बिहार में Cyber Crime के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस और प्रशासन ने अब कार्रवाई तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। साइबर अपराध के लिहाज से संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ ठगी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है। शुक्रवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार ने सभी जिलों के डीएम और एसपी के साथ बैठक की। इसमें साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों को लेकर अधिकारियों को कई जरूरी निर्देश दिए गए।
बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि साइबर ठगी की शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ित को एफआईआर के लिए परेशान न होना पड़े। ऑनलाइन शिकायत मिलते ही उस पर कार्रवाई शुरू की जाए और जरूरत पड़ने पर ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाए।
पटना, नवादा और नालंदा पर विशेष नजर
साइबर अपराध के मामले में बिहार के नवादा, नालंदा और पटना देश के टॉप-10 हॉटस्पॉट जिलों में शामिल हैं। वहीं शेखपुरा भी देश के टॉप-15 साइबर हॉटस्पॉट जिलों में है। इन जिलों में साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतों की संख्या को देखते हुए पुलिस को खास निगरानी रखने को कहा गया है।
पटना में एटीएम और चेक के जरिए ठगी की रकम निकालने से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस अब केवल साइबर ठगों की तलाश तक सीमित नहीं रहेगी। ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों और उनसे जुड़े लोगों की भी जांच की जाएगी।
98 फीसदी Cyber Crime शिकायतों का निपटारा
बैठक में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों की कार्रवाई की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के मुताबिक, फ्रॉड से जुड़े बैंक खातों की शिकायतों में करीब 98 फीसदी मामलों का निपटारा किया जा चुका है। वहीं दूसरे राज्यों से जांच के लिए आए अनुरोधों में भी करीब 90 फीसदी मामलों को बिहार पुलिस ने निपटा दिया है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दूसरे राज्यों से आने वाले साइबर अपराध से जुड़े मामलों में भी तेजी से कार्रवाई हो, ताकि अपराधियों तक पहुंचने में किसी तरह की देरी न हो।
साइबर प्रहार में 507 आरोपित गिरफ्तार
साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर प्रहार में भी कार्रवाई का ब्यौरा बैठक में रखा गया। इसके तहत अब तक 6,251 मूल बैंक खातों का सत्यापन किया गया है। कार्रवाई के दौरान 702 लोगों के खिलाफ कदम उठाए गए, जबकि 507 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की जांच में बैंक खाते साइबर ठगी के मामलों की एक अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। ठगी की रकम कई बार दूसरे लोगों के खातों में भेजी जाती है। ऐसे में पुलिस अब इन खातों के पीछे मौजूद लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी ध्यान दे रही है।
16,593 मामलों में रकम वापसी की प्रक्रिया
साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। पुलिस के सामने पैसे वापस कराने से जुड़े 16,593 मामले आए हैं। इनमें 5,642 मामलों में कार्रवाई की गई और कुल 224.53 लाख रुपये की राशि वापस कराने के आदेश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बैंकों के साथ बेहतर तालमेल रखने और संदिग्ध खातों पर समय रहते कार्रवाई करने को कहा है। साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय में रकम को रोकना काफी अहम माना जाता है।
थाने के चक्कर से मिलेगी राहत
साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए बैठक में एक अहम व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। अब ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत के लिए हर मामले में पीड़ित को संबंधित थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से एक लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन ठगी की शिकायत मिलने पर ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके अलावा बिजली बिल, रिचार्ज ऐप, सूदखोरी और नगर निगम से जुड़े सार्वजनिक स्थानों पर साइबर ठगी से बचाव के लिए जागरूकता संदेश लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कुल मिलाकर पुलिस का जोर अब सिर्फ साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करने पर नहीं, बल्कि ठगी की रकम को रोकने, पीड़ित को पैसा वापस दिलाने और अपराधियों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है। खासकर पटना, नवादा, नालंदा और शेखपुरा जैसे हॉटस्पॉट जिलों में आने वाले दिनों में निगरानी और कार्रवाई दोनों बढ़ने की उम्मीद है।