बिहारशरीफ: बिहार सरकार ने राज्य के डेयरी उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के तत्वावधान में सोमवार को नालंदा में 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले दही एवं लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना से न केवल दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार का उद्देश्य ‘सुधा’ को अमूल की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर का एक मजबूत और विश्वसनीय डेयरी ब्रांड बनाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े निवेश किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने बिहार में डेयरी विकास की मजबूत नींव रखी थी। अब सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाते हुए डेयरी उद्योग का विस्तार करेगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
उन्होंने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में डेयरी उद्योग को मजबूत करना ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। सरकार का प्रयास है कि दूध उत्पादन से जुड़े किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बकरीपालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र को भी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी के साथ-साथ बकरीपालन को प्रोत्साहित करने से ग्रामीण परिवारों की आमदनी के नए स्रोत विकसित होंगे और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान कॉम्फेड द्वारा संचालित एचपीसीएल पेट्रोल पंप एवं सुधा कैफेटेरिया का भी उद्घाटन किया गया। इसके अलावा पशुओं के सुरक्षित उठाव और परिवहन के लिए विशेष वाहन का लोकार्पण किया गया। इन सुविधाओं के शुरू होने से डेयरी क्षेत्र की आधारभूत संरचना और अधिक मजबूत होगी।
इस अवसर पर जिले के 300 खुदरा विक्रेताओं के बीच डीप फ्रीजर भी वितरित किए गए। इन डीप फ्रीजर की मदद से दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों का सुरक्षित भंडारण संभव होगा। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दुग्ध उत्पादों की बिक्री और विपणन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
नई दही एवं लस्सी प्रसंस्करण इकाई शुरू होने के बाद नालंदा में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे किसानों को अपने दूध की बिक्री के लिए बेहतर विकल्प मिलेंगे और उन्हें बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी। सरकार का मानना है कि इस परियोजना का लाभ केवल नालंदा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादकों को भी मिलेगा।

बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों से डेयरी क्षेत्र के विस्तार पर लगातार जोर दे रही है। दुग्ध संग्रहण केंद्रों का विस्तार, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और विपणन नेटवर्क को मजबूत करने जैसे प्रयासों के जरिए राज्य को डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में नालंदा का यह नया दही एवं लस्सी प्लांट एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजेंद्र यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक भी मौजूद रहे।
