संझौली/रोहतास: बिहार के रोहतास जिले के संझौली प्रखंड में दाखिल-खारिज कराने के नाम पर किसान से 3,500 रुपये मांगने के मामले में जांच के दौरान नया तथ्य सामने आया है।
किसान के व्हाट्सएप पर जिस मोबाइल नंबर से पैसे की मांग की गई थी, जांच में उस नंबर से जुड़े व्यक्ति की पहचान जमुई जिले के बनबारी पंडित के रूप में होने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट होगी।
मामला मसोना गांव निवासी प्रगतिशील किसान अर्जुन सिंह से जुड़ा है। किसान के अनुसार उनके मोबाइल पर 994274**** नंबर से व्हाट्सएप संदेश आया था। संदेश में दावा किया गया कि उनका दाखिल-खारिज का काम हो जाएगा और उनसे वंशावली व्हाट्सएप के माध्यम से भेजने को कहा गया। किसान ने मांगी गई जानकारी भेज दी।
इसके बाद उसी नंबर से उन्हें संदेश मिला कि 3,500 रुपये भेजने के बाद उनका काम पूरा हो जाएगा। सरकारी प्रक्रिया के लिए इस तरह पैसे मांगे जाने पर किसान को संदेह हुआ। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी सीधे रोहतास के जिलाधिकारी को दी और व्हाट्सएप पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध कराए।
डीएम के निर्देश पर शुरू हुई जांच
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्र ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए। बिक्रमगंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) संतोष कुमार के नेतृत्व में जांच की जा रही है।
जांच के दौरान जिस व्यक्ति का नाम सामने आया है, उसकी पहचान बनबारी पंडित, पिता मोहन पंडित के तौर पर बताई गई है। वह जमुई जिले के अकौनी मरथुंभा थाना क्षेत्र के मातासी गांव का निवासी बताया गया है।
मामले में संझौली के हल्का कर्मचारी दीपक कुमार पासवान को जांच पूरी होने तक जिला मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पैसे मांगने वाले व्यक्ति और हल्का कर्मचारी के बीच कोई संबंध था या किसी ने कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल कर किसान को ठगने की कोशिश की।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
डीसीएलआर संतोष कुमार के अनुसार मामले की विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रथम दृष्टया अधिकारियों को यह मामला किसी व्यक्ति द्वारा हल्का कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल कर पैसे मांगने से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
रोहतास में पहले भी सामने आ चुके हैं साइबर ठगी के मामले
अधिकारियों और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, जिले में सरकारी अधिकारियों के नाम और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पूर्व डीएम पंकज दीक्षित के व्हाट्सएप अकाउंट से छेड़छाड़ कर अलग-अलग जगहों पर संदेश भेजे जाने की बात सामने आई थी।
इसी तरह बिक्रमगंज के तत्कालीन एसडीएम प्रभात कुमार के व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़े मामले में भी लोगों को एक ऐप खोलने के लिए संदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित लिंक भेजकर धोखाधड़ी करने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही गई है।
ऐसे मामलों को देखते हुए सरकारी योजनाओं या राजस्व संबंधी काम के नाम पर व्हाट्सएप, फोन कॉल या लिंक के जरिए पैसे मांगने पर सावधानी बरतना जरूरी है।