सिवान गोलीकांड के विरोध में सड़क पर उतरे तेजस्वी यादव, RJD कार्यकर्ताओं ने पार्टी झंडे की जगह थामा तिरंगा; लाठी और इंसास राइफल के साथ सुरक्षा बल तैनात
पटना। सिवान में छात्रों पर हुई फायरिंग के मुद्दे को लेकर बुधवार को पटना में राजनीति गरमा गई। नेता प्रतिपक्ष और RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजभवन मार्च निकाला गया। मार्च को लेकर राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सड़क पर पहली बार इस तरह बैरिकेडिंग कर रास्ता रोका गया और बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की गई।
मार्च की सबसे खास तस्वीर यह रही कि RJD के कई कार्यकर्ता अपने हाथों में पार्टी का झंडा लेकर नहीं, बल्कि तिरंगा लेकर पहुंचे। इससे मार्च का माहौल कुछ अलग नजर आया। कार्यकर्ताओं में सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ सिवान की घटना को लेकर नाराजगी भी दिखाई दी।
सड़क पर बैरिकेडिंग, जवानों की कड़ी निगरानी
राजभवन मार्च को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। मार्च के रास्ते में बैरिकेड लगाए गए। सड़क पर जवानों की तैनाती की गई और पुलिसकर्मी लाठी के साथ नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था में इंसास राइफल लिए जवान भी तैनात रहे।
प्रशासन की कोशिश थी कि मार्च के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखा जाए और प्रदर्शनकारी तय रास्ते से आगे न बढ़ें। दूसरी तरफ RJD कार्यकर्ता और नेता राजभवन की ओर बढ़ने के लिए जुटे रहे। इससे पटना की सड़कों पर राजनीतिक गतिविधि तेज हो गई।
सिवान की घटना ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
इस मार्च की मुख्य वजह सिवान में छात्रों पर हुई फायरिंग का मामला है। RJD इस घटना को लेकर लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है। तेजस्वी यादव ने पहले ही 19 अगस्त को मार्च निकालने का ऐलान किया था। उनका आरोप है कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है और सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए।
तेजस्वी ने मार्च से पहले भी सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि बिहार को पुलिसिया स्टेट नहीं बनने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने सरकार से घटना को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
जेपी गोलंबर से मार्च, बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ता
RJD ने मार्च के कार्यक्रम में बदलाव करते हुए इसे जेपी गोलंबर से शुरू करने का फैसला किया था। पार्टी की ओर से नेताओं, सांसदों और विधायकों से इसमें शामिल होने की अपील की गई थी। तेजस्वी यादव खुद मार्च की अगुवाई कर रहे थे।
मार्च को लेकर RJD ने अपने कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में पटना पहुंचने का आह्वान किया था। सुबह से ही पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ने लगी थी। जैसे-जैसे मार्च आगे बढ़ा, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी और सख्त होती गई।
तिरंगे ने खींचा लोगों का ध्यान
इस पूरे मार्च में तिरंगा खास आकर्षण का केंद्र रहा। आम तौर पर राजनीतिक रैलियों में पार्टी के झंडे बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं, लेकिन इस बार RJD कार्यकर्ताओं के हाथों में तिरंगा नजर आया। इससे मार्च की तस्वीरें भी अलग दिखाई दीं।
राजनीतिक जानकारों की नजर में पार्टी की यह रणनीति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रदर्शन को सिर्फ पार्टी कार्यक्रम के बजाय व्यापक जनमुद्दे से जोड़कर पेश करने की कोशिश दिखाई दी। हालांकि, मार्च का मुख्य राजनीतिक संदेश साफ था, सिवान की घटना को लेकर सरकार पर दबाव बनाना।
सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश
राजभवन मार्च के जरिए RJD ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। दूसरी ओर सरकार और सत्तापक्ष की ओर से तेजस्वी के मार्च को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बहस का नया मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल पटना की सड़क पर तिरंगा, बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा के बीच निकला तेजस्वी यादव का यह मार्च सियासी चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है। सिवान की घटना से शुरू हुआ विवाद अब राजधानी की सड़कों तक पहुंच चुका है और RJD इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है।