार की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर उठाने का फैसला किया।
कम उम्र में ही मजदूरी करने के लिए हैदराबाद जाना उसके लिए शौक नहीं, बल्कि परिवार की जरूरत थी। वह घर से दूर रहकर मेहनत कर रहा था ताकि बीमार पिता का सहारा बन सके, भाई की मदद कर सके और बहन की शादी में परिवार का हाथ बंटा सके।
लेकिन जिस कमाई से परिवार के भविष्य को संवारने की उम्मीद थी, उसी परदेस में एक हादसे ने सोनू की जिंदगी छीन ली।

निर्माणाधीन मकान में अचानक गिर गईं ईंटें
हैदराबाद में सोनू एक निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर रहा था। काम के दौरान अचानक ऊपर से ईंटों का मलबा उसके ऊपर गिर गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
साथ काम कर रहे लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही सोनू की सांसें थम गईं।
हादसे की सूचना जब उसके परिवार तक पहुंची तो घर में मातम छा गया। जिस बेटे के सहारे परिवार भविष्य की उम्मीद लगाए बैठा था, उसकी मौत की खबर ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया।
घटना एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| मृतक | सोनू कुमार |
| उम्र | 19 वर्ष |
| पिता | उमेश मंडल |
| पैतृक गांव | नवटोलिया |
| पंचायत | उत्तरी मुरादपुर पंचायत |
| प्रखंड | कुरसेला, कटिहार |
| काम | हैदराबाद में निर्माण मजदूरी |
| हादसा | निर्माण के दौरान ईंटें गिरने से चोट |
| परिवार की स्थिति | बीमार पिता, दिव्यांग भाई और अविवाहित बहन |
शव गांव पहुंचा तो टूट गया परिवार
सोमवार को जब सोनू का शव उसके गांव पहुंचा तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा थे। एंबुलेंस से शव उतरते ही परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। माता-पिता, भाई और बहन की चीख-पुकार ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।

बीमार पिता उमेश मंडल के लिए बेटे की मौत का सदमा किसी पहाड़ से कम नहीं था। जिस बेटे से परिवार को भविष्य में आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद थी, वही अब निर्जीव शरीर बनकर घर लौटा।
सोनू का दिव्यांग छोटा भाई भी भाई की मौत से बेसुध नजर आया। परिवार के सदस्यों के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि जिस सोनू को कुछ समय पहले तक परिवार की चिंता करते और भविष्य के सपने देखते देखा था, अब वह हमेशा के लिए उनसे दूर हो चुका है।
परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट
सोनू की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल अब उसके परिवार के भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार ने अपना प्रमुख कमाऊ सदस्य खो दिया है। पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस परिवार पर अब रोजमर्रा के खर्च और भविष्य की जिम्मेदारियों का बोझ और बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पीड़ित परिवार की स्थिति को देखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी स्तर पर मदद जरूरी है।

सोनू की कहानी उन हजारों प्रवासी मजदूर परिवारों की तस्वीर भी सामने लाती है, जिनके युवा सदस्य गांव में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। उनके लिए परदेस सिर्फ रोजगार की जगह नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदों को जिंदा रखने का जरिया होता है।
सोनू भी इसी उम्मीद के साथ हैदराबाद गया था कि मेहनत करके वह अपने परिवार की मुश्किलें कम करेगा। मगर मजबूरी के मलबे में उसका वह सपना हमेशा के लिए दब गया।
