दिल्ली में यमुना नदी के कालिंदी कुंज घाट के पास सफेद झाग की परत फिर दिखाई देने के बीच नदी से झाग हटाने के लिए प्रस्तावित काम के आवंटन पर सवाल उठे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि डिफोमिंग अभियान के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही साइट पर उपकरण और अन्य इंतजाम पहुंचा दिए गए थे। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की ओर से कहा गया है कि वहां मौजूद कुछ उपकरण और सामग्री पिछले वर्षों के अभियान के बचे हुए स्टॉक का हिस्सा हैं।
टेंडर प्रक्रिया और साइट पर तैयारियों को लेकर सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कालिंदी कुंज में यमुना के झाग को नियंत्रित करने के अभियान के लिए करीब 80 लाख रुपये और करों की अनुमानित लागत वाला टेंडर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 और 22 अक्टूबर को निर्धारित बोली प्रक्रिया से पहले ही साइट पर टेंट, मशीनरी और अन्य उपकरण दिखाई दिए। इस समय-क्रम को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उपकरण किस आदेश के तहत लगाए गए।
AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि टेंडर खुलने से पहले किसी कंपनी की तैयारियां शुरू होना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित मंत्री से जवाब मांगा। ये आरोप राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए हैं; उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर टेंडर में अनियमितता को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
दिल्ली जल बोर्ड का पक्ष
रिपोर्ट के अनुसार, DJB के एक अधिकारी ने कहा कि बोर्ड 2022 से कालिंदी कुंज में झाग कम करने का अभियान चलाता रहा है। अधिकारी के मुताबिक, साइट पर दिखाई दे रही कुछ व्यवस्थाएं बोर्ड की अपनी हैं और पिछले अभियान से बची सामग्री के भंडारण के लिए रखी गई थीं। संबंधित ठेकेदार ICON Instruments Company ने मीडिया के सवालों पर टिप्पणी करने के बजाय उन्हें दिल्ली जल बोर्ड से संपर्क करने को कहा।

विवाद के मुख्य सवालों में यह शामिल है कि साइट पर मौजूद उपकरण किसके निर्देश पर पहुंचे, उस समय टेंडर की प्रक्रिया किस चरण में थी और क्या कोई औपचारिक कार्यादेश जारी किया गया था। इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग की विस्तृत और दस्तावेज-आधारित सफाई से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यमुना में झाग क्यों बनता है?
यमुना में झाग बनने के पीछे सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के साथ आने वाले सर्फेक्टेंट, डिटर्जेंट में मौजूद रसायन तथा सड़ने वाले जैविक पदार्थ जैसे कई कारक हो सकते हैं। बैराज के पास पानी के गिरने और तेजी से मिलने-जुलने पर ये पदार्थ सतह पर झाग बना सकते हैं। विशेषज्ञों और सरकारी अध्ययनों ने नदी में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, नालों के बहाव की जांच और सीवेज शोधन व्यवस्था में सुधार को दीर्घकालीन समाधान के महत्वपूर्ण हिस्से बताया है।
झाग हटाने के लिए डिफोमर का इस्तेमाल सतह पर दिखाई देने वाली समस्या को अस्थायी रूप से कम कर सकता है, लेकिन नदी में प्रदूषण पहुंचने के मूल कारणों पर कार्रवाई जरूरी है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण और नालों की निगरानी में सुधार की आवश्यकता होती है।
पारदर्शिता और प्रदूषण नियंत्रण दोनों जरूरी
इस मामले में दो अलग मुद्दे हैं—डिफोमिंग अभियान के ठेके और कार्यादेश की प्रक्रिया की पारदर्शिता, तथा यमुना में लगातार बन रहे झाग का पर्यावरणीय समाधान। पहले मुद्दे पर टेंडर दस्तावेज, बोली खुलने का समय, कार्यादेश और साइट पर उपकरण पहुंचाने के निर्देश अहम होंगे। दूसरे मुद्दे पर प्रदूषण के स्रोतों को रोकना और सीवेज उपचार क्षमता व गुणवत्ता में सुधार दीर्घकालीन प्राथमिकताएं हैं।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में आरोप और विभागीय पक्ष दोनों सामने आए हैं, लेकिन ठेके की प्रक्रिया में गड़बड़ी का कोई अंतिम निष्कर्ष स्थापित नहीं हुआ है। संबंधित विभाग की आधिकारिक स्पष्टता और दस्तावेजों की जांच से ही यह तय हो सकेगा कि साइट पर तैयारियां नियमों के अनुरूप थीं या नहीं।
