महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद धर्मपाल की प्रतिमा पर अर्पित किए पुष्प, धम्म सभा में उनके जीवन और बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण में योगदान पर होगी चर्चा
बोधगया: भारत में बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक अनागारिक धर्मपाल की 162वीं जयंती गुरुवार को बोधगया में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ मनाई जा रही है।
महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के बोधगया केंद्र में आयोजित समारोह में देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायी, भिक्षु और स्थानीय बौद्ध मठों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
जयंती समारोह की शुरुआत महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना से हुई। श्रीलंका बौद्ध मठ के भिक्षुओं के साथ श्रीलंका से आए करीब 400 उपासक-उपासिकाओं ने मंदिर के गर्भगृह में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के सामने खीर, फूल और कैंडल अर्पित किए।
मंदिर के पुजारियों की ओर से मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई गई। इस दौरान महाबोधि मंदिर परिसर ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के जयघोष और धार्मिक मंत्रोच्चार से गूंजता रहा।
धर्मपाल की प्रतिमा पर श्रद्धालुओं ने अर्पित किए पुष्प
महाबोधि मंदिर में पूजा के बाद श्रीलंका से आए श्रद्धालु श्रीलंका बौद्ध मठ पहुंचे। यहां अनागारिक धर्मपाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में बोधगया के विभिन्न बौद्ध मठों से बड़ी संख्या में भिक्षु भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने धर्मपाल के कार्यों को याद करते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
धम्म सभा में धर्मपाल के जीवन पर होगी चर्चा
जयंती समारोह का मुख्य कार्यक्रम गुरुवार दोपहर 3 बजे श्रीलंका बौद्ध मठ के सभागार में आयोजित किया जाएगा। इसमें धम्म सभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
धम्म सभा के दौरान अनागारिक धर्मपाल के जीवन, उनके विचारों और भारत में बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण में उनके योगदान पर वक्ताओं की ओर से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए बौद्ध विद्वान, भिक्षु, शिक्षाविद और श्रद्धालु भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मगध रेंज के आईजी विकास वैभव तथा मुख्य अतिथि के रूप में मगध प्रमंडल की आयुक्त सफीना एएन के शामिल होने की संभावना है।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुति रहेगी आकर्षण
समारोह के दौरान महाबोधि विद्यापीठ के विद्यार्थी जयमंगला गाथा के बीच सेरेमोनियल लैंप प्रज्वलित करेंगे। इसके बाद विद्यार्थियों की ओर से नृत्य और गीत की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, बोधगया सेंटर के असिस्टेंट भिक्खु-इन-चार्ज वेन. आर. ज्ञानरत्न थेरो स्वागत भाषण देंगे।
महाबोधि धर्मशाला के 125 साल पूरे होने पर भी चर्चा
इस वर्ष समारोह में महाबोधि धर्मशाला के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसके ऐतिहासिक महत्व को भी सामने रखा जाएगा। इसे महाबोधि सोसाइटी की पहली इमारतों में से एक माना जाता है।
कार्यक्रम में बताया जाएगा कि वर्ष 1901 में अनागारिक धर्मपाल ने महाबोधि धर्मशाला का निर्माण कराया था। इसके ऐतिहासिक महत्व और धर्मपाल के कार्यों पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट डा. कैलाश प्रसाद संबोधित करेंगे।
बौद्ध विरासत के संरक्षण में धर्मपाल की भूमिका याद
अनागारिक धर्मपाल को भारत में बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों में गिना जाता है। बोधगया के महाबोधि मंदिर और बौद्ध विरासत के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए उनके प्रयासों का बौद्ध समुदाय में विशेष महत्व माना जाता है।
उनकी 162वीं जयंती पर आयोजित समारोह के जरिए बोधगया की प्राचीन बौद्ध परंपरा के साथ-साथ धर्मपाल के ऐतिहासिक योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।