Uttarakhand Teacher: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में शिक्षक भर्ती से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 10 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इन शिक्षकों के उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) 2024 के प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान गड़बड़ी सामने आई थी।
सत्यापन में प्रमाणपत्रों पर दर्ज रोल नंबर और अंक उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के मूल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।
मामला सामने आने के बाद संबंधित प्रमाणपत्रों का बोर्ड के मूल अभिलेखों से मिलान कराया गया। जांच में दस्तावेजों में दर्ज विवरण और बोर्ड के रिकॉर्ड के बीच अंतर पाया गया। इसके बाद विभाग ने संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया।
सत्यापन में सामने आई प्रमाणपत्रों की गड़बड़ी
शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान UTET 2024 से जुड़े दस्तावेजों पर दर्ज रोल नंबर और अंकों का रिकॉर्ड बोर्ड के मूल अभिलेखों से नहीं मिला। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की ओर से जारी जांच रिपोर्ट के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया।

रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। संबंधित शिक्षकों को अपनी बात रखने के लिए सुनवाई का मौका भी दिया गया।
तीन मौके मिले, फिर भी मूल दस्तावेज नहीं कर सके पेश
बागेश्वर के मुख्य शिक्षा अधिकारी आसाराम चौधरी के अनुसार, विभागीय कार्रवाई के दौरान संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने के लिए तीन अवसर दिए गए थे। ज्यादातर शिक्षक शुरुआती दो सुनवाई में शामिल हुए, लेकिन तीसरी सुनवाई में आधे से ज्यादा शिक्षक उपस्थित नहीं हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित शिक्षक अपने प्रमाणपत्रों को सही साबित करने के लिए मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद विभाग ने उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई।
इन 10 शिक्षकों की सेवाएं हुईं समाप्त
विभाग की कार्रवाई की जद में आने वाले शिक्षकों में शामिल हैं:

- कमला देवी — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ससोला
- चंद्र प्रकाश आर्य — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रीमा क्वीटी
- रजनी — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उछात
- लक्ष्मी आर्य — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, स्यालढूंगा
- रोहित कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, चनौस चनूसी
- नेहा — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नरगोली
- संजय कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ठेली
- अरविंद कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जलमानी
- पंकज कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सुदिंल
- प्रियंका — राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उडियारी
नियुक्ति के समय दस्तावेजों की जांच पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने शिक्षक नियुक्ति के समय होने वाली दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी थी तो नियुक्ति के दौरान उनका सत्यापन किस स्तर पर किया गया और मूल रिकॉर्ड से उनका मिलान क्यों नहीं हो सका।
विभाग ने मामले में आगे कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्य नियुक्तियों और दस्तावेजों की जांच भी जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फर्जी प्रमाणपत्रों पर विभाग का सख्त रुख
शिक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति के लिए पात्रता प्रमाणपत्रों की वास्तविकता बेहद अहम होती है। ऐसे में सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई को विभाग की ओर से गंभीरता का संकेत माना जा रहा है।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों का मूल रिकॉर्ड से सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। बागेश्वर में हुई कार्रवाई के बाद अब अन्य नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच पर भी नजर बनी हुई है।

