बिहार के जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर अब सिर्फ इस बात से नहीं आंकी जाएगी कि कितने मरीजों के ऑपरेशन हुए। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि अगली कसौटी यह होगी कि जिला अस्पताल कितनी तरह की सर्जरी अपने स्तर पर करने में सक्षम हैं। यानी मरीज को हर जटिल बीमारी में बड़े शहर या मेडिकल कॉलेज की ओर रेफर करने के बजाय जिला अस्पतालों को ही उपचार का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
पटना, 11 सितंबर 2026। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने शुक्रवार को छह जिलों—नवादा, किशनगंज, औरंगाबाद, बक्सर, गोपालगंज और जमुई—के सदर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और सर्जरी की स्थिति की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा में उन्होंने सिविल सर्जनों को दो टूक निर्देश दिया कि सर्जरी की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, सर्जरी के प्रकार भी बढ़ाने होंगे।
LSCS से आगे बढ़कर जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और आंखों के ऑपरेशन पर जोर
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि कई जिला अस्पतालों में सर्जरी का बड़ा हिस्सा Lower Segment Caesarean Section (LSCS) तक सीमित है। विभाग अब इस दायरे को व्यापक करना चाहता है।
स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया कि उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों, ऑपरेशन थिएटर और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग, ईएनटी और अन्य जटिल सर्जरी को जिला स्तर पर बढ़ाया जाए।
इसका सीधा अर्थ है कि विशेषज्ञ चिकित्सक सिर्फ ओपीडी में मरीज देखने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल ऑपरेशन थिएटर में भी हो। विभाग की कोशिश है कि मरीजों को ऐसी सर्जरी के लिए अनावश्यक रूप से मेडिकल कॉलेज या दूसरे बड़े अस्पतालों में न भेजना पड़े, जो जिला अस्पताल में ही संभव है।

छह जिलों की तस्वीर ने बढ़ाई चिंता
अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक छह जिलों के सदर अस्पतालों में सर्जरी की स्थिति इस प्रकार रही—
| जिला | कुल सर्जरी | सर्जरी के प्रकार |
|---|---|---|
| नवादा | 224 | 7 |
| बक्सर | 80 | 7 |
| गोपालगंज | 80 | 6 |
| औरंगाबाद | 38 | 5 |
| जमुई | 89 | 4 |
| किशनगंज | 63 | 4 |
आंकड़ों से यह भी साफ है कि सिर्फ संख्या ही कहानी नहीं बताती। उदाहरण के लिए बक्सर में 80 सर्जरी सात प्रकार की हुईं, जबकि जमुई में 89 सर्जरी चार प्रकार की रहीं। यानी ज्यादा ऑपरेशन होना अपने आप में जिला अस्पताल की व्यापक सर्जिकल क्षमता का प्रमाण नहीं है।
यही वह बिंदु है जिस पर स्वास्थ्य विभाग अब ज्यादा जोर दे रहा है।
तीन जिलों में गिरावट पर सचिव नाराज
समीक्षा के दौरान औरंगाबाद, बक्सर और गोपालगंज में पिछले महीनों की तुलना में सर्जरी की संख्या में कमी को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को प्रदर्शन सुधारने का निर्देश दिया।
साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित समीक्षा, टीम भावना से काम करने और अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने पर जोर दिया गया।
दरअसल, जिला अस्पतालों को मजबूत करने की किसी भी रणनीति की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विशेषज्ञ डॉक्टर, ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया, जांच सुविधाएं और जरूरी संसाधन मौजूद होने के बावजूद मरीजों को आगे रेफर न करना पड़े। विभाग की समीक्षा इसी व्यवस्था की कार्यक्षमता को परखने की कोशिश के तौर पर देखी जा सकती है।
तीन महीने में सर्जरी तीन गुने से ज्यादा—आंकड़ों में दिखा बदलाव
जिला अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं के विस्तार का असर राज्य के समग्र आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।
जून 2026 में जिला अस्पतालों में 2,428 सर्जरी हुई थीं। जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 5,650 और अगस्त में 8,209 तक पहुंच गया।
यानी जून से अगस्त के बीच सर्जरी की संख्या तीन गुने से ज्यादा हो गई। जुलाई के मुकाबले अगस्त में भी 45.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यह वृद्धि सिर्फ संख्या में बदलाव नहीं है। विभाग अब इस वृद्धि को अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों के बेहतर इस्तेमाल से जोड़कर देख रहा है।
वैशाली सबसे आगे, पटना भी मजबूत प्रदर्शन करने वालों में
अगस्त में कई जिला अस्पतालों ने सर्जरी के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
- वैशाली जिला अस्पताल — 651 सर्जरी
- पटना — 587
- अररिया — 529
- मधेपुरा — 494
- भोजपुर — 362
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जिला अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं का विस्तार अब कुछ चुनिंदा बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है।
असली बदलाव संख्या में नहीं, ‘सर्जरी के प्रकार’ में
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सर्जरी की विविधता बढ़ाना है।
अगस्त में—
- बेगूसराय जिला अस्पताल में 60 प्रकार की सर्जरी
- पटना में 53
- नालंदा में 42
- भोजपुर में 40
- मुजफ्फरपुर में 33 प्रकार की सर्जरी
उपलब्ध कराई गईं।
जुलाई की तुलना में विशेषज्ञ सेवाओं में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। ईएनटी सर्जरी में 471.7 प्रतिशत, ऑर्थोपेडिक्स में 296.2 प्रतिशत, नेत्र रोग में 174.3 प्रतिशत और जनरल सर्जरी में 66.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
संदेश साफ है—जिला अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर नहीं रहेंगे
स्वास्थ्य विभाग के इस कदम का सबसे बड़ा असर मरीजों की यात्रा पर पड़ सकता है। यदि जिला अस्पताल में ही अधिक प्रकार की सर्जरी उपलब्ध होती है तो मरीज और उनके परिजनों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की भागदौड़, अतिरिक्त खर्च और रेफरल की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सर्जरी की संख्या बढ़ाना तभी सार्थक होगा, जब उसके साथ गुणवत्ता, विशेषज्ञता, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल और जरूरी जांच सुविधाएं भी मजबूत हों।
इसीलिए छह जिलों की समीक्षा को सिर्फ आंकड़ों की समीक्षा नहीं, बल्कि जिला अस्पतालों की वास्तविक क्षमता को परखने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग अब जिला अस्पतालों से सिर्फ यह जवाब नहीं चाहता कि “कितने ऑपरेशन किए?” बल्कि सवाल बदल चुका है—“कितनी तरह के ऑपरेशन अपने अस्पताल में किए और कितने मरीजों को अनावश्यक रेफरल से बचाया?”
यही बदलाव बिहार की जिला स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था को अगले चरण में ले जाने की सबसे बड़ी कसौटी बन सकता है।