पटना, 14 सितंबर 2026: जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को महीनों कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया समय पर पूरी हो, इसके लिए पटना जिला प्रशासन ने अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन मामलों की समीक्षा में फुलवारी शरीफ अंचल में 1208 मामले डिफेक्ट चेक में लंबित पाए गए। मामलों के इतने बड़े पैमाने पर लंबित रहने को जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने गंभीरता से लिया है और अंचल अधिकारी, फुलवारी शरीफ से स्पष्टीकरण मांगा है।
जिलाधिकारी की कार्रवाई सिर्फ लंबित मामलों तक सीमित नहीं है। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए समाहरणालय परिसर में आयोजित विशेष कैंप में संबंधित पदाधिकारी मौजूद नहीं थे।
इसके साथ ही 26 अगस्त से 29 अगस्त तक सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना कार्यालय से अनुपस्थित रहने के मामले में भी जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण तलब किया है।
1208 मामलों पर सवाल, अब होगी गहन जांच
ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया का उद्देश्य जमीन से जुड़े आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत तेजी और पारदर्शिता के साथ निपटाना है। ऐसे में बड़ी संख्या में आवेदन डिफेक्ट चेक में लंबित मिलना प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना गया है।
जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता, पटना सदर को निर्देश दिया है। उन्हें लंबित मामलों की स्थिति की बारीकी से जांच करने और यह देखने को कहा गया है कि किन कारणों से आवेदन लंबित हैं तथा उनके निष्पादन में कहां और किस स्तर पर देरी हुई।
बिना जांच आवेदन रिवर्ट करने का मामला भी सामने आया
समीक्षा के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया। कुछ मामलों में आवश्यक जांच-पड़ताल और संबंधित अभिलेखों के समुचित परीक्षण के बिना ही म्यूटेशन आवेदन आवेदकों को रिवर्ट कर दिए गए।
ऐसे मामलों की संख्या 1036 बताई गई है। जिलाधिकारी ने इन सभी मामलों की भी जांच कराने का निर्देश दिया है।
अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर होगा कि क्या इन आवेदनों को रिवर्ट करने से पहले जरूरी दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की गई थी या नहीं। यदि बिना समुचित प्रक्रिया के आवेदन रिवर्ट किए गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारी या पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
‘लापरवाही किसी कीमत पर स्वीकार नहीं’
जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने दाखिल-खारिज मामलों को लेकर प्रशासन का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा है कि मामलों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब, लापरवाही अथवा बिना समुचित जांच के आवेदन रिवर्ट करने की कार्रवाई किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।
उन्होंने भूमि सुधार उप समाहर्ता को निर्देश दिया है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी और पदाधिकारी को चिह्नित किया जाए। इसके बाद संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जमीन के मामलों में समयबद्धता पर प्रशासन का जोर
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जमीन से संबंधित आवेदन के समय पर निष्पादन में देरी होने पर आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसी वजह से जिला प्रशासन ने सभी अंचलों में भूमि संबंधी मामलों के समयबद्ध और पारदर्शी निष्पादन को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों को दाखिल-खारिज जैसे महत्वपूर्ण मामलों के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों को संवेदनशीलता, जवाबदेही और तत्परता के साथ काम करना होगा।
फुलवारी शरीफ अंचल में सामने आए 1208 लंबित मामलों और 1036 रिवर्ट आवेदनों की जांच के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि प्रक्रिया में देरी और अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश भी साफ है कि भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही को अब महज प्रशासनिक देरी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।