पटना: देशबंधु कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के संजीव कुमार ने हिन्दी कहानी की कहानी (परिवर्तन और निरंतरता एक और आख्यान) पर बातचीत के दौरान प्रारम्भिक कहानियों इंदुमती और एक टोकरी भर मिट्टी से लेकर अभी तक के कथाकारों की कहानी के सफर पर प्रकाश डाला।
हिन्दी कहानी की बदलती हुई संरचना को रेखांकित किया। उन्होने कहा कि कहानी के दो पक्ष हो सकते हैं- एक परिणति पक्ष और दूसरा प्रक्रिया पक्ष।

दो सितंबर बुधवार को पटना विश्वविद्यालय में सातवें नन्दकिशोर नवल स्मृति व्यख्यान को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। अपनी बातों को विस्तार देते हुए सुप्रसिद्ध समालोचक डा.नामवर सिंह के कथनों को उद्घृत करते हुए उदय प्रकाश से लेकर ज्ञानरंजन तक की कथा संरचना और उसमे हो रहे परिवर्तनों के बरख्स कहानी की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। नए कथाकारों में कुणाल सिंह और नीलाक्षी सिंह तक की अत्यंत ताज़ा कहानी तक पर अपनी बातें रखी।
कहानी के दो पक्ष—परिणति और प्रक्रिया
कार्यक्र्म की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कहानीकार ऋषिकेश सुलभ ने की । नवल जी के छात्र रहे श्री सुलभ ने उनके साथ की स्मृतियों को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा.उत्तम कुमार ने किया।स्वागत भाषण डा.संजय कुमार ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन नवल जी के पुत्र चिंतन भारद्वाज ने किया ।

इस मौके पर डा.तरुण कुमार ,अपूर्वानंद, पूर्वा भारद्वाज ,जावेद अख्तर खान, कथाकार संतोष दीक्षित ,डा.योगेश प्रताप शेखर ,कवि कुमार मुकुल,सफदर इमाम कादरी,रमेश कुमार,सतेन्द्र कुमार,विभा कुमारी ,संस्कृति कर्मी अनीस अंकुर एवं जयप्रकाश की गरिमामय उपस्थिति रही।
