भागलपुर: गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बुधवार को कुछ समय के लिए राहत के संकेत दिए हैं। भागलपुर में गंगा का पानी 34.60 मीटर पर स्थिर हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के रियल टाइम आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार से बुधवार सुबह 10 बजे तक जलस्तर में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई।
नदी अब भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है, लेकिन बढ़ाव रुकने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी घटने की उम्मीद जगी है।
भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 33.68 मीटर से 92 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं, उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल 34.86 मीटर से यह महज 26 सेंटीमीटर नीचे है। ऐसे में प्रशासन और बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजर अब नदी के अगले रुझान पर टिकी है।
ऊपरी इलाकों में पानी घटने के संकेत
गंगा के ऊपरी हिस्से के कई प्रमुख स्टेशनों पर जलस्तर में कमी का रुख सामने आया है। बक्सर में 59.90 मीटर, पटना के गांधी घाट पर 50.14 मीटर और दीघाघाट पर 51.31 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया है, जहां पानी नीचे जा रहा है।
इसी तरह हाथीदह में 43.32 मीटर पर जलस्तर घट रहा है, जबकि मुंगेर में 39.94 मीटर पर पानी फिलहाल स्थिर है। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार घटाव और भागलपुर में ठहराव को देखते हुए आने वाले घंटों में गंगा के जलस्तर में कमी आने की संभावना बढ़ी है।
हालांकि, जलस्तर कम होने में अभी समय लग सकता है। नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर होने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें फिलहाल खत्म नहीं हुई हैं।
कहलगांव और पीरपैंती में बाढ़ का असर गंभीर
भागलपुर में गंगा के ठहरने के बावजूद कहलगांव और पीरपैंती के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। कहलगांव के नया नगर रानीदियरा, नंदगोला, भवानीपुर, रानीदियरा अस्थायी पुनर्वास स्थल, नया टोला गंगलदाई समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है।
एकचारी-महगामा पथ पर भी पानी का बहाव शुरू हो गया है। कई गांव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरे हैं, जिससे ग्रामीणों के लिए आवागमन बड़ी चुनौती बन गया है।
पीरपैंती में भी बाढ़ का दायरा कई पंचायतों तक पहुंच चुका है। रानीदियारा, एकचारी, मोहनपुर, खवासपुर, परशुरामपुर, गोविंदपुर, मधुबन, बाखरपुर पूर्वी-पश्चिमी, श्रीमतपुर, गोपालीचक, श्रीमतपुर हुजूरनगर और बाबूपुर पंचायतों में पानी फैलने की स्थिति बनी हुई है।
इसके अलावा मानिकपुर, पीरपैंती और हरिणकोल पंचायत के कुछ वार्ड भी प्रभावित हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 22 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से 15 नावें उपलब्ध कराई गई हैं।
बाढ़ के कारण 31 विद्यालयों को बंद रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध नहीं होने के कारण जरूरी काम के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
नाथनगर और अकबरनगर में पानी के ठहराव से राहत
नाथनगर में रात करीब 12 बजे के बाद गंगा के पानी में बढ़ोतरी रुकने की सूचना है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो बुधवार दोपहर बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो सकती है।
अकबरनगर में एनएच-80 पर पानी का बहाव भी सुबह तक लगभग स्थिर रहा। देर रात मामूली बढ़ोतरी के बाद नदी के पानी में ठहराव आने से लोगों ने कुछ राहत महसूस की है। हालांकि, निचले हिस्सों में अभी पानी जमा है और तेज धारा वाले स्थानों पर आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है।
नवगछिया में भी ठहरा बाढ़ का पानी
नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, इस्माइलपुर और रंगरा समेत कई प्रखंडों में बाढ़ के पानी की स्थिति फिलहाल स्थिर है। प्रभावित लोगों को सामुदायिक रसोई के जरिए दो समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
दूसरी ओर, कई तटबंधों पर पानी का दबाव अभी भी बना हुआ है। इसलिए जलस्तर में मामूली बदलाव पर भी प्रशासन और ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।
अगर गंगा के ऊपरी हिस्सों में पानी घटने का सिलसिला जारी रहता है और उसका असर भागलपुर में भी दिखाई देता है, तो आने वाले दिनों में कहलगांव, पीरपैंती, नाथनगर और नवगछिया के बाढ़ प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद इसी बात को लेकर है कि 34.60 मीटर पर ठहरा गंगा का जलस्तर अब नीचे की ओर बढ़े।