Dinman Times
  • ट्रेंडिंग
  • फोटो
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Reading: फरक्का जलसंधि पर बिहार की बड़ी मांग, संजय झा बोले- 30 साल का नुकसान बहुत हुआ, अब न हो नवीनीकरण
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - देश - फरक्का जलसंधि पर बिहार की बड़ी मांग, संजय झा बोले- 30 साल का नुकसान बहुत हुआ, अब न हो नवीनीकरण

फरक्का जलसंधि पर बिहार की बड़ी मांग, संजय झा बोले- 30 साल का नुकसान बहुत हुआ, अब न हो नवीनीकरण

आभा शुक्ला
Last updated: सितम्बर 9, 2026 12:36 पूर्वाह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 2 घंटे पहले
फरक्का जलसंधि पर बिहार की मांग
फरक्का जलसंधि और गंगा जल बंटवारे को लेकर बिहार में उठी मांग तथा संजय झा के बयान से जुड़ी समाचार तस्वीर।
साझा करें

बेगूसराय। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर हुई फरक्का जलसंधि को लेकर बिहार में आवाज तेज हो गई है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा है कि 1996 में हुई भारत-बांग्लादेश गंगा जलसंधि का अब नवीनीकरण नहीं होना चाहिए।

उनका कहना है कि पिछले 30 वर्षों में बिहार को बाढ़, गाद और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अब राज्य की बढ़ती आबादी और पानी की जरूरतों को देखते हुए पुराने समझौते की समीक्षा जरूरी है।

बेगूसराय के कंकौल स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में संजय झा ने कहा कि 12 दिसंबर 2026 को 1996 की संधि की 30 साल की अवधि पूरी हो रही है। जदयू की मांग है कि इसे मौजूदा रूप में आगे नहीं बढ़ाया जाए।

अगर भारत और बांग्लादेश के बीच आगे कोई नया समझौता होता है तो उसमें बिहार समेत गंगा बेसिन के राज्यों की भविष्य की जरूरतों को शामिल किया जाए। संजय झा ने खास तौर पर 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर नई व्यवस्था बनाने की बात कही है।

क्या है 1996 की फरक्का जलसंधि?

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर यह समझौता 12 दिसंबर 1996 को हुआ था। इसकी अवधि 30 साल रखी गई थी। संधि के तहत हर साल 1 जनवरी से 31 मई तक के कम पानी वाले मौसम में फरक्का बराज पर गंगा के प्रवाह के आधार पर दोनों देशों के बीच पानी बांटने का फार्मूला तय किया गया।

ये भी पढ़े

पितृपक्ष में गया के लिए दो स्पेशल ट्रेनें, रानी कमलापति और जबलपुर से होगा संचालन
महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की सारण में दबिश, नवी मुंबई की फर्म में करोड़ों की हेराफेरी के आरोप में दो भाई गिरफ्तार
आरक्षण के मुद्दे पर NDA में फिर खींचतान, प्रफुल्ल मांझी ने अरुण भारती को घेरा
Instagram पर दोस्ती, फिर अपहरण की साजिश; 27 लाख की रंगदारी मांगने वाले 3 गिरफ्तार

समझौते के अनुसार फरक्का पर पानी का प्रवाह 70 हजार क्यूसेक या उससे कम होने पर भारत और बांग्लादेश को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है। 70 हजार से 75 हजार क्यूसेक के बीच प्रवाह होने पर बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक और बाकी पानी भारत को मिलता है।

वहीं 75 हजार क्यूसेक या उससे ज्यादा पानी होने पर भारत को 40 हजार क्यूसेक और बाकी पानी बांग्लादेश को जाता है। यानी संधि में पानी का बंटवारा फरक्का पर उपलब्ध वास्तविक प्रवाह के आधार पर होता है।

बिहार क्यों उठा रहा है सवाल?

संजय झा का तर्क है कि फरक्का पर बांग्लादेश को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का असर बिहार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब गंगा का पानी कम होता है, तब भी बिहार को अपनी आबादी, खेती, सिंचाई, पेयजल और उद्योगों की जरूरत के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।

जदयू की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि कम पानी वाले मौसम में फरक्का पर करीब 1,500 क्यूमेक पानी की जरूरत पड़ती है, जबकि बक्सर के पास बिहार में प्रवेश करने वाले गंगा के पानी का प्रवाह करीब 400 क्यूमेक तक रह जाता है। इसी अंतर को संजय झा बिहार के साथ होने वाली हकमारी से जोड़ते हैं।

73 प्रतिशत बोझ बिहार पर पड़ने की बात भी इसी तरह के आंकड़ों और तर्क पर आधारित है। हालांकि यह जदयू और बिहार की ओर से रखा गया दावा है, संधि में दर्ज 73 प्रतिशत हिस्सेदारी नहीं है।

बिहार का एक और बड़ा सवाल गंगा में गाद को लेकर है। जदयू नेताओं का कहना है कि फरक्का बराज के कारण नदी की प्राकृतिक धारा और गाद के बहाव पर असर पड़ा है। इससे गंगा का तल ऊंचा होने और बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ने का दावा किया जाता है।

लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बिहार की बाढ़ को केवल फरक्का बराज या जलसंधि का नतीजा मानने पर विशेषज्ञों और सरकारी संस्थाओं के बीच पूरी सहमति नहीं है। बिहार में गंगा के साथ कोसी, गंडक, घाघरा, बागमती और दूसरी नदियों का भी बड़ा योगदान है।

केंद्रीय स्तर की पूर्व रिपोर्टों में बिहार की गाद की समस्या में उसकी उत्तरी सहायक नदियों से आने वाले भारी सिल्ट को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसलिए फरक्का को बाढ़ का एक कारण बताने का राजनीतिक दावा है, लेकिन इसे बाढ़ का अकेला कारण नहीं माना जा सकता।

केंद्र ने बिहार को दिया भरोसा

इस पूरे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बिहार की चिंता को नजरअंदाज नहीं करने का भरोसा दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संजय झा को लिखे जवाब में कहा है कि भारत-बांग्लादेश गंगा जलसंधि के नवीनीकरण से जुड़ा कोई भी फैसला लेते समय बिहार के हितों और उसकी पानी की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। इसमें पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

संजय झा ने केंद्र के इस जवाब का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बिहार की आबादी 1996 के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में राज्य को खेती और सिंचाई के साथ-साथ पीने के पानी और उद्योगों के लिए भी ज्यादा पानी की जरूरत होगी। इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना पुरानी व्यवस्था को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

अब आगे क्या होगा?

फरक्का जलसंधि की अवधि 12 दिसंबर 2026 को खत्म हो रही है। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के सामने मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने, उसमें बदलाव करने या नई व्यवस्था बनाने का सवाल होगा। बिहार चाहता है कि इस बार बातचीत में राज्य की जरूरतों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।

इस मुद्दे को लेकर बिहार में राजनीतिक सहमति भी बनती दिख रही है। जदयू के साथ आरजेडी के नेता भी केंद्र से बिहार के पानी के हितों को ध्यान में रखने की मांग कर चुके हैं। ऐसे में फरक्का अब सिर्फ भारत-बांग्लादेश के बीच पानी बांटने का मामला नहीं रह गया है। बिहार के लिए यह बाढ़, सिंचाई, पेयजल, उद्योग और भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

बेगूसराय के कार्यक्रम में इस विषय पर डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। जदयू नेताओं ने कहा कि फरक्का जलसंधि को लेकर बिहार की आवाज किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के जल अधिकारों और भविष्य से जुड़ा विषय है।

अब नजर इस बात पर है कि दिसंबर में संधि की अवधि पूरी होने से पहले केंद्र सरकार और बांग्लादेश के बीच होने वाली बातचीत में बिहार की मांगों को कितनी जगह मिलती है।

TAGGED:Bihar Newsगंगा जलफरक्का जलसंधिफरक्का बराजसंजय झा
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
abha
Byआभा शुक्ला
आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
पिछली ख़बर पितृपक्ष मेला 2026 में गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। रानी कमलापति और जबलपुर से इनका परिचालन होगा। पितृपक्ष में गया के लिए दो स्पेशल ट्रेनें, रानी कमलापति और जबलपुर से होगा संचालन
अगली ख़बर घर पर अलसी का जेल बनाने की रेसिपी चेहरे से बालों तक काम आएगा अलसी का जेल, घर पर ऐसे बनाएं नेचुरल जेल; खर्च भी होगा कम

ये भी पढ़ें

आज का राशिफल 9 सितंबर 2026 सभी राशियां

आज का राशिफल 9 सितंबर 2026: मेष से मीन तक जानें दिन कैसा रहेगा, किसे मिलेगा धन और सफलता का साथ

CTET 2026 करेक्शन विंडो में फॉर्म सुधार

CTET 2026: फिर खुली करेक्शन विंडो, 10 सितंबर तक फॉर्म में सुधार का मौका; ऐसे करें आवेदन एडिट

घर पर अलसी का जेल बनाने की रेसिपी

चेहरे से बालों तक काम आएगा अलसी का जेल, घर पर ऐसे बनाएं नेचुरल जेल; खर्च भी होगा कम

फरक्का जलसंधि पर बिहार की मांग

फरक्का जलसंधि पर बिहार की बड़ी मांग, संजय झा बोले- 30 साल का नुकसान बहुत हुआ, अब न हो नवीनीकरण

पितृपक्ष मेला 2026 में गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। रानी कमलापति और जबलपुर से इनका परिचालन होगा।

पितृपक्ष में गया के लिए दो स्पेशल ट्रेनें, रानी कमलापति और जबलपुर से होगा संचालन

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • झारखण्‍ड
  • उत्तर प्रदेश
  • करियर
  • दिल्‍ली

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?