मुंगेर: मुंगेर सदर अस्पताल के एसएनसीयू (Special Newborn Care Unit) में भर्ती सात माह में जन्मी एक कमजोर नवजात की गुरुवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के प्रसव वार्ड और एसएनसीयू में हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और समझाकर स्थिति को शांत कराया।
21 सितंबर को अस्पताल में भर्ती हुई थी मां
जानकारी के अनुसार, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शिवगंज निवासी गौतम सिंह की पत्नी अंजना कुमारी को प्रसव पीड़ा के बाद 21 सितंबर को मुंगेर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने सिजेरियन ऑपरेशन के बाद बच्ची का जन्म कराया।
नर्सिंग स्टाफ के अनुसार, बच्ची का जन्म गर्भावस्था के सातवें महीने में हुआ था और वह काफी कमजोर थी। जन्म के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए उसे विशेष नवजात देखभाल इकाई यानी एसएनसीयू में भर्ती किया गया था।
उपचार के दौरान बच्ची ने तोड़ा दम
बताया गया कि 24 सितंबर की सुबह उपचार के दौरान नवजात की मौत हो गई। बच्ची की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज को लेकर सवाल उठाए और चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों के अनुसार, अंजना कुमारी की पहले से दो बेटियां और एक बेटा है। यह उनका चौथा बच्चा था। नवजात की मौत के बाद परिवार में मातम का माहौल है।
रात में डॉक्टर ने किया था नवजात का इलाज
नर्सिंग स्टाफ के मुताबिक, रात की इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. पंकज सागर ने नवजात को देखा था। उस समय बच्ची की हालत गंभीर बताई गई थी। इसके बाद भी सुबह उसकी स्थिति बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन की तरफ से तत्काल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस के पहुंचने के बाद शांत हुआ हंगामा
बच्ची की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। सूचना मिलने पर 112 की टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और परिजन शव ले जाने के लिए तैयार हुए।
गौरतलब है कि मुंगेर सदर अस्पताल के एसएनसीयू में नवजातों की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग हाल में समीक्षा कर चुका है। 23 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन दिनों में दो नवजातों की मौत के बाद सिविल सर्जन ने एसएनसीयू की व्यवस्था और ड्यूटी रोस्टर की समीक्षा की थी।
फिलहाल इस मामले में इलाज में लापरवाही का आरोप परिजनों की ओर से लगाया गया है। इसकी पुष्टि जांच या किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।