तमिलनाडु की सियासत में बयान से मचा बवाल
चेन्नई: स्वतंत्रता दिवस के दिन तमिलनाडु की राजनीति में एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए उनके परिवार को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
नागेंद्रन की टिप्पणी के बाद TVK नेताओं और अन्य राजनीतिक दलों ने इसे निजी और आपत्तिजनक बयान बताया। खास बात यह रही कि बीजेपी के पूर्व तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी नागेंद्रन के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन नेताओं के परिवार और खासकर मां को निशाना बनाना उचित नहीं है।
कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?
दरअसल, विवाद की जड़ मुख्यमंत्री विजय के विधानसभा में दिए गए एक पुराने राजनीतिक तंज से जुड़ी है। जून 2026 में विधानसभा में विजय ने एक कहानी के जरिए विपक्षी राजनीति पर कटाक्ष किया था। उनके बयान को उधयनिधि स्टालिन और उनके पिता एमके स्टालिन की ओर इशारा माना गया था।
इसके बाद 15 अगस्त को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने विजय के उसी बयान का संदर्भ लेते हुए पलटवार किया। लेकिन जवाब राजनीतिक मुद्दे तक सीमित नहीं रहा और विजय की मां को लेकर निजी टिप्पणी कर दी गई।
यही बात विवाद का मुख्य कारण बनी।
अन्नामलाई ने कहा- राजनीति में मर्यादा जरूरी
नैनार नागेंद्रन के बयान पर के. अन्नामलाई की प्रतिक्रिया ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया। अन्नामलाई ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के बीच नीतियों और सरकार के कामकाज को लेकर तीखी बहस हो सकती है, लेकिन परिवार के सदस्यों को व्यक्तिगत हमलों में घसीटना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई कि राजनीतिक बहस में किसी नेता की मां को निशाना बनाया जाए। अन्नामलाई ने इसे तमिलनाडु की राजनीतिक भाषा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि नेताओं को अपने शब्दों और व्यवहार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
TVK ने भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की ओर से भी नागेंद्रन की टिप्पणी पर विरोध जताया गया। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक बहस के स्तर को गिराने वाला बयान बताया और सार्वजनिक माफी की मांग उठाई।

विवाद बढ़ने के साथ तमिलनाडु की सियासत में यह चर्चा तेज हो गई कि चुनाव और सत्ता की राजनीति के बीच नेताओं के बीच व्यक्तिगत हमलों की भाषा किस हद तक स्वीकार्य होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने भी किया विरोध
इस मामले में कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने नागेंद्रन की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने सार्वजनिक माफी की मांग की।
तमिलनाडु सरकार के कुछ मंत्रियों ने भी नागेंद्रन के बयान पर निशाना साधा। स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुण राज ने कहा कि सरकार अपने काम के जरिए जवाब देगी, जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन अरुमुगम ने राजनीतिक नेताओं से पद की गरिमा के अनुरूप बोलने की अपील की।
नागेंद्रन ने बाद में दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद नैनार नागेंद्रन ने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया और उनका इरादा किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को राजनीतिक फायदे के लिए गलत तरीके से पेश किया गया।
यानी मामला सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसके साथ राजनीतिक सफाई का दौर भी शुरू हो गया है।
तमिलनाडु की राजनीति में पहले भी हो चुकी है तीखी बयानबाजी
नैनार नागेंद्रन और विजय के बीच राजनीतिक टकराव कोई नई बात नहीं है। दोनों पक्ष पहले भी एक-दूसरे की नीतियों और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठा चुके हैं।
नागेंद्रन पहले भी विजय की राजनीतिक अनुभवहीनता और उनकी सरकार के कामकाज को लेकर बयान देते रहे हैं। वहीं विजय की राजनीति का सीधा मुकाबला तमिलनाडु के स्थापित राजनीतिक दलों के साथ माना जा रहा है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में ताजा विवाद को देखा जा रहा है।