25 अगस्त को वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं बैठक, LAC पर शांति और स्थिरता के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर भी होगी चर्चा
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत का दौर शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच गए हैं। वह मंगलवार, 25 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता में हिस्सा लेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस बैठक की पुष्टि की है।
इस बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद, वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर स्थिति और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही दोनों देशों के आपसी संबंधों को सामान्य और स्थिर बनाने के रास्तों पर भी बातचीत हो सकती है।
सीमा पर तनाव कम करना बातचीत का अहम हिस्सा
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है। खासकर पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा था। ऐसे में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का उद्देश्य सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर संवाद जारी रखना और किसी नए तनाव की स्थिति को रोकना है।
विशेष प्रतिनिधि तंत्र के तहत दोनों देश सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करते रहे हैं। इस तंत्र की शुरुआत 2003 में हुई थी। अब 25वें दौर की वार्ता में डोभाल भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि वांग यी चीन की ओर से विशेष प्रतिनिधि होंगे।
6 अगस्त की बैठक के बाद बढ़ी बातचीत
स्क्रीनशॉट में दी गई जानकारी के अनुसार, 6 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। इसके बाद अब डोभाल का बीजिंग दौरा दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत की अगली कड़ी माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखना और सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को स्थिर रखना भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। मई 2026 में भी भारत और चीन के बीच सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए WMCC की बैठक बीजिंग में हुई थी।
चीन के उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात संभव
अपने बीजिंग दौरे के दौरान अजीत डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों से जुड़े व्यापक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हालांकि, यात्रा का सबसे अहम कार्यक्रम 25 अगस्त को होने वाली विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता है।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले दौरा अहम
डोभाल का चीन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने भारत आने की संभावना जताई जा रही है। उनका संभावित दौरा नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। ऐसे में डोभाल और वांग यी की बातचीत को दोनों देशों के बीच आगे होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य क्षेत्रों में संबंध भी हैं, लेकिन सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों में सामान्य स्थिति के लिए जरूरी माना जाता है। विदेश मंत्रालय भी पहले कह चुका है कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों के विकास के लिए जरूरी आधार है।
अब सभी की नजर 25 अगस्त को होने वाली डोभाल-वांग यी वार्ता पर है। बैठक में सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रगति होती है और दोनों देश आगे की बातचीत के लिए क्या रास्ता तय करते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।