चिप कंपनियों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी ने बाजार को दिया सहारा; S&P 500 और Nasdaq नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे
नई दिल्ली: अमेरिकी शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों को एक साथ तीन ऐसी खबरों से राहत मिली, जिनका असर शेयर बाजार की चाल पर पड़ता है। चिप कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी, कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में नरमी आई। इन तीनों वजहों ने मिलकर बाजार का भरोसा मजबूत किया।
इसका असर यह हुआ कि अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक S&P 500 और Nasdaq कारोबार के दौरान नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
अलग-अलग उपलब्ध मार्केट कैप आंकड़ों के मुताबिक, S&P 500 में शामिल कंपनियों की कुल बाजार वैल्यू करीब 71.3 ट्रिलियन डॉलर बताई गई है। 1 डॉलर को ₹96 मानें तो यह करीब ₹68.44 लाख करोड़ बैठती है। यह आंकड़ा 30 मार्च के निचले स्तर से करीब 24% ज्यादा बताया गया है।

वहीं, पूरे अमेरिकी शेयर बाजार की कुल वैल्यू 82 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा बताई गई है। ₹96 प्रति डॉलर के हिसाब से यह रकम करीब ₹78.72 लाख करोड़ होती है। तुलना के लिए इसी आंकड़े में अमेरिकी बाजार को चीन के बाजार से करीब 7.5 गुना और जर्मनी के बाजार से करीब 28 गुना बड़ा बताया गया है। हालांकि इन मार्केट कैप आंकड़ों और इन तुलनाओं के मूल स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप का मतलब कंपनियों की कुल बाजार कीमत है। इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी कंपनियों के पास इतनी रकम नकद पड़ी है या उन्होंने इतना मुनाफा कमाया है।
पहला कारण: चिप कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी
मंगलवार की तेजी को सबसे पहले टेक्नोलॉजी और खासकर चिप कंपनियों ने सहारा दिया। Marvell Technology के शेयर में करीब 7% की तेजी आई। वहीं Nvidia और Broadcom के शेयर भी करीब 1-1% चढ़े।
चिप को आसान भाषा में समझें तो यह कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अंदर काम करने वाला बेहद जरूरी छोटा हिस्सा है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर डेटा सेंटर तक, कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां चिप पर निर्भर हैं।

अब सवाल है कि कुछ चिप कंपनियों के शेयर बढ़ने से पूरे बाजार को इतना फायदा क्यों होता है?
इसकी वजह है इंडेक्स में कंपनियों का वजन। S&P 500 में सभी कंपनियों का योगदान बराबर नहीं होता। बड़ी कंपनियों का वजन ज्यादा होता है। इसलिए जब बड़ी टेक कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं तो पूरे इंडेक्स पर उसका ज्यादा असर पड़ता है।
मंगलवार को चिप कंपनियों में खरीदारी ने यही काम किया और टेक्नोलॉजी शेयरों की मजबूती ने S&P 500 तथा Nasdaq को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में मदद की।
दूसरा कारण: तेल सस्ता हुआ तो बाजार को राहत
शेयर बाजार को दूसरा बड़ा सहारा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला।

CNBC के उपलब्ध अपडेट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 2% गिरकर लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। ₹96 प्रति डॉलर के हिसाब से यह करीब ₹9,408 प्रति बैरल होता है।
अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स भी करीब 1% गिरकर लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसी विनिमय दर पर यह करीब ₹8,352 प्रति बैरल बैठता है।
ध्यान रखें, ये रुपये में बदले गए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव हैं। इन्हें भारत में पेट्रोल या डीजल की कीमत नहीं समझना चाहिए।
तेल सस्ता होने से शेयर बाजार को फायदा कैसे?

इसे घर के बजट से समझिए। अगर परिवार का कोई बड़ा नियमित खर्च कम हो जाए तो दूसरे कामों के लिए पैसा बचता है। कंपनियों के मामले में भी कुछ ऐसा ही होता है।
तेल कई उद्योगों के लिए बड़ी लागत है। कच्चा तेल सस्ता होने पर परिवहन, माल ढुलाई और कुछ औद्योगिक गतिविधियों की लागत कम हो सकती है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव घट सकता है और महंगाई को लेकर भी कुछ राहत की उम्मीद बनती है।
हालांकि इसका फायदा हर कंपनी को समान रूप से नहीं मिलता। तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए कीमतों में गिरावट उल्टा दबाव बना सकती है।
Apollo Global Management के चीफ इकोनॉमिस्ट टॉर्स्टेन स्लॉक के मुताबिक, अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों की ओर से अतिरिक्त तेल सप्लाई जारी करने का कदम भी क्रूड की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव डाल सकता है।

तीसरा कारण: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी
बाजार को तीसरा बड़ा सहारा अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट से मिला।
10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 2 बेसिस पॉइंट घटकर 5.29% रह गई। इससे एक दिन पहले यह 2002 के बाद के ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थी।
इसी तरह 2 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 3 बेसिस पॉइंट घटकर 4.802% रही।
यहां ‘बेसिस पॉइंट’ को समझना भी जरूरी है। 1 बेसिस पॉइंट यानी 0.01 प्रतिशत अंक। इसलिए 2 बेसिस पॉइंट की गिरावट का मतलब 0.02 प्रतिशत अंक की कमी है।

बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार का क्या रिश्ता है?
बॉन्ड को सरकार या कंपनियों को दिया गया कर्ज समझ सकते हैं। निवेशक बॉन्ड खरीदता है और बदले में उसे ब्याज मिलता है। यील्ड आसान भाषा में उस बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न का अनुपात है।
आम तौर पर बॉन्ड की कीमत बढ़ती है तो उसकी यील्ड घटती है और कीमत घटती है तो यील्ड बढ़ती है।
जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड बहुत ज्यादा होती है तो निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले सरकारी बॉन्ड आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे में शेयरों में पैसा लगाने की दिलचस्पी प्रभावित हो सकती है।
दूसरी तरफ, ऊंची ब्याज दरें कंपनियों के लिए कर्ज और नई फंडिंग महंगी कर देती हैं। इसलिए यील्ड में थोड़ी नरमी शेयर बाजार के लिए राहत का संकेत मानी गई।

क्या बॉन्ड यील्ड अब अपने ऊंचे स्तर के करीब पहुंच रही है?
टॉर्स्टेन स्लॉक का अनुमान है कि नवंबर की शुरुआत तक बॉन्ड यील्ड अपना ऊंचा स्तर बना सकती है।
उन्होंने इसके पीछे कई संभावित कारण बताए हैं। इनमें 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले मध्य पूर्व में किसी समाधान की संभावना, अतिरिक्त तेल सप्लाई और ऊंची ब्याज दरों से हाउसिंग तथा ऑटो सेक्टर पर पड़ रहा दबाव शामिल हैं।
स्लॉक के मुताबिक, दुनिया के फिक्स्ड इनकम बाजार के करीब 84% हिस्से में यील्ड अब 3% से ज्यादा है। जनवरी 2022 में यह हिस्सा केवल 12% था।
यहां फिक्स्ड इनकम का मतलब मुख्य रूप से बॉन्ड जैसी उन निवेश श्रेणियों से है, जहां निवेशक को अपेक्षाकृत तय आय मिलती है।

उनका मानना है कि तेल की कीमत कम करने वाला कोई समझौता या सरकारी कदम ब्याज दरों पर बने ऊपर की ओर दबाव को कम कर सकता है।
यूरोप के बॉन्ड बाजार से भी मिला संकेत
Rosenberg Research के डेविड रोसेनबर्ग ने भी तेल की कीमतों में गिरावट और यूरोपीय बॉन्ड की कीमतों में तेजी से बाजार पर दबाव कम होने की बात कही।
उनके बताए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक:
- इटली की बेंचमार्क यील्ड 11 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.52% हुई।
- फ्रांस की यील्ड 10 बेसिस पॉइंट घटकर 4.76% रही।
- ब्रिटेन की यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 5.36% पर आ गई।
यानी सिर्फ अमेरिका ही नहीं, यूरोप के बॉन्ड बाजार में भी कुछ राहत दिखाई दी।

अब फेड की बैठक के मिनट्स पर नजर
आगे अमेरिकी बाजार की दिशा के लिए फेडरल रिजर्व की बैठक से जुड़ी जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
Morgan Stanley Wealth Management की इन्वेस्टमेंट चीफ लीसा शैलेट के मुताबिक, पिछले छह हफ्तों में बॉन्ड बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। इसके पीछे संभावित नए फेड नीतिगत ढांचे, आर्थिक ग्रोथ और मध्य पूर्व संघर्ष के कारण महंगे तेल जैसी चिंताएं रही हैं।
उनके मुताबिक, कारोबार के दौरान बाजार की अपेक्षित अस्थिरता भी बढ़ी है। हालांकि छह सप्ताह का यह दौर अभी उस चरम स्तर तक नहीं पहुंचा है, जैसा दबाव 2022 की बड़ी शेयर बाजार गिरावट के दौरान देखने को मिला था।
अब निवेशकों की नजर बुधवार को जारी होने वाले फेड की सितंबर बैठक के मिनट्स पर है।

मिनट्स का मतलब फेड की बैठक में हुई चर्चा का विस्तृत रिकॉर्ड है। इससे निवेशकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि नीति-निर्माताओं ने ब्याज दरों को लेकर क्या सोच रखी और आगे की मौद्रिक नीति को लेकर उनके संकेत क्या हैं।
आगे अमेरिकी बाजार की चाल किन चीजों पर निर्भर करेगी?
अमेरिकी शेयर बाजार की यह तेजी फिलहाल तीन बड़े सहारों पर टिकी दिखाई दे रही है—टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट।
आगे यह देखना अहम होगा कि तेल की कीमतों में आई राहत कितने समय तक रहती है, बॉन्ड यील्ड फिर ऊपर जाती है या नहीं, बड़ी टेक और चिप कंपनियों में खरीदारी जारी रहती है या नहीं और फेड के मिनट्स से ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत मिलते हैं।
यानी मंगलवार की तेजी ने बाजार को राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की दिशा सिर्फ एक दिन की तेजी से तय नहीं होगी। तेल, बॉन्ड यील्ड, टेक शेयरों और फेड की नीति—इन चारों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

