20 मेडिकल कैंप, 34 एम्बुलेंस और 15 पशु शिविर तैनात; दियारा में जंगली जानवरों से निपटने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम भी मैदान में
पटना, 7 सितंबर 2026। गंगा और दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच पटना के बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने राहत और बचाव का मोर्चा पूरी तरह संभाल लिया है। लोगों को सुरक्षित निकालने से लेकर भोजन, इलाज और पीने के पानी तक की व्यवस्था के लिए संसाधनों को जमीन पर उतार दिया गया है। जिले में 189 नावें, 20 मेडिकल कैंप, 34 एम्बुलेंस और 34 सामुदायिक रसोई सक्रिय हैं।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी कुन्दन कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ते ही संसाधन बढ़ाने का निर्देश दिया है। प्रशासन का जोर सिर्फ राहत सामग्री पहुंचाने पर नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों की सुरक्षित आवाजाही, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पशुधन की सुरक्षा पर भी है।

189 नावों से चल रही राहत की ‘जल सेवा’
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए जिले में 189 नावें लगाई गई हैं।
इनमें फतुहा में सबसे ज्यादा 37 नावें, दीदारगंज में 32, मनेर में 27, दानापुर में 26, बख्तियारपुर में 21 और पाटलिपुत्रा में 19 नावें सक्रिय हैं।
इसके अलावा अथमलगोला में 8, बाढ़ में 7, पुनपुन में 3, मोकामा में 6, पालीगंज में 1 और फुलवारीशरीफ में 2 नावें तैनात हैं।
संवेदनशील और अधिक आवागमन वाले इलाकों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एसडीआरएफ की 8 टीमें और एसएसबी की 2 टीमें भी तैनात की गई हैं।
बाढ़ के बीच वन्यजीवों का खतरा, दियारा में रेस्क्यू टीम तैनात
बाढ़ के पानी के फैलाव के साथ दियारा क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आबादी वाले इलाकों की तरफ आने का खतरा भी बढ़ गया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने वन विभाग को भी अलर्ट मोड में रखा है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम को दो रेस्क्यू वाहनों के साथ दियारा क्षेत्र में तैनात किया गया है। टीम जंगली सूअर समेत अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़कर आबादी से दूर करने की कार्रवाई करेगी।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को देखकर उसके करीब न जाएं और न ही उसे छेड़ने की कोशिश करें। वन्यजीव दिखाई देने पर तत्काल प्रशासन या वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है।
इलाज के लिए 20 मेडिकल कैंप, 34 एम्बुलेंस तैयार
बाढ़ प्रभावित लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े, इसके लिए 20 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं।
आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 28 सामान्य एम्बुलेंस और 6 बोट एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। बोट एम्बुलेंस प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रही हैं।
सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि राहत लेने पहुंच रहे लोगों को जरूरत पड़ने पर तत्काल इलाज मिल सके।
34 सामुदायिक रसोई में तैयार हो रहा भोजन
बाढ़ के बीच सबसे जरूरी जरूरतों में भोजन की व्यवस्था है। प्रशासन ने जिले में 34 सामुदायिक रसोई केंद्र चालू किए हैं।
मोकामा में 8, दीदारगंज में 4, पुनपुन में 4, बख्तियारपुर में 3, मसौढ़ी में 3 और नौबतपुर में 3 सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं। इसके अलावा बाढ़, दानापुर, अथमलगोला, संपतचक और फुलवारीशरीफ समेत अन्य प्रभावित इलाकों में भी सामुदायिक रसोई चल रही हैं।
इन केंद्रों के जरिए प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
पशुओं को भी राहत, 15 पशु शिविर सक्रिय
बाढ़ में सिर्फ इंसान ही नहीं, पशुधन भी प्रभावित होता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने 15 पशु शिविर शुरू किए हैं।
अब तक 1,000 क्विंटल से अधिक पशुचारा वितरित किया जा चुका है, जबकि 1,680 पशुओं का उपचार किया गया है।
प्रभावित परिवारों को बारिश और बाढ़ से बचाव के लिए अब तक 6,018 पॉलीथीन शीट्स भी वितरित की जा चुकी हैं।
तटबंधों पर पहरा, पानी उतरते ही सड़कों की मरम्मत
जिले के तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जहां रिसाव, ओवरफ्लो या किसी अन्य तरह की समस्या सामने आ रही है, वहां जल संसाधन विभाग की टीमें तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम कर रही हैं।
बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों पर भी प्रशासन की नजर है। जिन इलाकों में फिलहाल पानी जमा है, वहां जलस्तर कम होते ही सड़क की मरम्मत कर आवागमन बहाल करने की तैयारी है।
डीएम और एसपी ने घाटों और राहत केंद्रों का लिया जायजा
बाढ़ की स्थिति के बीच जिलाधिकारी कुन्दन कुमार और पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने गंगा नदी के विभिन्न घाटों और सामुदायिक रसोई केंद्रों का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और राहत व्यवस्था की जानकारी ली। इसके बाद पुनपुन क्षेत्र में भी बाढ़ राहत कार्यों का जायजा लिया गया।
अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत कार्य में किसी तरह की लापरवाही न हो और प्रभावित लोगों तक मदद समय पर और संवेदनशीलता के साथ पहुंचाई जाए।
प्रशासन का फोकस साफ—जरूरत बढ़ी तो बढ़ेंगे संसाधन
पटना में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। नदियों के जलस्तर से लेकर तटबंधों, राहत केंद्रों, नावों, मेडिकल टीमों और दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों तक की निगरानी की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि स्थानीय जरूरत के अनुसार राहत और बचाव के संसाधन लगातार बढ़ाए जाएंगे।