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Home - देश - अनंत नाग को मिलेगा दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, PM मोदी ने दी बधाई; जानिए 5 दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी सफर की पूरी कहानी

अनंत नाग को मिलेगा दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, PM मोदी ने दी बधाई; जानिए 5 दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी सफर की पूरी कहानी

आभा शुक्ला
Last updated: सितम्बर 18, 2026 6:12 अपराह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 2 महीना पहले
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024
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कन्नड़ सिनेमा से निकले अनंत नाग ने हिंदी समेत 6 भाषाओं की 300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम, ‘अंकुर’ से हिंदी फिल्मों में पहचान, ‘मालगुडी डेज’ से घर-घर पहुंचे; 22 सितंबर को केवड़िया में राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार ने 16 सितंबर 2026 को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश पर उनके नाम का ऐलान किया।

यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके पांच दशक से ज्यादा लंबे योगदान और शानदार सिनेमाई सफर के लिए दिया जा रहा है। पुरस्कार 22 सितंबर 2026 को गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में होने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रपति इस समारोह में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनंत नाग को इस सम्मान के लिए बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि कई दशकों से अनंत नाग के सहज अभिनय, बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने भारतीय सिनेमा, खासकर कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि अनंत नाग ने जिस भी भूमिका को निभाया, उसमें गहराई और सच्चाई दिखाई।

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कौन हैं अनंत नाग?

अनंत नाग का जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक में हुआ था। वह उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपने लंबे करियर में सिर्फ एक तरह के किरदार या एक भाषा तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने कन्नड़ के साथ-साथ हिंदी, तेलुगु, मलयालम, तमिल और मराठी फिल्मों में भी काम किया है।

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सरकारी जानकारी के मुताबिक, अनंत नाग ने अपने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं। यही विविधता उनके अभिनय की सबसे बड़ी पहचान रही है। वह कभी गंभीर और संवेदनशील किरदार में नजर आए तो कभी आम आदमी के बिल्कुल सहज रूप में। उनकी खासियत यह रही कि बड़े पर्दे पर उनका अभिनय बनावटी कम और स्वाभाविक ज्यादा दिखाई दिया।

ऐसे शुरू हुआ फिल्मी सफर

अनंत नाग का अभिनय सफर कन्नड़ सिनेमा से शुरू हुआ। उन्होंने कन्नड़ फीचर फिल्म ‘संकल्प’ से फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद उनका दायरा लगातार बढ़ता गया और उन्होंने अलग-अलग भाषाओं के सिनेमा में अपनी जगह बनाई।

हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री चर्चित फिल्मकार श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ से हुई। इसके बाद उन्होंने बेनेगल की ही चर्चित फिल्म ‘भूमिका’ में भी काम किया। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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अनंत नाग का करियर ऐसे दौर में आगे बढ़ा जब भारतीय सिनेमा में समानांतर और यथार्थवादी फिल्मों का प्रभाव बढ़ रहा था। उनके सहज अभिनय ने उन्हें इस तरह के सिनेमा के लिए खास कलाकार बनाया।

श्याम बेनेगल से लेकर ‘मालगुडी डेज’ तक

अनंत नाग की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। टेलीविजन पर भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। आर.के. नारायण की कहानियों पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ उनके यादगार कामों में शामिल है।

इस सीरीज ने उन्हें देशभर के दर्शकों तक पहुंचाया। टीवी पर उनकी मौजूदगी ने उस पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी पहचान बनाई जो शायद उनकी सभी फिल्मों से परिचित नहीं थी।

यही वजह है कि अनंत नाग का करियर सिर्फ कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की कहानी नहीं है। उन्होंने सिनेमा और टेलीविजन दोनों माध्यमों में लंबे समय तक काम करते हुए अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों से जुड़ाव बनाया।

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पांच दशक से ज्यादा का सफर, 300 से अधिक फिल्में

अनंत नाग के करियर की सबसे बड़ी खासियत उनकी लंबी उम्र और विविधता है। पांच दशक से ज्यादा समय तक लगातार सक्रिय रहते हुए उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया।

उनके खाते में कन्नड़ सिनेमा की बड़ी फिल्मों के साथ हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रोजेक्ट भी रहे। इसी वजह से उन्हें सिर्फ क्षेत्रीय अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के व्यापक परिदृश्य में महत्वपूर्ण कलाकार के तौर पर देखा जाता है।

सरकार के मुताबिक, उनके काम ने कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और भारतीय सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध किया है।

अभिनय के अलावा राजनीति में भी सक्रिय रहे

अनंत नाग की पहचान केवल अभिनेता के रूप में नहीं रही। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी भूमिका निभाई।

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वह 1988 से 1994 तक कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य रहे। इसके बाद 1994 से 1999 तक कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने बेंगलुरु शहर विकास राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

यानी उनका सार्वजनिक जीवन फिल्मों के बाहर भी सक्रिय रहा और उन्होंने राजनीति में भी अपनी भूमिका निभाई।

पद्म भूषण समेत कई बड़े सम्मान

अनंत नाग को उनके लंबे योगदान के लिए पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और पांच कर्नाटक राज्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

इसके अलावा उन्हें कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार, कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार और कर्नाटक राज्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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उन्हें बेंगलुरु विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है। वर्ष 2023 में उन्होंने सिनेमा में अपने 50 वर्ष के करियर की स्वर्ण जयंती पूरी की थी।

इसके बाद वर्ष 2025 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। अब दादासाहेब फाल्के पुरस्कार उनके लंबे फिल्मी योगदान में एक और बड़ा राष्ट्रीय सम्मान जुड़ने जा रहा है।

कैसे मिला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार?

अनंत नाग को यह पुरस्कार किसी एक फिल्म या किसी एक किरदार के लिए नहीं दिया जा रहा है। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास और संवर्धन में लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है।

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश के बाद भारत सरकार ने अनंत नाग के नाम को मंजूरी दी। सरकार ने उनके पांच दशक से ज्यादा लंबे सिनेमाई सफर और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह घोषणा की है।

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22 सितंबर को केवड़िया में होगा सम्मान

पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है, लेकिन आधिकारिक समारोह अभी होना है। 22 सितंबर 2026 को गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन होगा। इसी समारोह में अनंत नाग को वर्ष 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

इसलिए यह सम्मान सिर्फ अनंत नाग के लिए नहीं, बल्कि कन्नड़ सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत नाग कर्नाटक से यह सम्मान पाने वाले प्रमुख कलाकारों की सूची में शामिल हो रहे हैं।

PM मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनंत नाग को बधाई देते हुए कहा कि उनके सहज अभिनय, बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है।

पीएम मोदी ने उनके अभिनय की खासियत बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी हर भूमिका में अलग गहराई और सच्चाई दिखाई। उन्होंने अनंत नाग को इस सम्मान के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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क्या है दादासाहेब फाल्के पुरस्कार?

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत 1969 में हुई थी। यह सम्मान भारतीय सिनेमा के विकास और संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकार या फिल्म जगत से जुड़े व्यक्तित्व को दिया जाता है।

इस पुरस्कार का नाम भारतीय सिनेमा के जनक माने जाने वाले दादासाहेब फाल्के के नाम पर रखा गया है। उन्होंने 1913 में भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई थी।

इस पुरस्कार के तहत स्वर्ण कमल पदक, शॉल और 10 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। पहला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 1969 में अभिनेत्री देविका रानी को प्रदान किया गया था।

अनंत नाग की कहानी एक नजर में

साल/पड़ावअनंत नाग के सफर की खास बात
19484 सितंबर को कर्नाटक में जन्म
फिल्मी शुरुआतकन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से
हिंदी सिनेमा‘अंकुर’ से हिंदी फिल्मों में पहचान
टीवी‘मालगुडी डेज’ में यादगार भूमिका
50+ सालभारतीय सिनेमा में सक्रिय करियर
300+ फिल्मेंकन्नड़ समेत 6 भारतीय भाषाओं में काम
1988-94कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य
1994-99कर्नाटक विधानसभा के सदस्य
2023फिल्मी करियर के 50 वर्ष पूरे
2025पद्म भूषण से सम्मानित
16 सितंबर 2026दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 के लिए चयन
22 सितंबर 2026केवड़िया में पुरस्कार प्रदान किया जाएगा

पांच दशक के सफर पर राष्ट्रीय सम्मान की मुहर

अनंत नाग का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना जाना उनके किसी एक किरदार की सफलता की कहानी नहीं है। यह पांच दशक से ज्यादा लंबे उस सफर का सम्मान है, जिसमें उन्होंने कन्नड़ सिनेमा से शुरुआत की, हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं तक पहुंचे, फिल्मों के साथ टेलीविजन में भी पहचान बनाई और अभिनय के अलावा सार्वजनिक जीवन में भी भूमिका निभाई।

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अब 22 सितंबर को केवड़िया में जब उन्हें वर्ष 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, तब उनके लंबे सिनेमाई सफर में भारतीय सिनेमा का यह सर्वोच्च सम्मान एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ देगा।

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आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
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