डीएपी के लिए 1,800 से 2,000 रुपये तक वसूली का दावा, नैनो यूरिया खरीदने के लिए भी दबाव बनाने का आरोप
मनोज मिश्रा, तारापुर (मुंगेर): धान की फसल खेतों में लहलहा रही है और किसान समय पर खाद डालकर पैदावार बचाने की कोशिश में जुटे हैं। इसी बीच तारापुर विधानसभा क्षेत्र में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। किसानों का आरोप है कि बाजार में यूरिया और डीएपी के लिए उनसे तय कीमत से अधिक राशि ली जा रही है।
किसानों के अनुसार, 266 रुपये निर्धारित मूल्य वाली यूरिया की बोरी 350 रुपये तक में बेची जा रही है। इस हिसाब से एक बोरी पर 84 रुपये अधिक लेने का आरोप है। वहीं डीएपी को लेकर किसानों की शिकायत और गंभीर है। उनका कहना है कि 1,350 रुपये निर्धारित मूल्य वाली डीएपी की बोरी 1,800 से 2,000 रुपये तक में बेची जा रही है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ दुकानदार खाद के साथ नैनो यूरिया की बोतल खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब खाद ही महंगी कीमत पर खरीदनी पड़ रही है, ऐसे में जरूरत नहीं होने पर अतिरिक्त उत्पाद लेना उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
व्यापार मंडल की बिक्री पर भी उठे सवाल
खाद की कीमत को लेकर व्यापार मंडल भी सवालों के घेरे में आया है। अफजलनगर पंचायत के पूर्व मुखिया शशि कुमार सुमन ने बताया कि उन्होंने व्यापार मंडल से भी यूरिया की एक बोरी 300 रुपये में खरीदी थी। हालांकि बाजार की तुलना में यह कीमत कम थी, लेकिन निर्धारित दर से अधिक थी।
उन्होंने बताया कि व्यापार मंडल के केयरटेकर ने 300 रुपये की विधिवत रसीद भी दी। अधिक राशि लिए जाने की बात सामने आने के बाद शेष राशि लौटाने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई।
बुधवार से व्यापार मंडल में यूरिया उपलब्ध होने के बाद किसानों को कुछ राहत मिलने की बात कही जा रही है। किसानों के अनुसार यहां यूरिया 270 रुपये और डीएपी 1,400 रुपये प्रति बोरी मिल रही है। बाजार से कम कीमत होने के कारण किसान अब व्यापार मंडल का रुख कर रहे हैं। हालांकि निर्धारित सरकारी दर और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच अंतर अभी भी सवाल खड़े कर रहा है।
कृषि विभाग का दावा- जरूरत से अधिक यूरिया उपलब्ध
दूसरी ओर, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी डा. दीप रश्मि ने बताया कि खरीफ फसल के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने किसानों को धान की फसल में डीएपी का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। उनका कहना है कि इससे किसानों का खर्च बेवजह बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि सभी उर्वरक दुकानों पर कृषि समन्वयक, एटीएम और बीटीएम को पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है। किसानों को निर्धारित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराना इनकी जिम्मेदारी है।
किसानों का सवाल- जब खाद पर्याप्त है तो महंगी क्यों?
किसानों का कहना है कि यदि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है तो फिर बाजार में उन्हें निर्धारित कीमत पर उर्वरक क्यों नहीं मिल रहा है। किसानों ने उर्वरक बिक्री में कथित मनमानी और कालाबाजारी की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही किसानों ने दोषी दुकानदारों पर कठोर कार्रवाई करने और प्रत्येक दुकान पर निर्धारित मूल्य तथा उपलब्ध स्टॉक की सार्वजनिक जानकारी देने की मांग उठाई है।
किसानों का कहना है कि कागज पर पर्याप्त खाद और बाजार में महंगी खाद की स्थिति के बीच का अंतर तभी खत्म होगा, जब बिक्री व्यवस्था पारदर्शी होगी और मनमानी करने वालों पर सख्ती होगी।
ज्यादा कीमत वसूली तो लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलता है तो किसान लिखित शिकायत कर सकते हैं। शिकायत की जांच के बाद संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उर्वरक दुकान का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
किसानों ने बताई अपनी परेशानी
गोगाचक के किसान ललन कुमार सिंह ने बताया कि तारापुर बाजार की दुकानों पर यूरिया 350 रुपये में मिल रही है।
चंदुकी के किसान गौतम कुमार ने बताया कि उन्होंने 350 रुपये में यूरिया और 1,800 रुपये में डीएपी खरीदी है।
वहीं अफजलनगर पंचायत के पूर्व मुखिया शशि कुमार सुमन ने बताया कि उन्होंने व्यापार मंडल से भी यूरिया की एक बोरी 300 रुपये में खरीदी थी।