तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के केश्म द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप पर सोमवार देर रात लगातार पांच धमाकों की आवाज सुनाई दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इन विस्फोटों की पुष्टि की है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से Reuters, The Wall Street Journal और The Washington Post ने बताया है कि अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाकर सीमित हवाई हमले किए। अमेरिकी पक्ष ने इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। दूसरी तरफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने दो अमेरिकी MQM-170 टोही ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए अपने नियंत्रण में ले लिया और एक MQ-9 ड्रोन को भी मार गिराया। हालांकि, ड्रोन गिराने के ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन्हें खारिज किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। खास बात यह है कि यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को प्रतिनिधि सभा और सीनेट के लिए मध्यावधि चुनाव का मतदान होना है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले चुनाव से पहले ईरान पर नए हमले नहीं करने की बात कह चुके थे। ऐसे में मतदान से ठीक पहले हुई यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन की रणनीति, घरेलू राजनीति और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
केश्म द्वीप पर पांच धमाके, बंदर लेंगेह तक सुनाई दी विस्फोटों की आवाज
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, केश्म द्वीप पर सोमवार देर रात कुछ ही समय के अंतराल में पांच धमाकों की आवाज सुनी गई। स्थानीय लोगों ने आसमान में दो विमानों को देखने की भी बात कही। ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी Fars ने दक्षिणी तटीय शहर बंदर लेंगेह में भी समुद्र की दिशा से विस्फोटों की आवाज आने की खबर दी।
केश्म द्वीप ईरान के होर्मोजगान प्रांत में स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से के पास इसका सामरिक महत्व है। यह क्षेत्र फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाले समुद्री मार्ग के बेहद करीब है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिहाज से यह इलाका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि, धमाकों के तुरंत बाद ईरानी एजेंसियों ने इनके कारण, निशाने और नुकसान को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी। शुरुआती रिपोर्टों में किसी के हताहत होने की भी पुष्टि नहीं हुई। बाद में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों ने इन धमाकों को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जोड़ा।
अमेरिका ने किसे बनाया निशाना, क्यों बताया रक्षात्मक हमला?
Reuters और The Wall Street Journal की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने केश्म द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए जाने की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ईरानी सैन्य ठिकानों और उन मिसाइल प्रणालियों के खिलाफ थी, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी परिसंपत्तियों और सैन्य विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था।

The Washington Post की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि हमले में ईरानी मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया गया। एक अधिकारी ने इसे अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए रक्षात्मक कदम बताया। Fox News की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी विमान पर ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से गोलीबारी किए जाने के बाद हुई।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने सवालों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर भेजा, लेकिन तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि इस सीमित कार्रवाई का मतलब व्यापक स्तर पर युद्ध फिर से शुरू करना नहीं है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझने की है। अमेरिका का इसे रक्षात्मक हमला बताना उसका आधिकारिक पक्ष है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग प्रतिक्रिया और सैन्य दावे सामने आए हैं। अभी तक हमले में हुए वास्तविक नुकसान का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध नहीं है।
ईरान का दावा- दो MQM-170 ड्रोन कब्जे में, एक MQ-9 भी गिराया
अमेरिकी हमले की खबरों के बीच ईरान की IRGC ने अमेरिकी ड्रोन को लेकर बड़ा दावा किया। ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी Tasnim और सरकारी प्रसारक Press TV के मुताबिक, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दक्षिणी केश्म द्वीप के पास दो अमेरिकी MQM-170 टोही ड्रोन को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की मदद से अपने नियंत्रण में ले लिया।
ईरानी पक्ष का कहना है कि इन ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए जमीन पर उतारा गया और इस तरह इस श्रेणी के अमेरिकी ड्रोन की कुल संख्या चार हो गई, जिन्हें ईरान अपने कब्जे में लेने का दावा कर रहा है। इसके अलावा IRGC ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को भी अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। ईरान ने इसे इस प्रकार का 55वां अमेरिकी ड्रोन बताया है, जिसे उसकी सेना ने नष्ट करने का दावा किया है।
हालांकि, इन दावों को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के ड्रोन संबंधी दावों को खारिज किया है। Gulf News की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पक्ष ने MQM-170 ड्रोन गिराए जाने के दावे को गलत बताया। फिलहाल स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है कि ईरान ने वास्तव में कितने अमेरिकी ड्रोन गिराए या अपने कब्जे में लिए हैं।

इसलिए इसे अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने की प्रमाणित घटना के बजाय ईरानी सैन्य दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ट्रंप के बयान और हमले के समय ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू इसकी टाइमिंग है। अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की एक तिहाई सीटों के लिए मतदान होना है। राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है।
The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने पिछले महीने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। लेकिन चुनाव से ठीक पहले केश्म द्वीप पर हुई सैन्य कार्रवाई ने उस बयान और प्रशासन की वास्तविक रणनीति के बीच अंतर को चर्चा में ला दिया है

यह युद्ध अमेरिकी घरेलू राजनीति के लिए भी चुनौती बना हुआ है। ईरान के साथ संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर अमेरिकी मतदाताओं की चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में चुनाव से पहले किसी नई सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक असर पड़ना स्वाभाविक है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमले का मकसद अमेरिकी मतदाताओं को प्रभावित करना था। उपलब्ध रिपोर्टें हमले को अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा और ईरानी मिसाइल क्षमताओं को सीमित करने से जोड़ती हैं। चुनाव के साथ इसका समय जुड़ना राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा करता है, लेकिन केवल टाइमिंग के आधार पर चुनावी रणनीति को हमले का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।
एक तरफ सैन्य हमला, दूसरी तरफ बातचीत की कोशिश
इस घटनाक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हमले से कुछ घंटे पहले तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी थीं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को संकेत दिया था कि ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर प्रशासन को सकारात्मक उम्मीद है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप और वह बातचीत के परिणाम को लेकर आशावादी हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी बताया था कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। कतर इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी की दोहा यात्रा को भी इसी कूटनीतिक प्रयास से जोड़कर देखा गया।
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए तेहरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और शत्रुता समाप्त करने जैसी शर्तें रखी हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका इन शर्तों पर सहमत होता है तो जलडमरूमध्य को खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि ईरान के साथ संभावित समझौते की उम्मीद के कारण तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान जल्द समझौता करना चाहता है। इस बयान और कुछ ही समय बाद सामने आई सैन्य कार्रवाई ने अमेरिकी नीति में कूटनीति और सैन्य दबाव के एक साथ इस्तेमाल होने की तस्वीर पेश की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव का असर पूरी दुनिया पर
केश्म द्वीप पर हमले का महत्व केवल ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। इसके पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत भी है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के जहाजों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है।
इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री बीमा, जहाजों के परिचालन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, उनके लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। यदि तनाव बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों से लेकर पेट्रोल-डीजल की लागत तक पर दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या ? युद्धविराम या संघर्ष का नया दौर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान किस तरह प्रतिक्रिया देता है। क्या तेहरान इसे सीमित सैन्य कार्रवाई मानकर कूटनीतिक बातचीत जारी रखेगा या अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कदम उठाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।

अमेरिका की ओर से इसे व्यापक युद्ध की शुरुआत नहीं बताया गया है, जबकि ईरान की ओर से ड्रोन गिराने और अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को चुनौती देने वाले दावे किए गए हैं। दोनों देशों के बीच अविश्वास और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव पहले से मौजूद है।
फिलहाल स्थिति की सबसे अहम तस्वीर यही है कि एक तरफ कतर के माध्यम से शांति समझौते की कोशिशें जारी हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरानी जवाबी दावे तनाव को बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी चुनाव के ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम केवल दो देशों के बीच सैन्य टकराव नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिकी घरेलू राजनीति- तीनों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है।
