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96 की उम्र में वॉरेन बफेट ने छोड़ा Berkshire Hathaway का चेयरमैन पद, बेटे Howard को सौंपी कमान

आभा शुक्ला
Last updated: सितम्बर 18, 2026 6:02 अपराह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 1 दिन पहले
Warren Buffett Berkshire Hathaway Chairman Emeritus 2026
Warren Buffett ने छोड़ा Berkshire Hathaway Chairman पद
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Warren BuffettP: जानिए कैसे एक बच्चे की शेयरों में दिलचस्पी ने बनाई दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कहानियों में से एक

ओमाहा के जादूगर’ की पूरी कहानी: 11 साल की उम्र में पहला शेयर, Benjamin Graham से सीखा निवेश का हुनर, 1965 में Berkshire Hathaway पर नियंत्रण और फिर दुनिया के सबसे चर्चित निवेशकों में शुमार हुए बफेट

ओमाहा: दुनिया के सबसे चर्चित निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफेट ने 96 साल की उम्र में Berkshire Hathaway के चेयरमैन पद से विदाई ले ली है। कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को उन्हें Chairman Emeritus बनाया है। हालांकि यह Berkshire Hathaway से उनका पूरी तरह अलग होना नहीं है।

बफेट कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बने रहेंगे और अपने अनुभव व सलाह से कंपनी को मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनके बेटे Howard G. Buffett को बोर्ड का नया चेयरमैन बनाया गया है। इससे पहले 2026 की शुरुआत में बफेट CEO पद छोड़ चुके थे और Greg Abel ने कंपनी की कमान संभाली थी।

लेकिन बफेट की आज की पहचान को समझने के लिए उनकी शुरुआत तक जाना जरूरी है। आखिर कैसे ओमाहा में जन्मा एक बच्चा दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में शामिल हुआ?

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कैसे उसने शेयर बाजार को सिर्फ खरीद-बिक्री का खेल नहीं, बल्कि अच्छे कारोबार में लंबे समय की हिस्सेदारी के रूप में देखा? और कैसे एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल कंपनी Berkshire Hathaway को उसने एक विशाल बिजनेस साम्राज्य में बदल दिया?

ओमाहा में जन्म और बचपन से ही पैसों में दिलचस्पी

वॉरेन एडवर्ड बफेट का जन्म 30 अगस्त 1930 को ओमाहा, नेब्रास्का में हुआ। उनके पिता Howard Buffett अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य और कारोबारी थे। बफेट का बचपन ऐसे दौर में बीता जब अमेरिका मंदी यानी Recession के आर्थिक असर से गुजर रहा था।

बहुत छोटी उम्र से ही बफेट को नंबरों, कारोबार और पैसे के गणित में असाधारण दिलचस्पी थी। उन्होंने कम उम्र में ही चीजें बेचकर पैसे कमाने के छोटे-छोटे प्रयोग शुरू कर दिए।

कोका-कोला की बोतलें, च्यूइंग गम और अखबार बेचने जैसे कामों ने उन्हें यह समझने का मौका दिया कि किसी उत्पाद को खरीदना, उसकी कीमत समझना और उसे मुनाफे पर बेचना कैसे काम करता है।

सबसे चर्चित बात यह है कि उन्होंने 11 साल की उम्र में अपना पहला शेयर खरीदा। 13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार टैक्स भी फाइल किया था। यानी जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे जेबखर्च की चिंता करते हैं, उस उम्र में बफेट पैसे और निवेश की दुनिया को समझने लगे थे।

Harvard ने नहीं लिया, Columbia ने बदल दी जिंदगी

स्कूल के बाद बफेट ने University of Nebraska से पढ़ाई की। इसके बाद उनकी नजर Columbia Business School पर गई। इसकी सबसे बड़ी वजह वहां पढ़ाने वाले महान निवेशक Benjamin Graham थे।

बफेट Graham की किताब The Intelligent Investor से बेहद प्रभावित थे। Columbia में उन्होंने Graham से निवेश की वह सोच सीखी जिसने आगे चलकर उनके पूरे करियर की नींव रखी।

बफेट का मानना बनने लगा कि किसी शेयर को सिर्फ इसलिए नहीं खरीदना चाहिए कि उसकी कीमत बढ़ सकती है। पहले यह देखना चाहिए कि कंपनी का असली कारोबार कितना मजबूत है और उसकी वास्तविक कीमत क्या है।

यही सोच आगे चलकर Value Investing के नाम से बफेट की पहचान बनी।

Columbia से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने Graham की कंपनी Graham-Newman Corp. में काम किया। यहां उन्हें वास्तविक निवेश विश्लेषण और कंपनियों की वित्तीय स्थिति को गहराई से समझने का मौका मिला।

1956 में शुरू की अपनी निवेश साझेदारी

1956 में बफेट ओमाहा लौटे और अपनी निवेश साझेदारी शुरू की। शुरुआत बहुत छोटी थी। उनके परिवार और करीबी लोगों ने उनके साथ पैसा लगाया और बफेट ने उस पूंजी को निवेश करना शुरू किया।

यहां उनकी सबसे बड़ी ताकत थी—धैर्य, अनुशासन और कंपनी के वास्तविक मूल्य को समझना।

बफेट शेयर बाजार में रोजाना की हलचल के पीछे भागने के बजाय ऐसे कारोबार खोजते थे जिन्हें वे लंबे समय तक रखना चाहते थे। उनकी सोच थी कि शेयर खरीदना किसी कंपनी के कारोबार में हिस्सेदारी खरीदना है।

उनकी यह साझेदारी 1969 में समाप्त हुई, लेकिन तब तक बफेट की निवेश शैली और उनकी प्रतिष्ठा काफी मजबूत हो चुकी थी।

1965: Berkshire Hathaway की कहानी शुरू

बफेट की सबसे बड़ी पहचान आखिरकार Berkshire Hathaway से बनी।

1960 के दशक में Berkshire Hathaway मुख्य रूप से एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल कंपनी थी। 1965 में बफेट की निवेश साझेदारी ने कंपनी पर नियंत्रण हासिल कर लिया। लेकिन बफेट ने जल्द ही समझ लिया कि टेक्सटाइल कारोबार में लंबे समय तक बेहतर रिटर्न हासिल करना मुश्किल है।

इसके बाद उन्होंने Berkshire को सिर्फ कपड़ा कंपनी बनाए रखने के बजाय पूंजी निवेश और अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी लेने वाली कंपनी में बदलना शुरू किया।

1967 में Berkshire ने National Indemnity Company खरीदी और यहीं से इंश्योरेंस कारोबार में उसकी महत्वपूर्ण एंट्री हुई। बाद में इंश्योरेंस से मिलने वाली पूंजी और ‘float’ ने Berkshire की निवेश क्षमता को और बढ़ाया।

यानी Berkshire की असली कहानी सिर्फ शेयर खरीदने की नहीं थी। बफेट ने एक कमजोर टेक्सटाइल कंपनी को धीरे-धीरे ऐसे diversified business में बदला जिसमें इंश्योरेंस, रेलवे, एनर्जी, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश जैसी अलग-अलग गतिविधियां शामिल होती गईं।

Charlie Munger के साथ बनी निवेश की सबसे बड़ी साझेदारी

बफेट की कहानी में Charlie Munger का नाम भी बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों की साझेदारी ने Berkshire के निवेश दर्शन को नई दिशा दी।

जहां शुरुआती दौर में बफेट Benjamin Graham की उस सोच से प्रभावित थे जिसमें कम कीमत पर उपलब्ध कंपनियों को खोजने पर जोर था, वहीं Munger ने उन्हें यह सोचने में मदद की कि कभी-कभी किसी शानदार कंपनी को उचित कीमत पर खरीदना, किसी कमजोर कंपनी को बहुत सस्ते में खरीदने से बेहतर हो सकता है।

Berkshire की सफलता में दोनों की पूंजी आवंटन क्षमता, धैर्य और लंबे समय की सोच की महत्वपूर्ण भूमिका रही। Munger 1978 से Berkshire के Vice Chairman रहे और 2023 में 99 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ।

Coca-Cola से लेकर American Express तक बड़े निवेश

बफेट के निवेश करियर में कई ऐसे फैसले रहे जिन्होंने उनकी पहचान मजबूत की।

American Express में उन्होंने उस समय निवेश किया जब कंपनी एक बड़े घोटाले के कारण संकट में थी। बफेट ने कंपनी के ब्रांड और कारोबार की मूल ताकत को देखा और गिरती कीमत को अवसर की तरह इस्तेमाल किया।

इसके बाद Coca-Cola Berkshire के सबसे चर्चित निवेशों में शामिल हुआ। Berkshire ने 1988-89 के दौरान Coca-Cola में बड़ी हिस्सेदारी बनाई। बफेट को कंपनी के मजबूत ब्रांड, वैश्विक पहुंच और लंबे समय तक कमाई करने की क्षमता पर भरोसा था। Berkshire की अपनी पुरानी रिपोर्टों में भी Coca-Cola निवेश और उसे लंबे समय तक रखने की रणनीति का विस्तार से उल्लेख मिलता है।

Berkshire ने GEICO, The Washington Post, See’s Candies, Nebraska Furniture Mart और कई अन्य कारोबारों में भी निवेश या अधिग्रहण किए।

बाद के वर्षों में Apple भी Berkshire के बड़े निवेशों में शामिल हुआ। इस तरह बफेट की निवेश यात्रा पारंपरिक कंपनियों से लेकर आधुनिक तकनीकी कारोबार तक पहुंची।

बफेट का निवेश मंत्र क्या है?

बफेट की निवेश शैली को कुछ मूल सिद्धांतों से समझा जा सकता है।

पहला—कंपनी को समझो।
जिस कारोबार को आप समझते ही नहीं, उसमें पैसा लगाने से बचो।

दूसरा—कीमत और मूल्य में अंतर समझो।
किसी शेयर की बाजार कीमत और कंपनी की वास्तविक कारोबारी क्षमता एक ही चीज नहीं होती।

तीसरा—लंबे समय तक सोचो।
बफेट ने 1988 की Berkshire रिपोर्ट में लिखा था कि जब वे बेहतरीन कारोबार और बेहतरीन प्रबंधन वाली कंपनियों में हिस्सेदारी रखते हैं तो उनका पसंदीदा holding period “forever” होता है।

इसी सोच ने उन्हें तेज ट्रेडिंग के बजाय long-term investing का चेहरा बना दिया।

बेहद अमीर, फिर भी साधारण जीवन

बफेट की कहानी का एक और पहलू उन्हें बाकी अरबपतियों से अलग चर्चा में लाता है—उनकी निजी जीवनशैली।

Forbes के अनुसार वे आज भी ओमाहा के उसी घर में रहते हैं जिसे उन्होंने 1958 में करीब 31,500 डॉलर में खरीदा था। वे लंबे समय से अपनी सादगी और कम खर्च वाली आदतों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें Coca-Cola और McDonald’s का खास तौर पर जिक्र करने वाली जीवनशैली के लिए भी जाना जाता है।

यानी एक तरफ उनकी संपत्ति अरबों डॉलर में पहुंची, दूसरी तरफ उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को लेकर सोच अपेक्षाकृत साधारण बनी रही।

99 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति दान करने का संकल्प

बफेट की कहानी सिर्फ निवेश और अरबों डॉलर कमाने की कहानी नहीं है। उनकी पहचान एक बड़े philanthropist के तौर पर भी बनी।

उन्होंने 2006 में अपनी Berkshire Hathaway की अधिकांश हिस्सेदारी philanthropy के लिए देने का संकल्प लिया। Giving Pledge पर उनके आधिकारिक pledge के अनुसार, उन्होंने अपनी 99 प्रतिशत से अधिक संपत्ति को अपने जीवनकाल या मृत्यु के बाद charitable causes के लिए देने का commitment किया है।

2010 में बफेट ने Bill Gates और Melinda French Gates के साथ मिलकर Giving Pledge शुरू किया। इसका उद्देश्य दुनिया के बेहद अमीर लोगों को अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज और charitable causes के लिए देने के लिए प्रेरित करना था।

Berkshire की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बफेट ने 2006 से अपनी Berkshire shares का बड़ा हिस्सा philanthropy के लिए देना शुरू किया और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रही।

‘Oracle of Omaha’ क्यों कहा जाता है?

बफेट को दुनिया भर में “Oracle of Omaha” यानी “ओमाहा का जादूगर” कहा जाता है। इसकी वजह सिर्फ उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि निवेश के बारे में उनकी लंबे समय से चली आ रही समझ, शेयरधारकों के साथ संवाद और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य रखने की उनकी शैली है।

Berkshire के shareholder letters भी उनकी पहचान का अहम हिस्सा रहे हैं। कंपनी ने वर्षों के उनके shareholder letters का संग्रह उपलब्ध कराया है, जिनमें निवेश, कारोबार, गलतियों, पूंजी आवंटन और कंपनी संस्कृति पर बफेट के विचार दर्ज हैं।

अब Berkshire में क्या बदला?

18 सितंबर 2026 को बफेट ने चेयरमैन का पद छोड़ दिया। अब उनके बेटे Howard G. Buffett, जो 1993 से Berkshire के बोर्ड में डायरेक्टर हैं, चेयरमैन की भूमिका संभालेंगे। Warren Buffett Chairman Emeritus के रूप में बोर्ड में बने रहेंगे।

कंपनी के CEO की जिम्मेदारी पहले ही Greg Abel संभाल चुके हैं। यानी Berkshire का नेतृत्व अब एक नए ढांचे में है—Greg Abel कंपनी के रोजमर्रा के संचालन और व्यवसाय की कमान संभाल रहे हैं, Howard Buffett बोर्ड के चेयरमैन हैं और Warren Buffett अपने दशकों के अनुभव के साथ बोर्ड में बने हुए हैं।

वॉरेन बफेट की कहानी एक नजर में

साल/उम्रमहत्वपूर्ण पड़ाव
1930ओमाहा, नेब्रास्का में जन्म
11 सालपहला शेयर खरीदा
13 सालपहली बार टैक्स फाइल किया
1951Columbia Business School से पढ़ाई पूरी
1954-56Benjamin Graham के साथ काम किया
1956अपनी निवेश साझेदारी शुरू की
1965Berkshire Hathaway पर नियंत्रण
1967National Indemnity के जरिए इंश्योरेंस कारोबार में प्रवेश
1970Berkshire के चेयरमैन बने
1988-89Coca-Cola में बड़ी हिस्सेदारी
2006अधिकांश Berkshire संपत्ति philanthropy को देने का संकल्प
2010Giving Pledge की शुरुआत
2026CEO पद से पहले ही विदाई; 18 सितंबर को चेयरमैन पद भी छोड़ा
अबChairman Emeritus और Berkshire बोर्ड के सदस्य

क्यों याद रखी जाएगी बफेट की कहानी?

वॉरेन बफेट की कहानी को सिर्फ “एक अरबपति निवेशक” की कहानी मानना अधूरा होगा। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने बचपन की पैसों को लेकर जिज्ञासा को निवेश के अनुशासन में बदला, Benjamin Graham से सीखी value investing को अपनी शैली दी, Charlie Munger के साथ Berkshire को एक अलग तरह के बिजनेस मॉडल में बदला और दशकों तक शेयरधारकों के साथ लंबी अवधि की साझेदारी की सोच को आगे बढ़ाया।

आज चेयरमैन पद छोड़ने के बाद भी Berkshire Hathaway से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। पद बदला है, लेकिन बोर्ड में उनकी मौजूदगी और अनुभव की भूमिका बनी हुई है। यही वजह है कि 96 की उम्र में भी बफेट की विदाई केवल एक कॉर्पोरेट पद परिवर्तन नहीं, बल्कि निवेश की दुनिया के एक लंबे अध्याय में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।

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Byआभा शुक्ला
आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
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