भागलपुर: गंगा के लगातार उफान ने भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। सोमवार सुबह केंद्रीय जल आयोग की रियल टाइम रिपोर्ट के अनुसार भागलपुर में गंगा का जलस्तर 34.46 मीटर तक पहुंच गया। यह खतरे के निशान 33.68 मीटर से 78 सेंटीमीटर ऊपर है।
वहीं नदी का उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 34.86 मीटर निर्धारित है। ऐसे में गंगा अब HFL से सिर्फ 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। ताजा रिपोर्टों में भी जलस्तर में लगातार वृद्धि और जिले के कई इलाकों में बाढ़ के गंभीर असर की जानकारी सामने आई है।
13 सेंटीमीटर बढ़ा पानी, आगे भी राहत के आसार कम
रविवार सुबह आठ बजे भागलपुर में गंगा का जलस्तर 34.33 मीटर दर्ज किया गया था। सोमवार सुबह तक इसमें 13 सेंटीमीटर की और वृद्धि हो गई। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
भागलपुर में गंगा का पानी पहले ही खतरे के निशान को काफी पीछे छोड़ चुका है। वहीं सुल्तानगंज में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक वहां मौजूदा HFL रिकॉर्ड टूटने की आशंका जताई गई थी।
नाथनगर के कई गांव पानी में, छतों पर गुजारनी पड़ रही जिंदगी
गंगा के बढ़ते पानी का असर नाथनगर प्रखंड के कई पंचायतों में साफ दिखाई दे रहा है। बेलखोरिया, रामपुर, भतोड़िया और बैरिया पंचायत के निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद कई परिवारों की मुश्किल बढ़ गई है।
कई जगह ग्रामीण घर छोड़ने के बजाय मजबूरी में छतों पर रह रहे हैं। गांव की सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी बहने की स्थिति बताई जा रही है। कुछ स्थानों पर पानी की गहराई इससे भी अधिक है। इससे सामान्य आवाजाही प्रभावित हो गई है।
ताजा स्थानीय रिपोर्टों में नाथनगर-अकबरनगर क्षेत्र के गांवों और NH-80 पर भी बाढ़ के पानी के पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
कहलगांव में स्कूलों पर भी पड़ा असर
कहलगांव अनुमंडल में भी बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जलजमाव और प्रभावित इलाकों को देखते हुए कुछ स्कूलों को बंद रखने की स्थिति बनी है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास भी पानी फैलने से लोगों की परेशानी बढ़ी है।
तोफिल और अनठावन जैसे प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
पीरपैंती के दियारा में रास्ते भी पानी में डूबे
पीरपैंती के दियारा इलाके में बाढ़ का असर काफी व्यापक हो गया है। रानी दियारा से बाबूपुर दियारा तक कई हिस्से पानी से घिर गए हैं। ग्रामीण सड़कों पर तेज बहाव के साथ पानी चलने से आवागमन मुश्किल हो गया है।
पीरपैंती बाजार में श्मशान घाट के पास पुल के एप्रोच रोड पर कटाव रोकने के लिए बोल्डर और सैंडबैग लगाए जा रहे हैं। बाढ़ का असर पशुपालकों पर भी पड़ा है। चारे की समस्या के कारण कई लोग मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
सुल्तानगंज के शहरी इलाकों तक पहुंचा पानी
सुल्तानगंज में भी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। महेशी, तिलकपुर, इंग्लिश चिचरौन, गनगनिया और कमरगंज समेत कई पंचायतों के वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी इलाकों में भी पानी फैलने से लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोग राहत, सुरक्षित आवागमन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सुल्तानगंज में गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन भी लगातार निगरानी कर रहा है।
नवगछिया में तटबंधों पर बढ़ता दबाव
गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर नवगछिया अनुमंडल में भी देखने को मिल रहा है। गोपालपुर, नवगछिया, इस्माईलपुर और रंगरा के कई हिस्सों में बाढ़ का दबाव बढ़ा है।
गोपालपुर के ब्रह्मोत्तर बांध पर पानी का दबाव और ओवरफ्लो की स्थिति सामने आई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कई जगह पानी बांध के ऊपर से बहने लगा है और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
इसके अलावा नवगछिया क्षेत्र के कुछ तटबंधों पर रिसाव की सूचना के बाद बचाव कार्य भी किए गए हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
हर घंटे बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता
भागलपुर में गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि ने प्रशासन और ग्रामीणों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़कें और संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं।
ऐसे में आने वाले घंटों में गंगा का जलस्तर किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत पहुंचाना और तटबंधों की निगरानी करना है।