शंख हिंदू पूजा-पद्धति में खास महत्व रखता है। कई घरों में पूजा की शुरुआत शंखनाद से होती है। धार्मिक मान्यताओं के कारण लोग पूजा के लिए शंख खरीदते समय उसकी शुद्धता और प्राकृतिक बनावट पर भी ध्यान देते हैं। लेकिन बाजार में ऐसे शंख भी मिलते हैं जो देखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं, जबकि वे प्लास्टिक, रेजिन, प्लास्टर या दूसरी सामग्रियों से तैयार किए गए हो सकते हैं।
ऐसे में अगर आप घर के लिए शंख खरीदने की सोच रहे हैं तो उसकी बनावट और कुछ दूसरी चीजों पर ध्यान देकर शुरुआती तौर पर असली और नकली में अंतर समझने की कोशिश कर सकते हैं।
सबसे पहले शंख की बनावट को ध्यान से देखें
असली शंख समुद्र में प्राकृतिक रूप से बनता है। इसलिए उसकी बनावट पूरी तरह एक जैसी होना जरूरी नहीं है। कहीं हल्की ऊंच-नीच, प्राकृतिक रेखाएं या आकार में मामूली अंतर दिखाई दे सकता है।
इसके उलट नकली शंख अक्सर किसी सांचे में तैयार किया जाता है। ऐसे में उसकी सतह जरूरत से ज्यादा एकसमान और कृत्रिम दिखाई दे सकती है।
शंख के किनारे पर बारीक लाइन तो नहीं?
नकली शंख की पहचान में उसकी मोल्ड लाइन भी एक संकेत हो सकती है। सांचे में बनाए गए उत्पाद पर जोड़ की बहुत बारीक रेखा रह जाती है।
शंख को हाथ में लेकर उसके किनारों और दोनों तरफ की सतह को ध्यान से देखें। अगर एक सीधी और कृत्रिम जोड़ वाली लाइन नजर आती है तो उसे खरीदने से पहले दुकानदार से उसके बारे में जरूर पूछें। हालांकि केवल इस एक संकेत के आधार पर शंख को नकली मान लेना सही नहीं होगा।
गर्म पानी वाला घरेलू टेस्ट
मूल रिपोर्ट में असली-नकली शंख की शुरुआती पहचान के लिए गर्म पानी से जांच का तरीका भी बताया गया है। दावा है कि नकली शंख में इस्तेमाल सामग्री के कारण उसके रंग या सतह पर असर पड़ सकता है, जबकि प्राकृतिक शंख में ऐसा बदलाव जरूरी नहीं है।
हालांकि यह कोई प्रमाणित वैज्ञानिक परीक्षण नहीं है। इसलिए महंगे या दुर्लभ शंख की पहचान के लिए केवल इस घरेलू तरीके पर भरोसा करने के बजाय किसी भरोसेमंद विक्रेता या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
कान के पास लगाने पर आवाज सुनाई देती है?
शंख को कान के पास लगाने पर हल्की सरसराहट जैसी आवाज सुनाई देने की बात भी कही जाती है। लेकिन इसे असली शंख की पक्की पहचान मानना ठीक नहीं है।
इसी तरह शंख बजाने से तनाव कम होने या सांस संबंधी समस्याओं में फायदा होने जैसी बातें भी कई जगह कही जाती हैं, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
असली शंख खरीदते समय इन बातों पर दें ध्यान
| क्या देखें | किस बात का संकेत मिल सकता है |
|---|---|
| बनावट | प्राकृतिक शंख में हल्की असमानता हो सकती है |
| सतह | प्राकृतिक रेखाएं और बनावट दिखाई दे सकती है |
| किनारे | सांचे की स्पष्ट जोड़ वाली लाइन संदेह पैदा कर सकती है |
| रंग | बहुत ज्यादा कृत्रिम चमक पर ध्यान दें |
| आकार | बिल्कुल एक जैसा, मोल्डेड आकार होने पर जांच करें |
| विक्रेता | भरोसेमंद दुकान से खरीदना बेहतर है |
| महंगा शंख | विशेषज्ञ से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है |
सिर्फ देखकर फैसला न करें
शंख की बनावट देखकर असली और नकली का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन सिर्फ घरेलू ट्रिक्स से किसी शंख के प्राकृतिक होने की 100 फीसदी पुष्टि नहीं की जा सकती। खासकर अगर शंख महंगा है या उसे दुर्लभ किस्म का बताकर बेचा जा रहा है तो खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना जरूरी है।
इसलिए दुकान पर शंख खरीदते समय जल्दबाजी न करें। उसकी सतह, आकार और किनारों को अच्छी तरह देखें और संभव हो तो विक्रेता से उसके स्रोत और सामग्री के बारे में जानकारी लें।